केजीएमयू में दुर्लभ बीमारी 'HAE' के लिए स्पेशल क्लिनिक:रूमेटोलॉजी विभाग ने कुलपति को भेजा प्रस्ताव
लखनऊ में किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी एवं रूमेटोलॉजी विभाग ने दुर्लभ व जानलेवा बीमारी 'हेरिडिटरी एंजियोएडेमा' (HAE) के मरीजों को राहत देने के लिए एक विशेष क्लिनिक शुरू करने की पहल की है। विभाग की ओर से कुलपति को इसका प्रस्ताव भेजा गया है। अनुमति मिलने के बाद यह समर्पित क्लिनिक हर महीने के दूसरे शनिवार को संचालित किया जाएगा। विभागाध्यक्ष प्रो. पुनीत कुमार और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मुकेश कुमार मौर्य ने बताया कि HAE एक गंभीर और आनुवंशिक बीमारी है। दुर्लभ होने के कारण इसकी पहचान में अक्सर देरी होती है। इस बीमारी में मरीज के चेहरे, हाथ-पैर, जननांग, आंतों या सांस की नली में अचानक सूजन आ जाती है। आंतों में सूजन से तेज पेट दर्द, उल्टी-दस्त होते हैं, जबकि सांस की नली की सूजन से दम घुटने का खतरा रहता है। इसकी खास बात यह है कि इसमें खुजली या पित्ती नहीं होती और सामान्य एलर्जी की दवाओं (एंटीहिस्टामिन या स्टेरॉयड) का इस पर कोई असर नहीं होता। इसके सटीक निदान के लिए C4 और C1-inhibitor की विशेष जांच की आवश्यकता होती है। वर्तमान में विभाग में हर महीने 1 से 2 संदिग्ध या पुष्ट HAE मरीज आ रहे हैं। इस नए क्लिनिक का उद्देश्य मरीजों को समय पर सही इलाज, पारिवारिक स्क्रीनिंग, आपातकालीन योजना और नियमित फॉलो-अप प्रदान करना है। इसके साथ ही, मरीजों का व्यवस्थित पंजीकरण कर एक संस्थागत 'HAE रजिस्ट्री' बनाई जाएगी। इसके माध्यम से पात्र मरीजों को 'राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति' (National Policy for Rare Diseases) के तहत मिलने वाले सरकारी लाभों से भी जोड़ा जाएगा, ताकि उन्हें आर्थिक और चिकित्सीय संबल मिल सके।
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