झारखंडी रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज के लिए अतिक्रमण हटेगा:बलरामपुर में 55 भवन मालिकों को नोटिस, 7 दिन में जमीन खाली करने के निर्देश
बलरामपुर के बहराइच मार्ग पर झारखंडी रेलवे क्रॉसिंग के पास बन रहे ओवरब्रिज के निर्माण को लेकर सड़क के दोनों ओर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू हो गई है। प्रशासन ने पहले चरण में 55 भवन मालिकों को नोटिस जारी किया है। नोटिस में इन भवनों को राजस्व रिकॉर्ड में कब्रिस्तान के नाम दर्ज जमीन पर बना बताया गया है। सभी को सात दिन के भीतर जमीन खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस मिलने के बाद प्रभावित भवन और दुकान मालिकों की चिंता बढ़ गई है। उनका सबसे बड़ा सवाल यह है कि ओवरब्रिज और उससे जुड़ी सड़क के निर्माण में उनके भवन या जमीन का कितना हिस्सा आएगा। प्रशासन की ओर से जारी नोटिस में इसकी स्पष्ट सीमा नहीं बताई गई है। इसी वजह से लोग सेतु निगम के इंजीनियरों से संपर्क कर निर्माण की वास्तविक जद की जानकारी ले रहे हैं। 1.21 किमी लंबा होगा दो लेन का ओवरब्रिज झारखंडी मंदिर रेलवे क्रॉसिंग पर बनने वाला यह ओवरब्रिज बहराइच-श्रावस्ती और तुलसीपुर मार्ग को आपस में जोड़ेगा। प्रस्तावित सेतु का निर्माण वीर विनय चौराहा से अंबेडकर तिराहा तक और बहराइच मार्ग पर पीपल तिराहा से आगे तक किया जाना है। करीब 1.21 किलोमीटर लंबे इस दो लेन के ओवरब्रिज पर 35 पिलर बनाए जाएंगे। परियोजना की अनुमानित लागत 292.21 करोड़ रुपए है। सेतु निगम ने निर्माण कार्य को करीब दो साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। परियोजना के तहत पहले पिलर की नींव खोदने के साथ निर्माण कार्य शुरू भी हो चुका है। पहले 277 लोगों को चिह्नित किया गया था ओवरब्रिज निर्माण के लिए सड़क के दोनों ओर से अतिक्रमण हटाया जाना है। इसके लिए प्रशासन की ओर से पहले 277 लोगों को चिह्नित किया गया था। इनमें नाले की तरफ बने 55 भवनों के मालिकों को पहले चरण में तहसीलदार की ओर से नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि संबंधित भवन जिस जमीन पर बने हैं, वह राजस्व रिकॉर्ड में कब्रिस्तान के नाम दर्ज है। भवन मालिकों को सात दिन के भीतर जमीन खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्रवाई की शुरुआत के साथ ही प्रभावित लोगों ने अपने भवन और जमीन से संबंधित दस्तावेज जुटाने शुरू कर दिए हैं। नोटिस में नहीं बताया, किसका कितना हिस्सा टूटेगा प्रभावित भवन मालिकों की मुख्य परेशानी यह है कि नोटिस में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किस भवन या प्रतिष्ठान का कितना हिस्सा निर्माण की जद में आएगा। केवल जमीन खाली करने का निर्देश होने से लोग असमंजस में हैं। भवन और दुकान मालिक सेतु निगम के इंजीनियरों से संपर्क कर यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रस्तावित सड़क और ओवरब्रिज के निर्माण के बाद उनकी कितनी जमीन और भवन सुरक्षित रहेगा। उनका कहना है कि यदि किसी भवन का कुछ हिस्सा हटाया जाना है तो उसकी सीमा पहले से स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि वे आगे की व्यवस्था कर सकें। सिंह पेट्रोल पंप भी नोटिस पाने वालों में नोटिस पाने वालों में सिंह पेट्रोल पंप के मालिक जतिन अग्रवाल भी शामिल हैं। उनका कहना है कि जिस जमीन को प्रशासन अब राजस्व रिकॉर्ड में कब्रिस्तान के नाम दर्ज बता रहा है, उसके संबंध में उनके पास अलग दस्तावेज हैं। जतिन अग्रवाल के मुताबिक, यह जमीन पहले राजा बलरामपुर की ओर से स्वर्गीय आजाद सिंह को दी गई थी। बाद में आजाद सिंह ने इसी जमीन का बैनामा कराया था। इसी जमीन पर पेट्रोल पंप संचालित हो रहा है और जमीन का राजस्व भी जमा किया जाता है। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से जमीन को कब्रिस्तान के नाम दर्ज बताया जा रहा है, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ओवरब्रिज निर्माण के लिए उनके प्रतिष्ठान या जमीन का कितना हिस्सा लिया जाएगा। प्रभावित लोग दस्तावेज जुटाने में लगे नोटिस जारी होने के बाद चार भवन स्वामियों की ओर से जमीन का बैनामा कराए जाने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में प्रभावित लोग अपने-अपने भवन और जमीन से जुड़े पुराने दस्तावेज जुटा रहे हैं। उनका कहना है कि दस्तावेजों के आधार पर ही वे प्रशासन के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकेंगे। दिनेश कुमार बुधौलिया समेत अन्य भवन मालिक भी नोटिस मिलने के बाद परेशान हैं। उनका कहना है कि निर्माण की वास्तविक सीमा स्पष्ट होने के बाद ही यह पता चल पाएगा कि उनके मकान और दुकानों पर कितना असर पड़ेगा। डिजाइन में बदलाव से दो मीटर अतिरिक्त जमीन की बात लेखपाल पुनीत मिश्र ने बताया कि संबंधित भवनों पर पहले से निशान लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि सेतु की डिजाइन को सीधा किए जाने के कारण करीब दो मीटर अतिरिक्त जमीन लिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, प्रभावित भवन मालिकों की मांग है कि निर्माण की जद की स्पष्ट पैमाइश कर उन्हें बताया जाए कि उनके भवन और जमीन का कितना हिस्सा प्रभावित होगा। निर्माण शुरू, अब कार्रवाई तेज होने के आसार झारखंडी मंदिर रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज का निर्माण शुरू होने के साथ ही अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। 35 पिलरों पर बनने वाले इस 1.21 किलोमीटर लंबे दो लेन के सेतु पर 292.21 करोड़ रुपए खर्च होने हैं। पहले चरण में 55 भवन मालिकों को सात दिन में जमीन खाली करने का नोटिस मिलने के बाद अब प्रभावित लोगों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रस्तावित निर्माण की वास्तविक सीमा क्या होगी और नोटिस पाने वाले भवनों का कितना हिस्सा इसकी जद में आएगा। प्रशासन और सेतु निगम की ओर से पैमाइश और निर्माण की सीमा स्पष्ट होने के बाद ही प्रभावित लोगों की स्थिति साफ हो सकेगी।
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