IIT-BHU में गैर शैक्षणिक कर्मचारियों का निदेशक कार्यालय पर घेराव:प्रमोशन और आवास समेत कई मांगें उठाईं,बोले- अब सड़क पर उतरने को होंगे मजबूर

Oct 16, 2026 - 13:59
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IIT-BHU में गैर शैक्षणिक कर्मचारियों का निदेशक कार्यालय पर घेराव:प्रमोशन और आवास समेत कई मांगें उठाईं,बोले- अब सड़क पर उतरने को होंगे मजबूर
आईआईटी बीएचयू में गैर शैक्षणिक कर्मचारियों के फोरम ने शुक्रवार को निदेशक कार्यालय का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने कार्यालय के गेट पर खड़े होकर जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन की सूचना पर सुरक्षाकर्मी भी मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया। फोरम के अध्यक्ष गोपाल यादव ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर प्रशासन गंभीर नहीं है। कई बार लिखित शिकायत और ईमेल के माध्यम से मांगें उठाने के बावजूद समाधान नहीं हुआ है। गोपाल यादव ने बताया कि कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान और प्रशासन से व्यवस्थित संवाद के लिए 17 जुलाई को फोरम का चुनाव हुआ था। इसके बाद करीब तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन कर्मचारियों की प्रमुख समस्याएं जस की तस हैं। उन्होंने कहा कि फोरम के प्रतिनिधियों को ही जवाब नहीं मिल रहा है तो आम कर्मचारियों की सुनवाई कैसे होगी। उन्होंने चार साल पहले सेवानिवृत्त कर्मचारी का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें अब तक अपने बकाये के संबंध में स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। 64 कर्मचारियों के प्रमोशन का मुद्दा फोरम अध्यक्ष के अनुसार, कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में निर्धारित तिथि से लंबित प्रमोशन, आवास आवंटन में वरिष्ठता का पालन, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने और उच्च शिक्षा के लिए एनओसी देने की मांग शामिल है। उन्होंने दावा किया कि 19 कर्मचारियों को प्रमोशन दिया गया, जबकि 64 कर्मचारियों का मामला लंबित है। आवास आवंटन में वरिष्ठता के बावजूद कुछ कर्मचारियों के नाम सूची से गायब होने पर भी उन्होंने सवाल उठाए। टेस्ट के नियमों में समानता की मांग गोपाल यादव ने कहा कि 9 जून 2025 को तकनीकी कर्मचारियों ने लिखित परीक्षा का विरोध किया था। इसके बाद 13 जून को व्यवस्था में बदलाव करते हुए जॉब रिलेटेड टेस्ट की प्रक्रिया अपनाई गई। उनका आरोप है कि मंत्रालयिक संवर्ग के कर्मचारियों के मामले में अब भी अलग नियम लागू हैं। उन्होंने सभी संवर्गों के लिए समान व्यवस्था लागू करने की मांग की। अध्यक्ष ने बताया कि फोरम की ओर से 21 जुलाई और 24 सितंबर को भी प्रशासन से संपर्क किया गया। ईमेल के माध्यम से जवाब के लिए समय भी दिया गया, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई। उन्होंने निदेशक प्रो. अमित पात्रा से कर्मचारियों के बीच आकर उनकी समस्याएं सुनने की अपील की। फोरम ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द संवाद कर समस्याओं के समाधान की समयसीमा तय नहीं की तो कर्मचारी धरना देकर आंदोलन तेज करेंगे। कर्मचारियों का कहना है कि वे संस्थान के दीक्षांत समारोह जैसे महत्वपूर्ण आयोजन में बाधा नहीं डालना चाहते, लेकिन लगातार अनदेखी के कारण उन्हें विरोध का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

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