जीएसटी विभाग के उत्पीड़न से त्रस्त व्यापारी:अफसरों की मनमानी पर फूटा गुस्सा, बेवजह नोटिस और दफ्तर बुलाकर वसूली का खेल
सरकार भले ही जीएसटी प्रणाली के सरलीकरण और व्यापारियों को सहूलियत देने के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन धरातल पर जीएसटी महकमे के अधिकारी इन सुधारों पर पलीता लगाने में जुटे हैं। बरेली के सिविल लाइंस स्थित एक रेस्टोरेंट में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान रूहेलखण्ड उद्योग व्यापार मण्डल के पदाधिकारियों का गुस्सा फूट पड़ा। व्यापारी नेताओं ने जीएसटी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए दोटूक कहा कि नियम और कानून केवल फाइलों तक सीमित हैं, जबकि हकीकत में व्यापारियों को नोटिस और फोन के जरिए मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना का शिकार बनाया जा रहा है। मंदिर में जाएगा तो चढ़ावा तो देना ही पड़ेगा
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राज कुमार मेहरोत्रा ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सीधा तंज कसते हुए कहा कि व्यवस्था ऐसी बना दी गई है कि व्यापारी का काम बिना लेन-देन के आगे नहीं बढ़ता। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि व्यापारी जब दफ्तर रूपी 'मंदिर' में हाजिरी लगाने जाएगा, तो उसे चढ़ावा देना ही पड़ता है। जब तक चढ़ावे की यह व्यवस्था पूरी नहीं होती, तब तक अफसर व्यापारी की फाइल आगे नहीं बढ़ाते। सरकारी मंशा व्यापारियों को राहत पहुंचाने की है, लेकिन नीचे बैठे अधिकारी अपनी जेबें भरने के चक्कर में व्यापारियों का जीना मुहाल किए हुए हैं। दस्तावेज पूरे होने पर भी फोन कर बुलाते हैं अफसर
व्यापारी नेताओं ने साफ तौर पर कहा कि आज के दौर में जब सब कुछ ऑनलाइन हो चुका है और व्यापारी के पास बिल, बैंक भुगतान और पूरे वैध दस्तावेज मौजूद हैं, तब भी अधिकारी सीधे समाधान देने की बजाय नोटिस भेजते हैं। नोटिस के बाद फोन करके व्यापारियों को दफ्तर में तलब किया जाता है। अधिकारी वर्ग सरकार द्वारा दी जा रही इनपुट और अन्य रियायतों को लागू करने में लगातार आनाकानी करता है। नोटिसों का जवाब तैयार करवाने के लिए छोटे-छोटे व्यापारियों को मजबूरन वकीलों की भारी-भरकम फीस भरनी पड़ रही है, जिससे व्यापार करने की लागत और तनाव दोनों बढ़ रहे हैं। फेसलेस व्यवस्था लागू न होने से पनप रहा भ्रष्टाचार
प्रेस वार्ता में यह मुद्दा भी पुरजोर तरीके से उठा कि केंद्र की तर्ज पर राज्य कर (एसजीएसटी) में जब तक पूरी तरह से 'फेसलेस असेसमेंट' अनिवार्य रूप से लागू नहीं होता, तब तक अधिकारियों की मनमानी पर अंकुश लगाना नामुमकिन है। जब तक अधिकारी और व्यापारी का सीधा आमना-सामना रहेगा, तब तक उत्पीड़न और वसूली का यह सिलसिला थमेगा नहीं। व्यापार मंडल ने मांग की कि सरकार अपनी नेक नीयत का असर जमीन पर दिखाए और मनमाने नोटिस व फोन कॉल के जरिए व्यापारियों को प्रताड़ित करने वाले अफसरों पर सख्त नकेल कसे। प्रेस वार्ता में प्रमुख रूप से मौजूद रहे व्यापारी नेता
सिविल लाइन्स स्थित आर. बाजपेयी रेस्टोरेंट में आयोजित इस प्रेस वार्ता में रूहेलखण्ड उद्योग व्यापार मण्डल के शीर्ष पदाधिकारी एकजुट नजर आए। मंच पर मुख्य रूप से संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राज कुमार मेहरोत्रा, संरक्षक डॉ. विकास वर्मा तथा महानगर संयोजक/अध्यक्ष मनोज कपूर मौजूद रहे। इन वरिष्ठ व्यापारी नेताओं ने एक सुर में व्यापारियों की समस्याओं को उठाया और जीएसटी सुधारों के नाम पर जमीनी स्तर पर अफसरों द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न के खिलाफ पुरजोर आवाज बुलंद की।
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