'जितनी हमारी सैलरी, उतना अधिकारियों के कुत्तों के बिस्कुट खर्च':लखनऊ में NHM महिला कर्मी बोली- इतने पैसे में बच्चे की परवरिश करें या परिवार चलाएं
मेरी महीने की 20 हजार रुपए सैलरी है। इतना तो अधिकारियों के घर में कुत्तों के बिस्कुच का खर्च होता है। हम इस सैलरी में क्या करें? घर चलाएं, बच्चे पालें या उसके भविष्य के लिए पैसे बचाएं? ये कहना है मीरजापुर में तैनात NHM चाइल्ड हेल्थ स्टाफ अंजलि राय का। लखनऊ के ईको गॉर्डन में NHM कर्मियों के चल रहे प्रदर्शन में अन्य 50 हजार कर्मचारियों के साथ अंजलि अपने बच्चे को लेकर पहुंची थी। उन्होंने समान काम के लिए समान वेतन और परमानेंट करने की मांग की है। अंजलि ने बताया कि उनकी 2024 में हुई थी। वह मऊ की रहने वाली हैं, लेकिन तैनाती नोएडा में कर दी गई। घर से इतनी दूर नौकरी करने और परिवार चलाने में काफी परेशानी हो रही है। 20 हजार की सैलरी में 5 से 6 हजार रुपए कमरे के किराये में खर्च हो जाते हैं। इसके अलावा बच्चे के दूध, घर के खर्च और दूसरी जरूरतें भी पूरी करनी होती हैं। देखिए प्रदर्शन की 4 तस्वीरें… सुकन्या समृद्धि अकाउंट खुला पर नहीं भर पा रही इंस्टॉलमेंट अंजलि ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि एक ओर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान चलाया जा रहा है, दूसरी ओर वह अपनी बेटी के नाम खुले सुकन्या समृद्धि अकाउंट में पैसे तक जमा नहीं कर पा रही हैं। बच्चे के साथ घर से इतनी दूर नौकरी करना और सीमित सैलरी में परिवार चलाना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है। बेटी के नाम सुकन्या समृद्धि अकाउंट खुला है, लेकिन उसमें भी इंस्टॉलमेंट जमा नहीं कर पा रही हैं। हर महीने 5-6 हजार रुपये लेने पड़ते हैं उधार अंजलि ने कहा कि महीने के आखिर तक उनके पास पैसे नहीं बचते। कम सैलरी के कारण उसकी किस्तें भरना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि अगर परिवार के साथ रहने के लिए 10 हजार रुपए किराये का कमरा लेती हैं, तो उनके रोजमर्रा के खर्च में कमी करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में न बचत हो पा रही है और न ही बच्चे के भविष्य के लिए कुछ जमा कर पा रही हैं। ‘क्या महंगाई सिर्फ परमानेंट कर्मचारियों के लिए’ अंजलि का कहना है कि संविदा कर्मचारी भी परमानेंट कर्मचारियों के बराबर काम करते हैं। इसके बावजूद उन्हें समान वेतन और सुविधाएं नहीं मिलतीं। जब महंगाई परमानेंट कर्मचारियों के लिए है, तो संविदा कर्मचारियों के लिए क्यों नहीं? परमानेंट कर्मचारियों को समय-समय पर वेतन बढ़ोतरी का लाभ मिलता है, लेकिन संविदा कर्मचारियों की सैलरी सीमित है। PF और ESI की सुविधाएं भी नहीं अंजलि का कहना है कि अगर किसी कर्मचारी को बीमारी हो जाए या दुर्घटना हो जाए, तो इलाज के लिए भी पैसे नहीं बचते। निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को PF और ESI जैसी सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन उनके मुताबिक, संविदा कर्मचारियों को भी ऐसी सुविधाएं मिलनी चाहिए। हम लोगों के परिवार में लोग बीमार पड़ते हैं, उनके लिए भी हमें जरूरत पड़ती है। 