हवेली विववाद में चंद्रचूड़ सिंह पक्ष को डबल झटका:हाईकोर्ट ने 5 आरोपियों की गिरफ्तारी पर लगाई रोक, तहसीलदार कोर्ट में विल के खिलाफ रेस्टोरेशन अर्जी भी खारिज

Oct 02, 2026 - 16:56
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हवेली विववाद में चंद्रचूड़ सिंह पक्ष को डबल झटका:हाईकोर्ट ने 5 आरोपियों की गिरफ्तारी पर लगाई रोक, तहसीलदार कोर्ट में विल के खिलाफ रेस्टोरेशन अर्जी भी खारिज
जलालपुर स्टेट हवेली के बंटवारे का विवाद अब नया कानूनी मोड़ ले चुका है। फिल्म अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह और उनके भाई अभिमन्यु सिंह की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर के बाद आरोपी पक्ष को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने मामले में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने आरोपियों को विवेचना में सहयोग करने और विवेचक के सामने अपने बयान दर्ज कराने के निर्देश भी दिए हैं। इधर, हवेली की संपत्ति से जुड़े पुराने विल को लेकर चंद्रचूड़ सिंह पक्ष की ओर से तहसीलदार न्यायालय में दाखिल रेस्टोरेशन अर्जी भी खारिज हो चुकी है। गायत्री देवी पक्ष के मुताबिक, कोर्ट ने अर्जी को निर्धारित समय के बाद दाखिल किए जाने और उसके समर्थन में पर्याप्त आधार/साक्ष्य नहीं होने के कारण स्वीकार नहीं किया। इससे विवाद में गायत्री देवी पक्ष की कानूनी स्थिति को लेकर नया मोड़ आया है। एफआईआर में चाची समेत 7 नामजद विवाद को लेकर अभिमन्यु सिंह ने रोरावर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें उनकी चाची गायत्री देवी, उनके बेटे जय, बेटी अंजनी, स्वीडन के एक नागरिक रौबिन, अधिवक्ता अजीत सिंह तोमर, गवाह संदीप सिंह और शिवकुमार को नामजद किया गया था। एक अज्ञात व्यक्ति को भी आरोपी बनाया गया था। एफआईआर के बाद चंद्रचूड़ सिंह और अभिमन्यु सिंह पुलिस के सामने बयान दर्ज कराने पहुंचे थे। उनका आरोप था कि संपत्ति पर दावा करने के लिए गायत्री देवी पक्ष ने एक विल तैयार कराया, जिसके दस्तावेज और हस्ताक्षर कथित तौर पर फर्जी हैं। हाईकोर्ट पहुंचा गायत्री देवी पक्ष, गिरफ्तारी पर रोक एफआईआर के बाद गायत्री देवी पक्ष ने हाईकोर्ट का रुख किया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने पांच आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। हालांकि, उन्हें विवेचना में सहयोग करने और विवेचक के समक्ष अपना पक्ष व बयान दर्ज कराने को कहा गया है। इसमें गायत्री देवी, जय, अजीत सिंह तोमर, संदीप सिंह व विदेशी नागरिक जय सिंह के सौतेले भाई रौबिन को गिरफ्तारी पर स्टे मिला है। गायत्री देवी के बेटे जय ने बताया कि उनका पक्ष पुलिस की जांच में पूरा सहयोग करेगा। उनके मुताबिक, एफआईआर में लगाए गए आरोप गलत हैं और उनके पास अपने दावे के समर्थन में पर्याप्त दस्तावेज व अन्य साक्ष्य हैं। ‘हमारी विल सही, पुलिस को देंगे एक्सपर्ट रिपोर्ट’ जय ने बताया कि जिस विल के हस्ताक्षरों को चंद्रचूड़ सिंह पक्ष ने फर्जी बताया है, उसकी हैंडराइटिंग और सिग्नेचर एक्सपर्ट से जांच कराई गई है। उनके अनुसार, एक्सपर्ट की रिपोर्ट में हस्ताक्षरों को सही बताया गया है। यह रिपोर्ट भी विवेचक को सौंपी जाएगी। उनका कहना है कि विल से जुड़े अन्य दस्तावेज और साक्ष्य भी पुलिस के सामने रखे जाएंगे। अब इन दस्तावेजों को विवेचना में किस तरह देखा जाता है और पुलिस आगे क्या कार्रवाई करती है, यह महत्वपूर्ण होगा। तहसीलदार कोर्ट में भी चंद्रचूड़ पक्ष की अर्जी खारिज जय के अनुसार, चंद्रचूड़ सिंह पक्ष ने पुराने विल के खिलाफ तहसीलदार न्यायालय में रेस्टोरेशन अर्जी दाखिल की थी। इसमें विल को गलत बताते हुए उसके क्रियान्वयन को रोकने और मामले को दोबारा सुने जाने की मांग की गई थी। गायत्री देवी पक्ष का कहना है कि तहसीलदार न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने देरी से दाखिल की गई रेस्टोरेशन अर्जी के संबंध में कानूनी आधार नहीं मिलने के साथ पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जाने को भी आधार बनाया। हालांकि, इस आदेश के बाद भी विवाद समाप्त नहीं हुआ है। चंद्रचूड़ सिंह पक्ष के पास सक्षम उच्च न्यायालय अथवा अन्य संबंधित न्यायालय में आदेश को चुनौती देने के कानूनी विकल्प खुले हैं। पहली बार मीडिया के सामने आया गायत्री देवी पक्ष इस पूरे विवाद में पहली बार गायत्री देवी पक्ष ने खुलकर अपना पक्ष रखा है। जय ने कहा कि उनके परिवार पर लगाए गए आरोप निराधार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह दावा गलत है कि गायत्री देवी भारत से बाहर चली गई थीं और केवल विल तैयार कराने के समय वापस आईं। उनके मुताबिक, परिवार के लोग बीच-बीच में भारत आते रहे हैं और वर्तमान में भी गायत्री देवी जलालपुर स्टेट हवेली में अपने हिस्से में रह रही हैं। मामले का फैसला होने तक वे हवेली में ही रहेंगी। अब असली नजर पुलिस की विवेचना पर हाईकोर्ट की गिरफ्तारी पर रोक, तहसीलदार न्यायालय में रेस्टोरेशन अर्जी खारिज होने और हस्ताक्षर संबंधी एक्सपर्ट रिपोर्ट सामने आने के बाद अब इस विवाद की अगली दिशा पुलिस की विवेचना से तय होगी। एक तरफ एफआईआर में लगाए गए आरोप हैं, तो दूसरी तरफ गायत्री देवी पक्ष अपने दस्तावेजों और एक्सपर्ट रिपोर्ट को जांच का हिस्सा बनाने की तैयारी में है। अब पुलिस दोनों पक्षों के दावों और साक्ष्यों की जांच के बाद क्या निष्कर्ष निकालती है, इस पर पूरे मामले की अगली तस्वीर निर्भर करेगी।

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