झांसी GRP को 89 साल बाद मिला नया थाना:महानिदेशक बोले-स्मार्ट पुलिसिंग से यात्री और रेल संपत्ति होगी अपराध मुक्त
झांसी में करीब नौ दशक बाद जीआरपी झांसी को नया थाना भवन मिला है। बुधवार को उत्तर प्रदेश राजकीय रेलवे पुलिस के महानिदेशक प्रकाश डी ने पांच करोड़ रुपये की लागत से बने तीन मंजिला थाना भवन का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ रेलवे ट्रैक की निगरानी भी जीआरपी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। बदलते समय के साथ रेलवे पुलिस को हाईटेक बनाना जरूरी है। नए भवन से पुलिसकर्मियों को बेहतर कार्य वातावरण मिलेगा और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल में भी सहूलियत होगी।
दोपहर करीब एक बजे झांसी पहुंचे जीआरपी महानिदेशक ने सबसे पहले नए थाना भवन का निरीक्षण किया। इसके बाद परिसर में पौधरोपण किया। उन्होंने थाना प्रभारी को निर्देश दिए कि पौधरोपण को केवल औपचारिकता न समझें, बल्कि लगाए गए पौधे की देखभाल भी करें। इसके बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत की। महानिदेशक ने नए थाना भवन के लिए रेलवे का आभार जताया। उन्होंने कहा कि स्मार्ट पुलिसिंग समाज को भयमुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी है। मुख्यमंत्री जिस तरह सिविल पुलिस को लगातार आधुनिक तकनीक से लैस करने पर जोर दे रहे हैं, उसी तरह जीआरपी को भी हाईटेक बनाया जा रहा है। अब एक क्लिक पर अपराधी से जुड़ी जानकारी कंप्यूटर स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाती है। इससे अपराधियों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई में मदद मिलती है। झांसी पहुंचे महानिदेशक के अलावा थाना परिसर में डीआरएम अनिरुद्ध कुमार, डीएम गौरांग राठी, एसएसपी विकास कुमार, रेलवे के वरिष्ठ सुरक्षा आयुक्त जितेंद्र शर्मा, एसपी जीआरपी विपुल कुमार श्रीवास्तव और सीओ सलीम खान ने भी पौधा रोपण किया। पथराव, चोरी और ट्रैक की सुरक्षा बड़ी चुनौती जीआरपी महानिदेशक प्रकाश डी ने कहा कि झांसी जीआरपी के कामकाज के रिकॉर्ड देखे गए हैं। यहां पुलिस अच्छा काम कर रही है। हालांकि, रेलवे पुलिस के सामने ट्रेनों पर पथराव, यात्रियों के सामान की चोरी और रेलवे ट्रैक की सुरक्षा जैसी चुनौतियां हैं। इनसे निपटने के लिए जीआरपी ने तैयारी शुरू कर दी है। रेलवे सुरक्षा बल यानी आरपीएफ के साथ भी समन्वय स्थापित किया गया है।
उन्होंने बताया कि जल्द ही जीआरपी को ड्रोन उपलब्ध कराए जाएंगे। इनका इस्तेमाल ट्रेनों पर पथराव करने वालों और रेलवे ट्रैक के आसपास सक्रिय असामाजिक तत्वों की निगरानी के लिए किया जाएगा। ड्रोन की मदद से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और आरोपियों की धरपकड़ में भी सहायता मिलेगी। रात की ट्रेनों में शत-प्रतिशत स्कॉर्टिंग का लक्ष्य ट्रेनों में जीआरपी की स्कॉर्टिंग के सवाल पर महानिदेशक ने कहा कि उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन करीब 3,050 ट्रेनें गुजरती हैं। इनमें 30 लाख से अधिक यात्री सफर करते हैं। ऐसे में प्रत्येक ट्रेन में सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती है। जीआरपी का प्रयास है कि रात में चलने वाली ट्रेनों में शत-प्रतिशत स्कॉर्टिंग सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने बताया कि वंदे भारत, शताब्दी, राजधानी और गतिमान जैसी प्रीमियम ट्रेनों में रेलवे सुरक्षा बल यानी आरपीएफ की ओर से स्कॉर्टिंग की जाती है। जीआरपी का प्रयास है कि उपलब्ध संसाधनों के आधार पर अधिक से अधिक ट्रेनों में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जा सके, ताकि यात्रियों को सुरक्षित सफर का भरोसा मिले। 250 हॉट स्पॉट पर लगाए जा रहे सोलर कैमरे ट्रेनों पर पथराव की घटनाओं को रोकने के लिए जीआरपी ने प्रदेशभर में 250 हॉट स्पॉट चिह्नित किए हैं। महानिदेशक प्रकाश डी ने बताया कि इन स्थानों पर पथराव और रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं अधिक होती हैं। इनकी निगरानी के लिए प्रदेश के पांच जोन के महाप्रबंधकों के साथ समन्वय स्थापित किया गया है।
चिह्नित स्थानों पर सौर ऊर्जा से चलने वाले कैमरे लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। इन कैमरों से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। विभाग को उम्मीद है कि निगरानी व्यवस्था मजबूत होने से ट्रेनों पर पथराव की घटनाओं में कमी आएगी और रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना आसान होगा। पैडलर ही नहीं, नशे के कारोबार के हैंडलर तक पहुंचेगी जीआरपी ट्रेनों के जरिए मादक पदार्थों की तस्करी के मामलों पर महानिदेशक ने कहा कि जीआरपी लगातार तस्करों को पकड़ रही है। अब विभाग की प्राथमिकता ऐसे मामलों में आरोपियों को सजा दिलाना भी है। इसके लिए मामलों की प्रभावी पैरवी कर उन्हें फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलवाने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि बिहार और हरियाणा की सीमाओं से जुड़े क्षेत्रों में मादक पदार्थों की तस्करी की चुनौती है। जीआरपी अब केवल गांजा और शराब लेकर चलने वाले पैडलर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन लोगों तक पहुंचने का प्रयास करेगी, जो उन्हें नशीले पदार्थ उपलब्ध कराते हैं। इसके लिए तस्करी के पूरे नेटवर्क की पहचान कर उसके प्रमुख संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अब थाने की सुविधाएं देखें एसी युक्त विवेचना कक्ष: मामलों की जांच और पूछताछ के लिए अलग से वातानुकूलित कक्ष बनाया गया है। पिंक रूम: महिला आरोपियों से पूछताछ के लिए अलग कक्ष की व्यवस्था की गई है। कंप्यूटर रूम: तकनीकी कार्यों और डिजिटल रिकॉर्ड के प्रबंधन के लिए अलग कमरा बनाया गया है।
महिला सिपाहियों के लिए रेस्ट रूम: महिला पुलिसकर्मियों के आराम के लिए अलग कक्ष है। बंदियों के लिए अलग टॉयलेट: बंदियों के लिए स्वच्छ और अलग शौचालय की व्यवस्था की गई है। 18 सीसीटीवी कैमरे: तीन मंजिला भवन में निगरानी के लिए 18 कैमरे लगाए गए हैं। महिला हेल्प डेस्क: महिला यात्रियों की शिकायतों और समस्याओं के समाधान के लिए अलग डेस्क बनाई गई है। नारी शक्ति डेस्क: महिलाओं से जुड़े मामलों में सहायता और सुनवाई के लिए विशेष डेस्क की व्यवस्था की गई है।
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