जीबी पंत संस्थान में 10 अक्टूबर को राष्ट्रीय सम्मेलन:10 अक्टूबर को 150 विशेषज्ञ जुटेंगे, 70 से ज्यादा शोधपत्र होंगे शामिल; AI पर चर्चा

Oct 08, 2026 - 13:34
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जीबी पंत संस्थान में 10 अक्टूबर को राष्ट्रीय सम्मेलन:10 अक्टूबर को 150 विशेषज्ञ जुटेंगे, 70 से ज्यादा शोधपत्र होंगे शामिल; AI पर चर्चा
झूंसी स्थित गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान में 10 अक्टूबर को भारतीय ज्ञान प्रणाली, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक चुनौतियों के बीच सेतु बनाने पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। संस्थान की अकादमिक सहयोगी संस्था एसोसिएशन ऑफ इंडियन लॉ लाइब्रेरीज की ओर से होने वाले इस सम्मेलन में देशभर से करीब 150 प्रतिनिधि शामिल होंगे। सम्मेलन का शुभारंभ सुबह 9 बजे होगा। संस्थान के निदेशक प्रोफेसर योगेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सम्मेलन में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के विशेषज्ञ, शोधार्थी और शिक्षाविद अपने विचार साझा करेंगे। दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी और नीति आयोग पुस्तकालय समेत कई प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ भी इसमें हिस्सा लेंगे। 70 से अधिक शोध पत्र मिले सम्मेलन के लिए अब तक 70 से अधिक शोध पत्र प्राप्त हुए हैं। इनमें भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान के डिजिटलीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), आधुनिक सूचना सेवाओं और बदलते समय में पुस्तकालयों की भूमिका जैसे विषय शामिल हैं। विभिन्न सत्रों में इस बात पर चर्चा होगी कि भारतीय ज्ञान प्रणाली को संरक्षित करने, आगे बढ़ाने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में पुस्तकालय किस तरह प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। पारंपरिक ज्ञान को तकनीक से जोड़ने पर जोर प्रोफेसर योगेंद्र प्रताप सिंह के मुताबिक, डिजिटल तकनीक और एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ पुस्तकालयों की भूमिका भी बदल रही है। ऐसे में भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ना जरूरी है। सम्मेलन में इस बात पर विचार-विमर्श होगा कि तकनीक और आधुनिक सूचना सेवाओं के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान को सुरक्षित रखने के साथ अधिक से अधिक लोगों तक कैसे पहुंचाया जा सकता है। शोध पत्रों की कार्यवाही होगी प्रकाशित सम्मेलन में प्रस्तुत शोध पत्रों और विभिन्न सत्रों में हुई चर्चाओं को संकलित किया जाएगा। इसके बाद सम्मेलन की कार्यवाही (प्रोसीडिंग्स) प्रकाशित की जाएगी। इसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान प्रणाली से जुड़े शोध और अकादमिक विचारों को व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराना है। सम्मेलन के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञ अपने अनुभव और शोध साझा करेंगे। साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक सूचना तकनीक के बीच बेहतर समन्वय की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी।

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