जेन अल्फा के हॉस्टल में नहाने को बाल्टी नहीं..:लखनऊ में सड़क जाम करने वाले बच्चे बोले- फिजिक्स-मैथ के टीचर्स से नहीं पढ़ेंगे
लखनऊ के पारा स्थित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय में पढ़ने वाले जेन-अल्फा अपनी समस्याएं बताने के लिए सड़क पर उतर रहे हैं। 14 अगस्त को छात्रों के प्रदर्शन के बाद 17 अगस्त को छात्राएं स्कूल की बाउंड्री फांद गई। बारिश के बीच करीब 3 किलोमीटर पैदल चलीं और सड़क पर जाम लगा दिया। उनकी शिकायत सिर्फ फिजिक्स और मैथ्स के शिक्षक नहीं होने तक सीमित नहीं है। हॉस्टल में नहाने के लिए बाल्टी जैसी जरूरी चीजों से लेकर खाना, बिजली, इलाज और शिकायतों का समय पर समाधान नहीं होने तक कई सवाल हैं। दैनिक भास्कर की टीम ग्राउंड पर पहुंची, बच्चों और परिजनों से बातचीत की। इस दौरान स्कूल की व्यवस्थाओं से जुड़ी कई बातें सामने आईं। बच्चों का कहना है कि उनकी छोटी-छोटी समस्याओं पर भी समय से सुनवाई नहीं होती। कुछ परिजनों ने बच्चों के बार-बार बीमार पड़ने की बात कही। स्कूल में कक्षा 6 से 12 तक करीब 300 बच्चे पढ़ते और रहते हैं। ऐसे में लगातार दो दिन हुए प्रदर्शन ने स्कूल की पढ़ाई के साथ हॉस्टल और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। भास्कर ने स्कूल की व्यवस्थाओं को मौके पर समझने की कोशिश की, लेकिन प्रशासन ने परिसर के अंदर फोटो-वीडियो बनाने की अनुमति नहीं दी। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…. प्रदर्शन की 3 तस्वीरें देखिए… 'समय पर नहीं सुनी जाती है हमारी बात' स्कूल में पढ़ने वाली अनामिका का कहना है कि छोटी-छोटी बातों के लिए भी उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। किसी समस्या की शिकायत करने पर तुरंत जवाब नहीं मिलता। कई बच्चों ने शिक्षकों के व्यवहार को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि शिक्षक उनकी बात का ठीक से जवाब नहीं देते और कई बार जिम्मेदार अधिकारी तक बात पहुंचाना भी आसान नहीं होता। बच्चों के मुताबिक, लगातार शिकायतों का समाधान नहीं होने के कारण नाराजगी बढ़ती गई। खाने को लेकर भी बच्चों ने उठाए सवाल प्रदर्शन के दौरान बच्चों की एक प्रमुख मांग हॉस्टल में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता सुधारने की थी। शिवानी का कहना है कि खाने को लेकर कई बार दिक्कत होती है। स्कूल के बाहर मौजूद कुछ परिजनों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनके बच्चे बार-बार बीमार पड़ते हैं। उनका दावा है कि कुछ बच्चे 15 से 20 दिन में बीमार हो जाते हैं। हालांकि बच्चों के बीमार पड़ने की वजह अभी साफ नहीं है। इसकी वजह पानी, खाना, हॉस्टल की साफ-सफाई या रहन-सहन में से क्या है, यह जांच के बाद ही पता चलेगा। बीमार हुए तो इलाज के लिए बाहर ले जाते हैं, फिर वापस स्कूल परिजनों के मुताबिक, जब बच्चा बीमार पड़ता है तो स्कूल की तरफ से परिवार को जानकारी दी जाती है। इसके बाद बच्चे को इलाज के लिए बाहर ले जाया जाता है। इलाज के बाद उसे फिर स्कूल में छोड़ दिया जाता है। अगर बच्चे बार-बार बीमार पड़ रहे हैं तो इसकी वजह जानने के लिए स्कूल स्तर पर क्या जांच कराई गई? पानी की जांच कब हुई? खाने के सैंपल लिए गए या नहीं? बच्चों की मेडिकल हिस्ट्री का रिकॉर्ड रखा जा रहा है या नहीं? इन सवालों के जवाब अभी साफ नहीं हैं। फिजिक्स और मैथ के शिक्षक नहीं स्कूल में कक्षा 6 से 12 तक करीब 300 बच्चे पढ़ते हैं। बच्चों की सबसे बड़ी शिकायत शिक्षकों की कमी को लेकर है। खास तौर पर फिजिक्स और मैथ्स के शिक्षक नहीं होने की बात सामने आई है। लेकिन सवाल यह है कि स्कूल में कुल कितने शिक्षक होने चाहिए और अभी कितने हैं? कितने पद खाली हैं? अगर कोई शिक्षक लंबे समय की छुट्टी पर है तो उसकी जगह पढ़ाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? प्रमुख सचिव अनुराग यादव ने बताया- सभी बच्चों से पर्सनल बात हुई है। फिजिक्स की टीचर मैटरनिटी लीव पर हैं। मैथ्स की टीचर अभी छुट्टी पर हैं। स्कूल प्रशासन से संवाद की कमी के चलते आज ऐसा हुआ होगा। बच्चों ने देखा होगा कि बगल के स्कूल के बच्चों ने ऐसा किया तो हम भी ऐसा करते हैं। बच्चे बहुत अच्छे हैं। कुछ शिक्षकों को लेकर भी बच्चों में नाराजगी बच्चों ने सिर्फ शिक्षकों की संख्या को लेकर शिकायत नहीं की। कुछ बच्चों ने यह भी कहा कि उन्हें कुछ शिक्षक पसंद नहीं हैं और उनकी बात को ठीक से नहीं सुना जाता। इसी स्कूल में 14 अगस्त को पहले लड़कों ने शिक्षकों की कमी को लेकर प्रदर्शन किया था। इसके बाद 17 अगस्त को छात्राएं भी अपनी मांगों को लेकर सड़क पर आ गईं। स्कूल के अंदर फोटो-वीडियो की अनुमति नहीं मिली दैनिक भास्कर की टीम ने स्कूल की व्यवस्थाओं को मौके पर समझने की कोशिश की, लेकिन स्कूल प्रशासन ने परिसर के अंदर फोटो और वीडियो बनाने से मना कर दिया। इसलिए हॉस्टल, रसोई, स्नानघर, पानी की व्यवस्था और दूसरी सुविधाओं की तस्वीर सामने नहीं आ सकी। ऐसे में बच्चों और परिजनों की शिकायतों की पूरी सच्चाई जानने के लिए विभाग को खुद इन व्यवस्थाओं की जांच करनी होगी। ---------------------- ये खबर भी पढ़िए- लखनऊ में जेन-अल्फा छात्राएं सड़कों पर, हाईवे जाम किया : बोलीं- टीचर नहीं, पढ़ें कैसे? 8KM पैदल चलीं, प्रमुख सचिव ने ढाई घंटे बात की लखनऊ में शिक्षकों की कमी को लेकर जेन-अल्फा ने एक बार फिर सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। सोमवार सुबह 7 बजे बारिश के बीच करीब 250 जेन-अल्फा छात्राएं दुबग्गा-कानपुर बाईपास चौराहे पर इकट्ठा हुईं। सड़क पर बैठकर जाम लगा दिया। छात्राएं मोहान रोड स्थित जयप्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय से ढाई किमी चलकर यहां तक पहुंचीं। 6वीं से 12वीं कक्षा तक के इस स्कूल को समाज कल्याण विभाग चलाता है। (पूरी खबर पढ़िए)
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