झांसी में ANM ने खोला मोर्चा, मांगों को लेकर प्रदर्शन:बोलीं-उप मुख्यमंत्री हमें स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ कहते थे, अब कहां गया सम्मान ?
झांसी में डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक के सामने अपनी मांगें रखने पहुंचीं एएनएम को पंडित दीनदयाल सभागार में प्रवेश नहीं मिला तो उन्होंने मेन गेट पर ही प्रदर्शन शुरू कर दिया। हालांकि डिप्टी सीएम का कार्यक्रम स्थागित होने के चलते वह झांसी नहीं आए थे। इसी दौरान वहां पहुंचे भाजपा के जिला प्रभारी प्रदीप सरावगी का एएनएम ने घेराव कर नारेबाजी शुरू कर दी। जिला प्रभारी ने महिलाओं को शांत कराते हुए कहा कि “फोटो के चक्कर में नारेबाजी नहीं करनी है।” जिला प्रभारी उनकी बात सुनकर जैसे ही सभागार की तरफ बढ़े, महिलाओं ने फिर नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस ने उन्हें गेट से हटाने की कोशिश की, लेकिन एएनएम अपनी मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने तक प्रदर्शन करने पर अड़ी रहीं। एएनएम बोलीं-10 साल से कर रहीं काम, फिर भी हाशिये पर एएनएम ने डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक को संबोधित ज्ञापन जिला प्रभारी को सौंपा। उन्होंने कहा कि वे 10-10 साल से संविदा पर एएनएम के रूप में काम कर रही हैं। कर्मचारियों के बराबर काम करने के बावजूद उन्हें सुविधाओं और अधिकारों के मामले में हाशिये पर रखा गया है। उन्होंने नियमितीकरण की मांग उठाई। एएनएम की प्रमुख मांगें
10 साल की सेवा का लाभ: लंबे समय से संविदा पर काम कर रहीं एएनएम को नियमित किया जाए। स्थायी नियुक्ति तक समान सुविधाएं: नियमितीकरण होने तक अन्य राज्य कर्मचारियों की तरह वेतन, भत्ते और दूसरी सुविधाएं दी जाएं। लिखित आश्वासन चाहिए: एएनएम ने कहा कि केवल मौखिक भरोसे के बजाय मांगों पर कार्रवाई का लिखित आश्वासन दिया जाए। डिप्टी सीएम तक पहुंचेगी बात: जिला प्रभारी प्रदीप सरावगी ने एएनएम को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगें डिप्टी सीएम बृजेश पाठक तक पहुंचाई जाएंगी। गेट पर रोका, बाहर ही शुरू हुआ प्रदर्शन
एएनएम डिप्टी सीएम के सामने अपनी बात रखना चाहती थीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें सभागार के अंदर जाने से रोक दिया। इसके बाद महिलाओं ने मुख्य गेट पर ही नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस उन्हें हटाने में जुटी रही, जबकि एएनएम लिखित आश्वासन मिलने तक प्रदर्शन जारी रखने पर अड़ी रहीं।
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