ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर दिल्ली-मुंबई में बवाल, महिला प्रदर्शनकारियों के आरोप

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली और मुंबई में लगातार तीन दिनों तक विरोध प्रदर्शन हुआ। दिल्ली में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जबकि कुछ महिला प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बदसलूकी के आरोप लगाए। मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के नेतृत्व में गर्जना मोर्चा निकाला गया। पूरा विवाद चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया और मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर है।

Oct 05, 2026 - 13:06
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ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर दिल्ली-मुंबई में बवाल, महिला प्रदर्शनकारियों के आरोप

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 5 अक्टूबर 2026

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली और मुंबई में लगातार तीन दिनों तक प्रदर्शन हुए। दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोका गया और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया। महिला प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बदसलूकी के आरोप लगाए हैं। मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के नेतृत्व में बड़ा मोर्चा निकाला गया। विवाद की मुख्य वजह चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की आपत्तियां हैं।


दिल्ली में तीन दिनों तक जारी रहा विरोध प्रदर्शन

राजधानी दिल्ली में 2 अक्टूबर से ही ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज से जुड़े लोगों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने अशोक रोड चौराहे के पास बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया। पुलिस के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए बड़ी संख्या में जवानों की तैनाती की गई थी।2 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान सात सौ से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई। हिरासत में लिए गए लोगों में दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी भी शामिल थीं। प्रदर्शन के कारण दिल्ली के कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और कुछ मेट्रो स्टेशनों को भी अस्थायी रूप से बंद किया गया।


तीन अक्टूबर को महिला प्रदर्शनकारियों ने लगाए गंभीर आरोप

3 अक्टूबर को भी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन जारी रहा। इस दौरान लगभग डेढ़ सौ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। इनमें अखिल भारतीय छात्र संघ की अध्यक्ष नेहा बोरा, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और अधिवक्ता प्रशांत भूषण भी शामिल बताए गए।इसी दौरान कई महिला प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बदसलूकी के आरोप लगाए। अखिल भारतीय छात्र संघ की अध्यक्ष नेहा बोरा ने दावा किया कि जब उन्होंने बैरिकेड पार करने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें पकड़कर एक वाहन में बैठा दिया। उनका आरोप है कि जिस वाहन में उन्हें ले जाया गया, उसमें एक भी महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी।


चार अक्टूबर को इंडिया गेट से जंतर-मंतर तक निकला मार्च

4 अक्टूबर को दिल्ली में विरोध प्रदर्शन ने बड़ा रूप ले लिया। आम लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों ने इंडिया गेट से जंतर-मंतर की ओर नागरिक मार्च निकाला। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया।इस दौरान आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज को भी हिरासत में लिया गया। उन्होंने सामाजिक माध्यम पर एक वीडियो साझा कर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उनके मुताबिक पुलिस ने उन्हें कथित तौर पर उल्टा लटकाया, ताकि कैमरों में उनका चेहरा ठीक से दिखाई न दे।


दिल्ली में बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात

4 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने करीब एक सौ बीस लोगों को हिरासत में लिया। प्रदर्शन को देखते हुए लगभग पांच हजार पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी। प्रशासन की ओर से लगातार यह प्रयास किया गया कि प्रदर्शनकारी प्रतिबंधित मार्गों से आगे न बढ़ें।सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने कहा कि यह केवल एक दिन का सांकेतिक विरोध नहीं है। उनके मुताबिक ज्ञानेश कुमार के पद से हटने तक विरोध का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। इससे साफ है कि विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष और प्रदर्शनकारियों का दबाव लगातार बढ़ रहा है।


मुंबई में भी प्रदर्शन ने पकड़ा जोर

मुंबई में भी 2 अक्टूबर से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ। शिवाजी पार्क में आयोजित प्रदर्शन में पुलिस की अनुमति को लेकर विवाद सामने आया। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार कर नारेबाजी की। इस दौरान कलाकारों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों की मौजूदगी भी देखने को मिली।कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मतदान के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। अभिनेत्री शबाना आजमी और संगीतकार विशाल ददलानी समेत कई कलाकारों के प्रदर्शन में शामिल होने की बात सामने आई। इसी दौरान एक पचहत्तर वर्षीय बुजुर्ग की हृदयाघात से मौत हो गई।


