गोवंश-मौत मामले में पशु-चिकित्सा संघ ने सीएम को लिखा पत्र:जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग, अध्यक्ष बोले- गौशालाओं की व्यवस्था पर जवाबदेही जरूरी
बदायूं में म्याऊं और सालारपुर ब्लॉक क्षेत्र की गौशालाओं में भारी बारिश के दौरान गोवंश की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। शुक्रवार शाम करीब 4:30 बजे उत्तर प्रदेश पशु चिकित्सा संघ के अध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने वीडियो जारी कर भी अपनी बात रखी। कई अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप पत्र में पशुधन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम, पशुपालन निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद, यूपी लाइवस्टॉक डेवलपमेंट बोर्ड (UPLDB) के सीईओ डॉ. प्रमोद कुमार सिंह, बदायूं डीएम अवनीश राय, सीडीओ गामिनी सिंगला और संबंधित बीडीओ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। संघ अध्यक्ष ने इन अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। डॉ. मनोज कुमार ने पत्र में यहां तक कहा है कि यदि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो आगामी चुनाव में सरकार को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। यह उनका राजनीतिक आकलन है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। गौशालाओं की व्यवस्था पर उठाए सवाल संघ का आरोप है कि अधिकारियों की कार्यप्रणाली के कारण प्रदेश की गौशालाओं की व्यवस्थाएं लगातार सवालों के घेरे में हैं। संगठन ने दावा किया कि इससे संबंधित साक्ष्य पहले भी शासन को भेजे जा चुके हैं। पत्र में गौशालाओं के संचालन में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। संघ ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की जांच कराने और जिन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। NGO को गौशाला सौंपने की प्रक्रिया पर भी सवाल संघ ने पत्र में गौशालाओं को एनजीओ को सौंपने की प्रक्रिया में हुए बदलाव पर भी सवाल उठाया है। संगठन के अनुसार, पहले किसी गौशाला को एनजीओ को सौंपने से पहले जिला स्तर पर जिलाधिकारी और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी की संस्तुति ली जाती थी। मौजूदा व्यवस्था में इस प्रक्रिया को लेकर संघ ने सवाल खड़े किए हैं। प्रशासन पहले ही कर चुका है कार्रवाई गोवंश की मौत के मामले में जिला प्रशासन की जांच के बाद अभिगांव और ब्यौर की गौशालाओं में लापरवाही सामने आने की बात कही गई थी। इसके बाद दोनों ग्राम पंचायत सचिवों को निलंबित किया गया और संबंधित एनजीओ को ब्लैकलिस्ट किया गया। म्याऊं और सालारपुर के पशु चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की संस्तुति भी शासन को भेजी गई थी। गोवंश की मौत की संख्या को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं। शुरुआती रिपोर्टों में पशु प्रेमियों और संगठनों ने अधिक संख्या में मौत का दावा किया था, जबकि प्रशासन ने अलग-अलग चरणों में कम संख्या की पुष्टि की। जांच रिपोर्ट में अभिगांव और ब्यौर की गौशालाओं में लापरवाही और सरकारी धन के दुरुपयोग की बात सामने आने की रिपोर्ट है।
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