जितने CBSE वोट बनवाए, वही मेरे लिए काफी:बोले डा. संजयन; कहा-मैं कटी पतंग सा था, अखिलेश यादव ने मेरी डोर थाम ली
भाजपा छोड़, सपा के टिकट पर गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे डा. संजयन त्रिपाठी सपा में जाकर खुश हैं। उन्होंने कहा कि यदि आधार के रूप में पार्टी (सपा) मुझे मिली है तो मैं भी पार्टी को एक शुभंकर के रूप में मिला हूं। सम्मान न मिलने से मुझे भाजपा छोड़नी पड़ी। उस वक्त मैं हवा में छूटी हुए एक कटी पतंग की तरह था, उस संक्रमण के समय राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मजबूती से मेरी डोर थाम ली और आज मैं शिक्षक एमएलसी चुनाव में जीत की दहलीज पर खड़ा हूं। मैंने जितने CBSE वोट बनवाए हैं, वही मेरे लिए काफी है। शिक्षक एमएलसी में अब तक की तैयारियों, भाजपा छोड़ने और सपा में शामिल होने के कारणों को लेकर दैनिक भास्कर ने सपा प्रत्याशी डा. संजयन त्रिपाठी से बातचीत की। उन्होंने बेबाकी से हर प्रश्न का उत्तर दिया। डा. संजयन त्रिपाठी ने कहा कि जो सम्मान 6 साल में भाजपा के एक निचले कार्यकर्ता से उन्हें नहीं मिल सका, उससे बढ़कर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें दिया है। सपा ने मुझे खूब सम्मान दिया है और जिस तरह से पूरी पार्टी मेरे साथ लगी है, विजय भी मेरी होगी। भाजपा के एक राष्ट्रीय नेता ने फोन किया, मैंने बात नहीं की डा. संजयन त्रिपाठी से जब यह पूछा गया कि भाजपा का झंडा उतारने के बाद क्या भाजपा के किसी नेता ने उनसे संपर्क किया? उन्होंने बताया कि जब वह सपा ज्वाइन करने के लिए लखनऊ जा रहे थे। आधे से अधिक दूरी तय हो चुकी थी, तब भाजपा के प्रदेश के एक बड़े नेता ने फोन किया। वह बात करने को कह रहे थे लेकिन तब तक तीर निकल चुका था। मेरी सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से बात हो चुकी थी, वापसी का कोई सवाल नहीं था। जब मैं लखनऊ पहुंच गया तो फिर एक बड़े व्यक्ति का फोन दिल्ली से आया। वह मुझसे वार्ता करना चाहे थे लेकिन मैंने बात करना उचित नहीं समझा।
डा. संजयन ने कहा कि जब 6 साल में उस दल में मेरा उचित मूल्यांकन नहीं हुआ तो जब छोड़ चुका हूं तो वे क्या ही मूल्यांकन करते। मैं सपा ज्वाइन करने के निर्णय से संतुष्ट हूं। मैं खुश हूं, चुनाव का परिणाम जो भी हो। मैं दिल लगातर राजनीति करता हूं। भगवान की कृपा से मेरे पास कोई कमी नहीं है। कुछ रचनात्मक व सकारात्मक करने की इच्छा के साथ राजनीति में आया हूं। मुझे लगता है कि एक अधिकार का पद मेरे पास आ जाएगा तो मैं सदन के अंदर भी शिक्षकों की बात रख सकूंगा। मेरी यही अभिलाषा है। सपा में जाने से मेरे संबंधों पर फर्क नहीं पड़ेगा भाजपा का झंडा उतारते और उसके बाद भावुक बातें करते हुए संजयन का वीडियो काफी वायरल हुआ था। खूब सहानुभूति पैदा हुई लेकिन कुछ लोग कहने लगे कि सपा में जाने से वह सहानुभूति नहीं रह जाएगी। इस सवाल पर डा. संजयन का स्पष्ट जवाब है। उन्होंने कहा कि सहानुभूति पर बिल्कुल असर नहीं होगा। एक घटना या कोई एक दिन 40 सालों की संबंधों की कमाई पर बट्टा नहीं लगा सकता। मैंने जो संबंधों की पूंजी कमाई है, वह चिरस्थाई है। मुझे उसपर नाज है। यह संवेदना सहसा नहीं उपज गई थी।
