हादसे ने बस संचालन की निगरानी पर उठाए सवाल:अंबेडकरनगर बस हादसे ने खोली पोल, रात में रफ्तार और फिटनेस की जांच पर उठे सवाल
अंबेडकरनगर में दो अक्टूबर को गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर हुआ भीषण बस हादसा सिर्फ एक सड़क दुर्घटना तक सीमित नहीं है। इसने लंबी दूरी की लग्जरी बसों की रफ्तार, फिटनेस और चालकों की निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 50 यात्रियों को लेकर दिल्ली से दरभंगा जा रही बस करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। कटका क्षेत्र में सुबह करीब 5 बजे बस ट्रेलर से टकरा गई। टक्कर में बस का बायां हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे में चार यात्रियों की मौत हुई, जबकि चार गंभीर रूप से घायल हुए। हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन ने राहत-बचाव का काम किया, लेकिन अब सवाल यह है कि लंबी दूरी की बसों की नियमित निगरानी किस स्तर पर हो रही है। क्या इन बसों की रफ्तार, फिटनेस, परमिट और चालकों की स्थिति की समय-समय पर जांच की जा रही है? हादसे की पूरी वजह सामने आने के लिए इन सभी पहलुओं की जांच जरूरी है। एआरटीओ सत्येंद्र यादव का कहना है कि विभाग की ओर से नियमित चेकिंग की जाती है। रातभर दौड़ती हैं बसें, लेकिन चेकिंग दिन में दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद से बिहार और पूर्वांचल के लिए रोज बड़ी संख्या में लग्जरी बसें चलती हैं। इनमें कई बसें रातभर एक्सप्रेसवे और हाईवे पर सफर करती हैं। कम समय में यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाने की होड़ में बसों की रफ्तार बढ़ने की आशंका रहती है। दूसरी ओर परिवहन विभाग की ज्यादातर चेकिंग दिन के समय सड़कों पर दिखाई देती है। ऐसे में रात में चलने वाली बसों की निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हादसे के बाद सिर्फ चालक पर कार्रवाई काफी नहीं बस और ट्रेलर की टक्कर के बाद चालक और परिचालक के मौके से भागने की बात सामने आई थी। बाद में बस चालक ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। ट्रेलर चालक भी मौके से चला गया था। ऐसे में जांच सिर्फ चालक की लापरवाही तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं होगा। यह भी पता लगाना जरूरी है कि बस की फिटनेस कैसी थी और उसमें स्पीड गवर्नर लगा था या नहीं। चालक कितने घंटे से चला रहा था बस हादसे की जांच में यह भी सामने आना चाहिए कि चालक कितने घंटे से लगातार बस चला रहा था। लंबी दूरी के सफर में चालक को पर्याप्त आराम मिला था या नहीं, बस का परमिट किस रूट के लिए था और उसमें यात्रियों की संख्या तय सीमा के भीतर थी या नहीं, इसकी भी जांच जरूरी है। इन सवालों के जवाब हादसे की असली वजह समझने में मदद कर सकते हैं। हादसे के बाद ही क्यों शुरू होती है कार्रवाई लंबी दूरी की बसों का संचालन हादसे के बाद भी सामान्य रूप से जारी रहता है। अक्सर किसी बड़े हादसे के बाद चेकिंग और कार्रवाई तेज होती है, लेकिन कुछ समय बाद व्यवस्था फिर पहले जैसी हो जाती है। इससे सड़क सुरक्षा को लेकर उठाए जा रहे कदमों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े होते हैं। एआरटीओ सत्येंद्र यादव ने बताया कि विभाग की ओर से नियमित चेकिंग की जाती है।
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