जूनियर एनालिस्ट भर्ती में बीटेक डिग्रीधारकों को राहत नहीं:हाईकोर्ट ने 417 पदों की भर्ती के लिए तय शैक्षणिक योग्यता में हस्तक्षेप से किया इनकार
जूनियर एनालिस्ट (फूड) के 417 पदों की भर्ती में खाद्य प्रौद्योगिकी, डेयरी प्रौद्योगिकी, ऑयल टेक्नोलॉजी और जैव प्रौद्योगिकी में बीटेक डिग्रीधारकों को शामिल करने की मांग हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने खारिज कर दी है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को अपने विभागीय पदों के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता निर्धारित करने का अधिकार है। इसी के साथ उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की सेवा नियमावली में किए गए संशोधन को वैध ठहराया है। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने पंकज कुमार व अन्य की याचिका पर यह फैसला सुनाया। याचिका में वर्ष 2020 में संशोधित सेवा नियमावली के नियम 8(2) और भर्ती विज्ञापन को चुनौती दी गई थी। राज्य सरकार की दलील पर कोर्ट सहमत याचियों की ओर से दलील दी गई कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक नियमावली, 2011 में खाद्य विश्लेषक पद के लिए विभिन्न विषयों की स्नातक डिग्रियों को मान्यता दी गई है। ऐसे में संबंधित विषयों में बीटेक करने वाले अभ्यर्थियों को जूनियर एनालिस्ट (फूड) की भर्ती से बाहर रखना उचित नहीं है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि जूनियर एनालिस्ट (फूड) और खाद्य विश्लेषक अलग-अलग पद हैं। जूनियर एनालिस्ट राज्य सरकार के विभागीय संवर्ग का पद है, जबकि खाद्य विश्लेषक की नियुक्ति केंद्रीय कानून और उसके तहत निर्धारित नियमों के अनुसार होती है। खंडपीठ ने सरकार की दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि खाद्य विश्लेषक पद के लिए केंद्रीय नियमों में निर्धारित योग्यताएं राज्य सरकार को जूनियर एनालिस्ट के पद पर सभी वैकल्पिक योग्यताएं स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं करतीं। राज्य सरकार संबंधित पद के कार्यों और जरूरतों के आधार पर शैक्षणिक योग्यता तय कर सकती है। न्यायालय ने कहा कि भर्ती नियमों में अतिरिक्त बीटेक डिग्रियों को शामिल करने का निर्देश देना नियमों को नए सिरे से लिखने जैसा होगा। इस आधार पर न्यायालय ने भर्ती नियमों में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।
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