370 रुपये बिरयानी विवाद में प्रणीत मोरे पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

370 रुपये की बिरयानी से जुड़े विवाद को लेकर हास्य कलाकार प्रणीत मोरे ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने महाराष्ट्र और हरियाणा में दर्ज प्राथमिकी को एक साथ जोड़ने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, महाराष्ट्र और हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

Sep 21, 2026 - 15:09
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370 रुपये बिरयानी विवाद में प्रणीत मोरे पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 21 सितंबर 2026

370 रुपये की बिरयानी से जुड़े विवाद को लेकर हास्य कलाकार प्रणीत मोरे ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने महाराष्ट्र और हरियाणा में दर्ज प्राथमिकी को एक साथ जोड़ने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर केंद्र सरकार, महाराष्ट्र और हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया है। मोरे का कहना है कि एक ही विवाद से जुड़े मामलों के लिए उन्हें अलग-अलग राज्यों में आपराधिक कार्यवाही का सामना करना पड़ रहा है।

क्या है 370 रुपये बिरयानी का पूरा विवाद

यह विवाद गुरुग्राम में हुए प्रणीत मोरे के हास्य कार्यक्रम के दौरान सामने आया था। कार्यक्रम में एक दर्शक हिमांशु जांगड़ा ने एक महिला के साथ मुलाकात का जिक्र करते हुए 370 रुपये की चिकन बिरयानी पर खर्च करने की बात कही थी। उसने यह भी कहा था कि उसे इसके बाद महिला से शारीरिक संबंध बनने की उम्मीद थी। इस टिप्पणी पर मोरे के हंसने और इसे गुरुग्राम की विशेष तरह की सामग्री बताने से विवाद खड़ा हो गया।

वीडियो प्रसारित होने के बाद बढ़ा विवाद

कार्यक्रम का वीडियो सामने आने के बाद सामाजिक माध्यमों पर प्रणीत मोरे की आलोचना शुरू हो गई। उन पर सहमति जैसे गंभीर विषय को हल्के ढंग से लेने का आरोप लगाया गया। विवाद बढ़ने के बाद मोरे ने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी थी। इसके बावजूद मामले ने कानूनी रूप ले लिया और उनके खिलाफ अलग-अलग स्थानों पर प्राथमिकी दर्ज की गई।

महाराष्ट्र में दर्ज हुई प्राथमिकी

विवाद बढ़ने के बाद महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने प्रणीत मोरे, हिमांशु जांगड़ा और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। पुलिस की कार्रवाई आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री के ऑनलाइन प्रसार से जुड़े आरोपों को लेकर की गई थी। इसके बाद यह मामला महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहा और हरियाणा में भी प्राथमिकी दर्ज हुई।

हरियाणा में भी दर्ज हुआ मामला

राष्ट्रीय महिला आयोग की शिकायत के बाद गुरुग्राम में भी इस विवाद से जुड़ी प्राथमिकी दर्ज की गई। इस तरह प्रणीत मोरे को एक ही विवाद से संबंधित अलग-अलग राज्यों में कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। मोरे ने अपनी याचिका में इसी स्थिति को चुनौती देते हुए सभी संबंधित मामलों को एक साथ जोड़ने की मांग की है।

प्रणीत मोरे ने सुप्रीम कोर्ट में क्या मांग की

प्रणीत मोरे ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि महाराष्ट्र और हरियाणा में दर्ज मामलों को एक साथ जोड़ दिया जाए। उनका कहना है कि एक ही घटना और विवाद से संबंधित अलग-अलग आपराधिक कार्यवाही उनके लिए परेशानी का कारण बन रही है। वह इस मामले में कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन चाहते हैं कि सभी मामलों की सुनवाई एक साथ हो।

वकील ने अदालत में क्या कहा

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने प्रणीत मोरे के वकील ने उनका पक्ष रखा। वकील के अनुसार विवादित वीडियो मोरे की अनुमति के बिना उनकी जनसंपर्क टीम द्वारा प्रसारित किया गया था। उन्होंने अदालत से कहा कि मोरे मुकदमे का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन अलग-अलग राज्यों में चल रही कार्यवाहियों को एक साथ जोड़ा जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या किया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 21 सितंबर को प्रणीत मोरे की याचिका पर केंद्र सरकार, महाराष्ट्र सरकार और हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया। अदालत की ओर से नोटिस जारी होने के बाद अब संबंधित पक्षों से इस मामले में जवाब मांगा गया है। आगे की कार्यवाही में अदालत यह देखेगी कि अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों को एक साथ जोड़े जाने की मांग पर क्या आदेश दिया जाना है।

विवाद का कानूनी पक्ष

इस मामले में अलग-अलग राज्यों में दर्ज प्राथमिकी को एक साथ जोड़ने की मांग अब सुप्रीम कोर्ट के सामने है। मोरे का पक्ष है कि एक ही विवाद से संबंधित कई आपराधिक कार्यवाहियों के कारण उन्हें अलग-अलग जगहों पर कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, दर्ज मामलों में लगाए गए आरोपों की कानूनी स्थिति का निर्धारण संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से होगा।

आगे क्या होगा

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद केंद्र और दोनों राज्य सरकारों को अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि महाराष्ट्र और हरियाणा में दर्ज मामलों को एक साथ जोड़ने की मांग पर क्या कार्रवाई की जाए। फिलहाल मामला न्यायालय के विचाराधीन है और आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

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