मैंने भाजपा से दिल लगाया, बहुत मन से लगाया था भाजपा छोड़ने के सवाल पर डा. संजयन कहते हैं कि मैं साहित्यकार हूं। साहित्यकार व्यक्ति बहुत संवेदनशील होता है। मैंने उस दल (भाजपा) से दिल लगाया, बहुत मन से दिल लगाया था। कई बार ऐसे अवसर आए जब ऐसा अनुभव करने को विवश हुआ कि कहीं ऐसा तो नहीं कि मैं एकतरफा प्रेम कर रहा हूं। लेकिन एक उम्मीद थी कि शायद कल सबकुछ ठीक हो जाएगा, लेकिन कब तक इंतजार करते। एक दिन ऐसा आया जब मेरा मोह भंग हो गया। कहीं न कहीं मेरे अंदर जो गंभीर निराशा थी, वह मोह भंग के रूप में प्रकट हुई है। जिन्हें मुझसे सहानुभूति है, वह भी उस दल से आहत हुए होंगे। अंतर इतना ही है कि वे कह नहीं पाए और मैंने कह दिया। ईश्वर की इच्छा थी इसीलिए मैं सपा में हूं डा. संजयन जब सपा में गए तो एक चर्चा यह खड़ी हो गई कि आखिर 24 घंटे में ऐसा क्या हो गया कि वह सपा में चले गए। इसके जवाब में खुद संजयन कहते हैं कि यह तो उन्हें भी नहीं पता कि कैसे, क्या हो गया? यही मानता हूं कि कुछ चीजें ईश्वर की बनाई हुई स्क्रिप्ट के अनुसार चलती हैं और हम लोग अपना किरदार प्ले करते हैं। यह जो हुआ ईश्वर की मर्जी से हुआ। उन्हीं की मर्जी से सपा में हूं। मैं इतना जानता था कि चुनाव लड़ना है और निर्दल लड़ने की तैयारी थी। आज सबके प्रयास से चुनाव ऐसी जगह खड़ा हो गया है, जहां से जीत की संभावना अधिक है।
सपा के गमछे व लाल टोपी से कोई परहेज नहीं संजयन त्रिपाठी जब सपा में शामिल हो गए और अधिकृत प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरे तो उनके पहनावे पर भी कुछ लोगों ने गौर किया। सोशल मीडिया पर इसको लेकर टिप्पणियां भी हुईं। मसलन, सपा वाला गमछा क्यों नहीं लगा रहे, लाल टोपी से परहेज क्यों कर रहे? यह सवाल डा.संजयन से पूछे गए। उनका जवाब था कि उन्हें इससे कोई परहेज नहीं। जिस स्कूल में पढ़ेंगे, उसका यूनिफार्म तो पहनना पड़ेगा न। मैं अपनी मर्जी से कोई यूनिफार्म नहीं पहन सकता। पार्टी के किसी बड़े नेता ने मुझके टोपी या गमछे के लिए नहीं कहा। मैं अब भी गमछा लगाता हूं। यह तो शृंगार है। पार्टी का शृंगार धारण करने में कोई दिक्कत थोड़ी है। में स्वतंत्र विचारों का आदमी डा. संजयन काफी दिनों तक निर्दल राजनीति करते रहे। फिर भाजपा में आए। अब सपा में हैं। ऐसे में एक चर्चा चलने लगी कि इनकी कोई विचारधारा है या नहीं। जब यह सवाल उनके सामने आया तो संजयन जवाब देने में नहीं हिचके। उन्होंने कहा कि मैं मूल रूप से विचारों से प्रभावित रहने वाला आदमी हूं। विचार मूलत: स्वतंत्र रहते हैं। जब विचार, विचारधारा में बदलते हैं तो उनमें संकुचन आ जाता है। एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति होने के नाते मेरी सोच संकीर्ण नहीं हो सकती। मैं स्वतंत्र विचारों का व्यक्ति हूं। फिरभी विचारधारा में चुनना हो तो सपा की विचारधारा इसलिए अच्छी लगती है कि सपा सरकार और इसके नेता स्व. मुलायम सिंह यादव ने शिक्षकों की जितनी चिंता की है, उतनी किसी ने नहीं की। मुख्यमंत्री की बात कैसे सही मानें; मैं सपा में हूं और शिक्षक भी भाजपा के शिक्षक सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि सपा व शिक्षा, नदी के दो किनारे हैं, कभी मिल नहीं सकते। इस बात की खूब चर्चा हुई। संजयन के समक्ष जब इसका जिक्र हुआ तो उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की बात को सही कैसे मानें। मुझसे बढ़िया उदाहरण और कौन हो सकता है। मैं सपा में हूं और शिक्षक भी हूं। गोरखपुर