इटावा में तीन छात्राओं ने संभाली प्रशासन की कमान:वर्तिका बनीं एक दिन की DM, खुशी सीडीओ और काजल बीएसए
इटावा में मिशन शक्ति फेज-6.0 के तहत बालिकाओं में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, नगर क्षेत्र की तीन छात्राओं को मंगलवार सुबह 11 बजे एक दिन के लिए जिले के महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस पहल के तहत कक्षा सात की छात्रा वर्तिका सिंह को एक दिन का जिलाधिकारी, कक्षा सात की छात्रा खुशी को मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) और कक्षा आठ की छात्रा काजल को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) बनाया गया। इस पहल का उद्देश्य छात्राओं को प्रशासनिक कार्यप्रणाली से परिचित कराने के साथ उन्हें भविष्य में बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित करना है। छात्राओं में खासा उत्साह देखने को मिला। महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी मिलने से छात्राओं में खासा उत्साह देखने को मिला। उनके लिए यह अनुभव न केवल नया था, बल्कि आत्मविश्वास बढ़ाने वाला भी रहा। इस अवसर पर जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल ने कहा कि बालिकाओं में प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता की कोई कमी नहीं है। जरूरत उन्हें सही अवसर, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन देने की है। मिशन शक्ति का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षा एवं सम्मान देने के साथ उन्हें स्वावलंबी बनाना और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने छात्राओं को मन लगाकर पढ़ाई करने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बालिकाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का विश्वास देते हैं। पढ़ाई और मेहनत के दम पर वे भविष्य में जिम्मेदार प्रशासनिक पदों तक पहुंचकर समाज और देश की सेवा कर सकती हैं। एक दिन के लिए प्रशासनिक पदों की जिम्मेदारी मिलने पर छात्राओं ने इसे गौरवपूर्ण और प्रेरणादायक अनुभव बताया। सपनों को साकार करने की प्रेरणा उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी, सीडीओ और बीएसए जैसे महत्वपूर्ण पदों के बारे में जानने का अवसर मिलने से उन्हें प्रशासनिक जिम्मेदारियों को समझने में मदद मिली है। इस अनुभव से उन्हें भविष्य में आगे बढ़ने और अपने सपनों को साकार करने की प्रेरणा मिली। मिशन शक्ति फेज-6.0 के तहत आयोजित यह कार्यक्रम बालिकाओं को सुरक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ उनमें नेतृत्व क्षमता, आत्मनिर्भरता और निर्णय लेने का आत्मविश्वास विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका संदेश है कि उचित अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर बालिकाएं भी भविष्य में उच्च प्रशासनिक पदों पर पहुंचकर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।
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