मुंबई में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज

शिवाजी पार्क में हुए प्रदर्शन के बाद बिना अनुमति प्रदर्शन करने के आरोप में कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं सहित करीब पांच सौ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बावजूद मुंबई में विरोध प्रदर्शन अगले दिन भी जारी रहा।3 अक्टूबर को दिल्ली के मुकाबले मुंबई में प्रदर्शन अपेक्षाकृत शांत रहा। हालांकि, प्रदर्शनकारियों की संख्या और राजनीतिक समर्थन लगातार बढ़ता गया। इसके बाद 4 अक्टूबर को मुंबई में सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला।


उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने निकाला गर्जना मोर्चा

4 अक्टूबर को मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के नेतृत्व में गर्जना मोर्चा निकाला गया। इस मार्च में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। खास बात यह रही कि प्रदर्शन में किसी राजनीतिक दल का झंडा नहीं रखा गया और प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तिरंगा लेकर मार्च किया।उद्धव ठाकरे ने इसे देश की दूसरी आजादी की लड़ाई बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता का कथित अत्याचारी और सत्तावादी रवैया लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए खतरा बन रहा है। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण के कारण बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित होने का दावा भी किया।


राज ठाकरे ने विशेष गहन पुनरीक्षण पर उठाए सवाल

राज ठाकरे ने विशेष गहन पुनरीक्षण की कानूनी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि पूरे देश में इस तरह की प्रक्रिया चलाने के लिए कानून में स्पष्ट प्रावधान नहीं है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव से वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं।वहीं चुनाव आयोग लगातार इन आरोपों को खारिज करता रहा है। आयोग के अनुसार विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और सही बनाना है। आयोग का कहना है कि मृत व्यक्तियों, दो स्थानों पर पंजीकृत लोगों और स्थायी रूप से विदेश जा चुके लोगों के नाम हटाने की प्रक्रिया इसी का हिस्सा है।


विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर क्यों मचा है बवाल

पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए गंभीर खतरा बता रहा है।उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रारंभिक सूची में देशभर में करीब तेरह करोड़ चालीस लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने की बात सामने आई है। विपक्ष का दावा है कि यह कुल मतदाता संख्या का करीब चौदह प्रतिशत है। हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि सूची की जांच और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।


सितंबर में सामने आया था चुनाव आयोग के भीतर मतभेद का दावा

इस विवाद को उस समय और हवा मिली जब सितंबर 2026 में एक समाचार रिपोर्ट में दावा किया गया कि दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले दस महीनों के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कई फैसलों पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कुछ महत्वपूर्ण निर्णयों को लेकर आयोग के भीतर मतभेद थे।इन दावों के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज कर दी। विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के भीतर पारदर्शिता और सभी आयुक्तों की समान भूमिका बेहद जरूरी है।


क्या ज्ञानेश कुमार देंगे इस्तीफा

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से दावा किया गया है कि यदि 10 अक्टूबर तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो जंतर-मंतर पर बड़े आंदोलन की घोषणा की जाएगी।वहीं केरल सरकार की ओर से भी ज्ञानेश कुमार से जुड़े एक पुराने मामले में सतर्कता जांच के आदेश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। यह मामला वर्ष 2006 की एक परियोजना और मलेशियाई इंजीनियर की मौत से जुड़ा बताया गया है।


चुनाव आयोग और भाजपा ने आरोपों को बताया गलत

दूसरी ओर भाजपा और चुनाव आयोग ने प्रदर्शनकारियों तथा विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है। चुनाव आयोग का कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ा फैसला तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिया गया था।फिलहाल दिल्ली और मुंबई में प्रदर्शन जारी रहने से राजनीतिक माहौल गरम है। एक तरफ विपक्ष ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, वहीं चुनाव आयोग अपने फैसले को उचित बता रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में जाता है और क्या ज्ञानेश कुमार अपने पद पर बने रहते हैं।

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