विश्वविद्यालय का गोल्ड मेडलिस्ट हूं। एक महाविद्यालय में आचार्य हूं। मेरी शिक्षण संस्थाएं संचालित हैं। यह कथन तो कम से कम व्यक्तिगत मेरे संबंध में पुष्ट नहीं किया जा सकता। किसी को तथ्यहीन आक्रमण नहीं करना चाहिए। इस क्षेत्र का हर मतदाता मेरा परिचित, सपा के पास बड़ा आधार इस चुनाव में जब चर्चाएं हो रही हैं तो प्रत्याशियों के आधार वोटों की भी बात की जा रही है। डा. संजयन के सामने भी यह प्रश्न आया। उन्होंने कहा कि वह 2007 से गोरखपुर-फैजाबाद क्षेत्र में सक्रिय हैं। दो बार स्नातक निर्वाचन का चुनाव लड़ चुके हैं और निर्दल ही दूसरे नंबर पर रहे। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन में मतदाता लगभग एक होते हैं। हर मतदाता मेरा परिचित है। अब मैं सपा के साथ हूं। सपा का बड़ा आधार हे। आजमगढ़, मऊ, देवरिया, गोरखपुर सहित सभी जिलों में बहुत से शैक्षणिक संस्थान पीडीए समाज के लोग संचालित करते हैं। मैं खुद सीबीएसई स्कूलों का संचालन करता हूं। जितना वोट सीबीएसई का मैंने बनाया है, वही मेरे लिए पर्याप्त है। सपा ने शिक्षकों के हित में अनेक कार्य किए हैं। पुरानी पेंशन देने का वादा भी कियाा है। मेरी जीत पक्की है। शिक्षक संगठनों का समय अब खत्म हो गया शिक्षकों के इस चुनाव में राजनीतिक दलों की इंट्री हो गई है। जो निर्दल प्रत्याशी हैं, वे इस बात को नकारात्मक और शिक्षकों के हित के प्रतिकूल बता रहे हैं। शर्मा गुट के लोग भी अंदरखाने इससे परेशान नजर आते हैं। संजयन भी एक दल में हैं इसलिए उनका पक्ष भी जाना गया। डा. संजयन कहते हैं कि दलीय राजनीति को लेकर नकारात्मक बातें और भ्रम निर्दल प्रत्याशी फैला रहे हैं। मान लीजिए अगर वे जीत भी गए तो अकेले क्या कर पाएंगे। पुरानी पेंशन कैसे बहाल कराएंगे। यह सरकार के अधीन आता है। फिलहाल प्रदेश में जो परिदृश्य नजर आता है, उसमें दो विकल्प दिखाई दे रहे हैं। एक वर्तमान सरकार, जिसकी नीति इस मामले में स्पष्ट है। दूसरा विकल्प सपा है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा है कि सरकार बनेगी तो पुरानी पेंशन बहाल होगी। इसलिए शिक्षकों की वकालत के लिए सरकार में रहना जरूरी है, दल के साथ भी अपनी बात रख सकते हैं। अब शिक्षक संगठनों का दौर खत्म हो चुका है।
स्व. ओमप्रकाश शर्मा, पंचानन राय ने जो अधिकार दिलाए, ध्रुव त्रिपाठी के सदन में रहते छिनते गए शिक्षकों का चुनाव है तो उनकी समस्याओं पर भी बात हुई। डा. संजयन ने कहा कि सदन में रहकर स्व. ओमप्रकाश शर्मा और स्व.पंचानन राय ने जो अधिकार शिक्षकों को दिलाए, वह ध्रुव त्रिपाठी के रहते हुए एक-एक कर छिनते चले गए। वह शर्मा गुट को कमजोर करके भाजपा का दामन थाम लिए। इसको लेकर शिक्षकों में जबरदस्त नाराजगी है। सुरक्षा सेवाओं की धाराएं 2023 में जब खत्म की जा रही थीं तो वह सदन में मौन साधे हुए थे। इन लोगों ने सदन को शिक्षकों के प्रतिनिधित्व से खाली कर दिया।
संजयन ने कहा कि भाजपा की रीति-नीति स्पष्ट है कि वे वित्त विहीन शिक्षकों को शिक्षक ही नहीं मानते। मदरसों में काम करने वाले शिक्षकों के लिए राज्यांश बंद कर दिया गया। उनकी मान्यता पर संकट खड़ा कर दिया गया। इसलिए शिक्षकों का हर तबका उनसे दुखी हे। सपा शिक्षकों के हित में काम करती है इसलिए मुझे अभूतपूर्व किस्म का समर्थन मिल रहा है।
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