झांसी में हत्या के मामले में युवक दोषमुक्त:कोर्ट ने कहा- कोई ऐसा साक्ष्य नहीं, जो आरोप साबित करते हो, 4 साल पहले हुई थी हत्या

Oct 01, 2026 - 12:43
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झांसी में हत्या के मामले में युवक दोषमुक्त:कोर्ट ने कहा- कोई ऐसा साक्ष्य नहीं, जो आरोप साबित करते हो, 4 साल पहले हुई थी हत्या
झांसी में हत्या के एक मामले में कोर्ट ने आरोपी राजेंद्र को दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट ने कहा- आरोपी के खिलाफ ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जो आपराधिक आरोपों को साबित करते हो। अभियोजन लगाए गए आरोपों को साबित करने में असफल रहा है। इसलिए आरोपी को संदेह के आधार पर दोषमुक्त किया जाता है। 4 साल पहले लहचूरा थाना क्षेत्र में भैयालाल की हत्या हुई थी। इस मामले में पुलिस ने राजेंद्र को गिरफ्तार करके जेल भेजा था। अब कोर्ट ने तत्काल रिहाई के आदेश दिए हैं। सुनवाई के दौरान विवेचना में भी कई खामियां उजागर हुईं। यह था पूरा मामला मऊरानीपुर के कदौरा गांव निवासी लालाराम ने 29 अप्रैल 2022 को लहचूरा थाने में तहरीर दी थी। जिसमें बताया था कि उसके पिता भैयालाल (52) बरूआमाफ में धसान नदी के किनारे मछली पकड़ने का काम करते थे और नदी किनारे झोपडी बनाकर रहते थे। 27 अप्रैल 2022 को पिता कदौरा से बहन ऊषा के मुकदमे के संबंध में देवरी चौकी गए। फिर गांव आए और बरुआमाफ गांव के पूर्व प्रधान उदय चंद्र के साथ चले गए। अगले दिन बहन ऊषा ने फोन लगाकर बताया कि पिता का नंबर स्विच ऑफ है। तब वह नदी किनारे पहुंचा। वहां पिता चारपाई पर मृत मिले। उसे पता चला कि पिता ने 27 अप्रैल 2022 को बरुआमाफ के चतुर्भुज के घर पर पूर्व प्रधान उदय चंद ढीमर के बुआ के बेटे राजेंद्र के साथ मछली बनाकर शराब पी। उसे आशंका है कि पिता की हत्या चतुर्भुज, पूर्व प्रधान उदय चन्द्र एवं उसका बुआ के बेटे राजेन्द्र ने की है। राजेन्द्र गुरसराय थाना क्षेत्र के बंका पहाडी गांव का रहने वाला है। पुलिस ने केस दर्ज करके राजेंद्र को गिरफ्तार किया था। बाद में उसके खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया गया। न्यायालय संख्या-1 के अपर सत्र न्यायाधीश आदित्य चतुर्वेदी ने बुधवार को आरोपी राजेंद्र को संदेह के आधार पर दोषमुक्त कर दिया। आरोपी की रिहाई के 3 बड़े फैक्टर 1. कोर्ट ने कहा- आरोपी की गिरफ्तार के समय पुलिस टीम के साथ वादी मुकदमा लालाराम और एक अन्य व्यक्ति राजबहादुर को पहले थे। जबकि मामले में विवेचक ने राजबहादुर को आरोप पत्र दाखिल करते समय मामले में गवाह नहीं बनाया। वादी को आखिर पूर्व से पुलिस ने क्यों बुलाया और सिर्फ वादी को ही क्यों बुलाया? यह संदेहकारक परिस्थिति है। 2. जहां मृतक की लाश पाई गई। उस स्थान से शराब की बोतलें, पाउच, मछली बनाने-खाने का सामान आदि बरामद नहीं हुआ था। कॉल डिटेल में मृतक के मोबाइल से जितने भी नंबरों पर कॉल किया गया था, उनमें कोई भी नंबर आरोपी राजेंद्र का नहीं पाया गया। आरोपी को जब गिरफ्तार किया गया, तब भी कोई नशीली वस्तु बरामद नहीं हुई। उसका एल्कोहल टेस्ट भी नहीं कराया। घटना के समय मृतक की अभियुक्त के साथ मौजूदगी की बात लोगों से जानने की कोशिश नहीं की। 3. कोर्ट ने कहा- एफएसएल रिपोर्ट के अवलोकन से पता चलता है कि आरोपी से बरामद डंडा, जींस पेंट, टुकड़ा, खूनालूदा मिट्‌टी आदि पर मानव रक्त पाया गया। लेकिन यह बात नहीं लिखी है कि जो रक्त पाया गया, वो मृतक भैयालाल का है। यानि विवेचक ने सैंपल भेजते समय गंभीर रूप से यह त्रुटि या लोप कारित किया कि वे इन सैंपल के साथ अभियुक्त के रक्त का भी सैंपल लेकर भेजते। तभी आलाकत्ल व अन्य बरामद वस्तुओं पर मृतक के खून की पुष्टि हो सकती थी।

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