जीएसटी जांच में विज्ञापन फर्मों से 2.48 करोड़ जमा:सर्कुलर ट्रेडिंग से टैक्स बचाने का खेल, तीन फर्मों पर कार्रवाई; तीन दिन हुई जांच

Sep 25, 2026 - 17:29
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जीएसटी जांच में विज्ञापन फर्मों से 2.48 करोड़ जमा:सर्कुलर ट्रेडिंग से टैक्स बचाने का खेल, तीन फर्मों पर कार्रवाई; तीन दिन हुई जांच
लखनऊ में विज्ञापन और डिस्प्ले का काम करने वाली तीन फर्मों की जांच में टैक्स चोरी का मामला सामने आया है। राज्य कर विभाग की टीम ने डालीबाग, जियामऊ और ट्रांसपोर्ट नगर स्थित तीनों फर्मों के ठिकानों पर एक साथ जांच की। अधिकारियों के मुताबिक, फर्में आपस में लेनदेन दिखाकर टैक्स बचाने के लिए गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी का इस्तेमाल कर रही थीं। जांच के दौरान विभाग ने 2.48 करोड़ रुपए जमा कराए हैं। यह कार्यवाही बुधवार से शुरु होकर निलांश ग्रुप सेम तीन फार्मो के खिलाफ कार्रवाई की गई है। सरकारी भुगतान के आंकड़ों से पकड़ में आया मामला राज्य कर विभाग की विशेष जांच शाखा ने सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों की ओर से सेवा देने वाली फर्मों को किए गए भुगतान का रिकॉर्ड खंगाला। इसके साथ ही फर्मों के घोषित कारोबार और जमा किए गए टैक्स का भी मिलान किया गया। इसी दौरान तीन फर्मों के लेनदेन में गड़बड़ी सामने आई। जीएसटी नियमों के तहत सरकारी विभाग और स्थानीय निकाय किसी सेवा देने वाली फर्म को भुगतान करते समय दो प्रतिशत टीसीएस काटते हैं। विभाग ने इसी रिकॉर्ड को फर्मों के कारोबार और टैक्स से मिलाकर देखा। आंकड़ों में अंतर मिलने के बाद तीनों फर्मों की जांच शुरू की गई। आपस में कारोबार दिखाकर लिया गलत फायदा जांच में सामने आया कि तीनों फर्में एक-दूसरे के साथ लेनदेन कर रही थीं। विभाग का आरोप है कि इन लेनदेन के आधार पर आईटीसी आगे बढ़ाई गई, जिससे टैक्स की देनदारी कम हो गई। अधिकारियों को यह भी पता चला कि इलेक्ट्रॉनिक लेजर में उपलब्ध आईटीसी से ज्यादा का दावा किया गया था। सरल शब्दों में समझें तो फर्मों ने आपसी खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड के जरिए ऐसा दिखाया कि उन्हें पहले ही टैक्स चुकाने का फायदा मिल चुका है। इसी आधार पर आगे जमा होने वाला टैक्स कम किया गया। विभाग ने इसे नियमों के खिलाफ माना है। 2.48 करोड़ जमा, दस्तावेज भी कब्जे में लिए तीनों जगह जांच के दौरान अधिकारियों ने कई दस्तावेज और कारोबारी रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए हैं। जांच में सामने आई देनदारी के आधार पर 2.48 करोड़ रुपए तत्काल जमा कराए गए। अब टीम जब्त किए गए रिकॉर्ड और लेनदेन की विस्तार से जांच करेगी। विभाग का कहना है कि रिकॉर्ड की जांच पूरी होने के बाद टैक्स चोरी की रकम और बढ़ सकती है। यानी अभी जांच में जो रकम सामने आई है, वह अंतिम आंकड़ा नहीं माना जा रहा है।

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