'इतने में कैसे अपना खर्च चलाएं या मां का इलाज कराएं' कानपुर डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में तैनात संविदा नर्सिंग ऑफिसर अल्का कहती है कि 20 हजार रुपए में बच्चे को पालें, उसे पढ़ाएं, अपना खर्च चलाएं या मां का इलाज कराएं? सरकार बताए कि इतनी सैलरी में परिवार कैसे चलाएं? वो भी NHM कर्मचारियों के धरने में शामिल होकर समान काम का समान वेतन और परमानेंट करने की मांग कर रही हैं। बच्चे की परवरिश भी मुश्किल अल्का कहती है कि उनकी तैनाती घर से 200-300 किलोमीटर दूर है। 20 हजार रुपए महीने की सैलरी में परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। उनके पति भी कमाई नहीं कर पाते हैं। ऐसे में बच्चे की परवरिश, पढ़ाई और माता-पिता की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है। इतनी कम सैलरी में ये सारी चीजें सही से कर पाना मुश्किल है। मां की किडनी 32% काम कर रही, PGI में चल रहा इलाज अल्का ने बताया कि उनकी मां को किडनी की गंभीर समस्या है। उनकी एक ही किडनी है, जो 32% काम कर रही है। SGPGI में उनका इलाज चल रहा है। ऐसे में मां के इलाज और परिवार के दूसरे खर्चों की जिम्मेदारी उठाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि 20 हजार रुपए की सैलरी में बच्चे की जरूरतें पूरी करें या मां के इलाज का खर्च उठाएं। घर से दूर रहने के कारण खर्च और बढ़ जाता है। इसके बावजूद सरकार संविदा कर्मचारियों को परमानेंट नहीं कर रही है और न ही समान काम के लिए समान वेतन दिया जा रहा है। ‘महंगाई हमारे लिए भी है, फिर समान वेतन क्यों नहीं’ अल्का ने सवाल उठाया कि महंगाई अगर परमानेंट कर्मचारियों के लिए है, तो संविदा कर्मचारियों के लिए भी है। जब दोनों से काम लिया जाता है, तो वेतन और सुविधाओं में अंतर क्यों है? उन्होंने कहा कि सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की बात करती है, लेकिन 20 हजार रुपये में बच्चे का भविष्य बनाना भी मुश्किल है। उन्होंने सरकार से मांग की कि संविदा कर्मचारियों की समस्याओं को सुना जाए, उन्हें समान काम का समान वेतन दिया जाए और परमानेंट किया जाए। नर्स रितु सिंह बोलीं- 20 हजार में परिवार चलाना मुश्किल मीरजापुर से आईं स्टाफ नर्स रितु सिंह पिछले 12 साल से NHM में संविदा पर तैनात हैं। उनका कहना है कि जॉइनिंग के समय 5 साल में नियमित करने की बात कही गई थी। इसी उम्मीद में नौकरी शुरू की, लेकिन 12 साल बाद भी नियमित नहीं किया गया। रितु ने बताया कि उन्हें हर महीने 20 हजार रुपये वेतन मिलता है, जबकि नियमित स्टाफ को 80 से 90 हजार रुपये तक मिलते हैं। 8 अक्टूबर से धरने पर, मांग पूरी होने तक प्रदर्शन महंगाई के बीच बच्चों की पढ़ाई, स्कूल और ट्यूशन का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने समान काम के लिए समान वेतन और संविदा कर्मचारियों को परमानेंट करने की मांग की। रितु 8 अक्टूबर से धरने पर बैठी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार संविदा कर्मचारियों के हित में फैसला लेती है, तो धरना खत्म कर दिया जाएगा। मांगों पर विचार नहीं हुआ, तो प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने हाथ जोड़कर सरकार से कर्मचारियों की समस्याएं समझने और उनकी मांगों पर फैसला लेने की अपील की। …………………….. ये खबर भी पढ़िए- लखनऊ में जुटे 75 जिलों के 50 हजार NHM कर्मी:पोस्टर में लिखा- अंबानी-अडानी से यारी है; बोले- हमको भी परमानेंट कर दो
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