झांसी में आशाओं ने लगाया सोशल मीडिया का ट्रेंडिंग नारा:डिप्टी सीएम को घेरने पहुंची महिलाओं ने बोलीं- 'एक कचौड़ी, दो समोसा, योगी का क्या भरोसा'
झांसी में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वर्षों से सेवाएं दे रहीं आशा वर्करों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार को प्रदर्शन किया। पहले आशा वर्कर मुख्य चिकित्सा अधिकारी पहुंचीं और नारेबाजी करते हुए योगी सरकार से नाराजगी जताई। इस दौरान उन्होंने "एक कचौड़ी, दो समोसा, योगी तेरा क्या भरोसा" के नारे लगाए। इसके बाद आशा वर्कर पंडित दीनदयाल सभागार पहुंच गईं। दरअसल, सोमवार को उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक का विश्व हिंदू परिषद के कार्यक्रम में शामिल होने का कार्यक्रम था। आशा वर्करों को उम्मीद थी कि वह उपमुख्यमंत्री का घेराव कर उनके सामने अपनी मांगें रखेंगी। हालांकि, उनका कार्यक्रम स्थगित हो गया। इसके बाद सभागार पहुंचीं आशा वर्करों ने जमकर नारेबाजी की। इसी दौरान एमएलसी बाबूलाल तिवारी और पूर्व जिला अध्यक्ष प्रदीप सरावगी भी सभागार पहुंच गए। आशा वर्करों ने दोनों नेताओं का घेराव करते हुए जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि वह लंबे समय से स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं दे रही हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है। कोरोना में कहा कोरोना वॉरियर्स, अब मेहनताना भी नहीं
प्रदर्शन कर रहीं आशा वर्करों ने कहा कि कोरोना संक्रमण के दौरान उनसे जान हथेली पर रखकर काम कराया गया। उस समय उन्हें कोरोना वॉरियर्स कहा गया और मरीजों की सेवा में लगातार ड्यूटी कराई गई। लेकिन अब उनके काम के बदले उचित मेहनताना तक नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि फील्ड में स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं और अभियानों की जिम्मेदारी निभाने के बावजूद उन्हें उनके काम के सापेक्ष वेतन नहीं मिल रहा है। नियमितीकरण और समान वेतन की मांग आशा वर्करों ने मुख्यमंत्री से वर्षों से निरंतर सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए शासन स्तर पर स्पष्ट और प्रभावी नीति बनाने की मांग की। उनका कहना है कि कर्मचारियों की योग्यता, अनुभव और सेवा अवधि का उचित लाभ दिया जाना चाहिए।
इसके साथ ही समान कार्य के लिए समान वेतन लागू करने की मांग भी उठाई गई। आशा वर्करों का कहना है कि समान प्रकृति का कार्य करने वाले संविदा और नियमित कर्मचारियों के बीच वेतन की असमानता दूर की जानी चाहिए। वेतन विसंगतियां दूर करने की मांग
आशा वर्करों ने विभिन्न पदों पर व्याप्त वेतन विसंगतियों का परीक्षण कर उनका समाधान करने की मांग की। उन्होंने कहा कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद कई बार वेतन और मानदेय समय पर नहीं मिल पाता। इससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक परेशानियां खड़ी हो जाती हैं। उन्होंने प्रत्येक माह निर्धारित समय पर वेतन और मानदेय का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की। आशा वर्करों ने कहा कि वे प्रदेश की जनता को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में लगातार अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। ऐसे में सरकार को भी उनकी जायज मांगों पर सकारात्मक और शीघ्र निर्णय लेना चाहिए।
आशा वर्करों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।
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