यशवंत वर्मा मामले में प्राथमिकी की मांग खारिज, हाईकोर्ट ने क्या कहा

जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कथित नकदी मामले में प्राथमिकी दर्ज करने और स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता के अधिकार और उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपायों पर सवाल उठाए। यह मामला मार्च 2025 में उनके सरकारी आवास में आग लगने के दौरान कथित तौर पर जले हुए नोट मिलने के बाद सामने आया था।

Sep 21, 2026 - 15:44
0
यशवंत वर्मा मामले में प्राथमिकी की मांग खारिज, हाईकोर्ट ने क्या कहा

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 21 सितंबर 2026

जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कथित नकदी मामले में सोमवार, 21 सितंबर 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अधिवक्ता घनश्याम दयालु उपाध्याय ने अदालत में याचिका दाखिल कर प्राथमिकी दर्ज करने और मामले की स्वतंत्र आपराधिक जांच कराने की मांग की थी। याचिका में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो या विशेष जांच दल से जांच कराने की मांग भी रखी गई थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार नहीं किया।

अदालत ने याचिका पर क्या कहा

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अमित बंसल की अदालत में हुई। अदालत ने याचिकाकर्ता के याचिका दाखिल करने के अधिकार पर सवाल उठाया और कहा कि प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए अन्य कानूनी रास्ते उपलब्ध हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए इसे निराधार तरीके से किसी के पीछे पड़ने जैसा बताया। इसके बाद याचिका को स्वीकार नहीं किया गया।

याचिकाकर्ता ने स्वतंत्र जांच की मांग क्यों की

याचिकाकर्ता का कहना था कि वह जस्टिस यशवंत वर्मा को किसी अपराध का दोषी घोषित करने की मांग नहीं कर रहे हैं। उनका तर्क था कि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए स्वतंत्र आपराधिक जांच जरूरी है। याचिका में कथित नकदी के स्रोत, स्वामित्व, रखे जाने और बाद में उसके गायब होने से जुड़े सवालों की जांच की मांग की गई थी। इसके साथ ही कथित साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और उनकी जांच किए जाने की आवश्यकता भी बताई गई थी।

अदालत ने वैकल्पिक कानूनी रास्ते की बात कही

सुनवाई के दौरान संबंधित पक्ष की ओर से याचिकाकर्ता के अधिकार पर भी सवाल उठाया गया। अदालत के सामने यह बात रखी गई कि प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए पहले पुलिस और उसके बाद सक्षम मजिस्ट्रेट के समक्ष कानूनी उपाय अपनाया जा सकता है। याचिकाकर्ता ने इस रास्ते पर आपत्ति जताते हुए मामले को असाधारण प्रकृति का बताया। हालांकि अदालत ने याचिका को स्वीकार नहीं किया।

सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा था मामला

इससे पहले अधिवक्ता घनश्याम दयालु उपाध्याय इसी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचे थे। सात अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से अगस्त में एक नई शिकायत भी प्रस्तुत की गई। दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में इन घटनाक्रमों का भी उल्लेख किया गया था।

मार्च 2025 में सामने आया था मामला

यह पूरा मामला 14 मार्च 2025 की रात सामने आया था। उस समय जस्टिस यशवंत वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश थे और उनके सरकारी आवास पर आग लग गई थी। आग बुझाने के दौरान आवास के एक हिस्से में कथित तौर पर बड़ी मात्रा में जले और आधे जले हुए नोट मिलने की बात सामने आई थी। घटना के बाद मामले को लेकर न्यायपालिका और सार्वजनिक क्षेत्र में व्यापक चर्चा हुई।

तीन न्यायाधीशों की समिति ने की थी जांच

घटना के बाद तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना ने मामले की आंतरिक जांच के लिए तीन न्यायाधीशों की समिति गठित की थी। समिति ने जांच पूरी करने के बाद मई 2025 में अपनी रिपोर्ट तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश को सौंपी थी। रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा की भूमिका को लेकर प्रथम दृष्टया जवाबदेही की बात सामने आने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद रिपोर्ट राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजी गई थी।

जस्टिस वर्मा का इलाहाबाद हाईकोर्ट तबादला हुआ

मामले की जांच के दौरान जस्टिस यशवंत वर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा गया था। उनके न्यायिक कार्य भी वापस ले लिए गए थे। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़े दस्तावेज, तस्वीरें और वीडियो सार्वजनिक किए थे। इन सामग्री में आग की घटना के दौरान कथित रूप से दिखाई देने वाली जली हुई नकदी से संबंधित सामग्री भी शामिल थी।

संसद की समिति ने भी की जांच

बाद के चरण में लोकसभा अध्यक्ष ने न्यायाधीशों की जांच से संबंधित कानून के तहत जस्टिस वर्मा के खिलाफ तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। अगस्त 2026 में समिति की रिपोर्ट संसद में रखी गई। रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर समिति के निष्कर्ष दर्ज किए गए थे। इसके बाद मामले को लेकर आपराधिक जांच की मांग फिर से अदालत के सामने उठाई गई।

जस्टिस वर्मा ने दिया था इस्तीफा

जस्टिस यशवंत वर्मा ने अप्रैल 2026 में न्यायाधीश के पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका इस्तीफा उस समय आया जब उनके खिलाफ संसद में हटाने की प्रक्रिया से जुड़ी जांच आगे बढ़ रही थी। इसके बावजूद मामले से जुड़े कानूनी और संस्थागत सवालों को लेकर अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई और न्यायिक कार्यवाही जारी रही।

अब आगे क्या

दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सोमवार को याचिका स्वीकार नहीं किए जाने के बाद याचिकाकर्ता के लिए कानून में उपलब्ध अन्य उपायों का रास्ता खुला है। अदालत में सुनवाई के दौरान भी वैकल्पिक कानूनी प्रक्रिया का उल्लेख किया गया। इस मामले में प्राथमिकी दर्ज होगी या नहीं, यह आगे अपनाई जाने वाली कानूनी प्रक्रिया और संबंधित सक्षम प्राधिकारी के निर्णय पर निर्भर करेगा।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User