हाईकोर्ट बेंच के लिए निकलेगी पैदल न्याय यात्रा:मेरठ से 14 अक्टूबर को शुरू, 50 दिन में 22 जिलों से गुजरेगी; दिल्ली में प्रदर्शन होगा
हाई कोर्ट बेंच की मांग को लेकर आंदोलन फिर सड़कों पर दिखेगा। हाई कोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति के बैनर तले वकील पूरे पश्चिम उत्तर प्रदेश में पैदल न्याय यात्रा निकालेंगे। इसके लिए 22 जिलों के अधिवक्ताओं ने बैठक भी की। यह यात्रा 50 दिन चलेगी और 2 दिसंबर को दिल्ली पहुंचेगी। यहां पश्चिम उत्तर प्रदेश के 22 जिलों के वकील अपनी मांग उठाएंगे। न्याय यात्रा 14 अक्टूबर यानी कल से मेरठ कचहरी से शुरू होगी। वकीलों ने कहा पश्चिम में बेंच नहीं तो वोट नहीं केंद्रीय संघर्ष समिति के चेयरमैन अनुज शर्मा और संयोजक परवेज आलम ने यात्रा की तैयारियां पूरी कीं। उनका कहना है कि सरकार पर दबाव बनाने का यही सही मौका है। 'बेंच नहीं तो वोट नहीं' का नारा पहले ही दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि 22 जिलों के अधिवक्ताओं के साथ बैठक कर निर्णय लिया गया है। पूर्व में अधिवक्ताओं ने कचहरी परिसर में भाजपा नेताओं की नो एंट्री के पोस्टर भी चस्पा किए थे। उनका कहना है कि यदि मांग नहीं मानी गई तो आगामी चुनाव में नतीजा भुगतना पड़ेगा। दो दिसंबर को दिल्ली पहुंचेंगे अधिवक्ता इस नारे के स्टीकर सभी 22 जिलों में वाहनों पर लगाकर विरोध हो रहा है। अब पैदल न्याय यात्रा निकालने की तैयारी है। 2 दिसंबर को वकील और जनता दिल्ली पहुंचकर धरना-प्रदर्शन कर बेंच की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि यह न्याययात्रा 22 जिलों से होते हुए दिल्ली पहुंचेगी। जहां देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और कानून मंत्री को ज्ञापन के माध्यम से अपनी समस्या को अवगत कराएंगे। उनका कहना है कि पश्चिम के अधिवक्ता ही नहीं आम लोगों को भी समस्या झेलनी पड़ती है। मेरठ से इलाहाबाद हाई कोर्ट की दूरी 800 किलोमीटर हैं। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी सस्ता और सुलभ न्याय देने का दावा करती है। जब एक पीड़ित 800 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद हाई कोर्ट पहुंचेगा तो उसे सस्ता और सुलभ न्याय कैसे मिलेगा। इसके बाद उन्हें वहां जाकर एक वकील भी करना होता है। लेकिन इस मामले में सरकार हस्तक्षेप करने को तैयार नहीं है।
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