कॉरिडोर-2 पर मेट्रो का टेस्ट रन सफल हुआ:CSA से 10 की स्पीड में विजय नगर स्टेशन तक पहुंची मेट्रो, जल्द पब्लिक को मिलेगी राहत

Oct 13, 2026 - 17:40
0
कॉरिडोर-2 पर मेट्रो का टेस्ट रन सफल हुआ:CSA से 10 की स्पीड में विजय नगर स्टेशन तक पहुंची मेट्रो, जल्द पब्लिक को मिलेगी राहत
कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-2 के पार्ट-वन में अंडरग्राउंड सेक्शन का काम पूरा होने के बाद मंगलवार को टेस्ट रन भी सफल रहा। अब कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (सीएमआरएस) की रिपोर्ट आने के बाद ट्रैक पर मेट्रो दौड़ाई जाएगी। फिलहाल इस रूट पर अभी अलग-अलग तरीकों से कई दिनों तक ट्रायल चलेगा। इसके बाद आंकड़ों का एनालिसिस करने के बाद सीएमआरएस अपनी रिपोर्ट देगा और हरी झंडी मिलने के बाद आम पब्लिक के लिए मेट्रो को दौड़ाया जाएगा। अंडरग्राउंड सेक्शन का काम पूरा होने के बाद हुआ ट्रायल कानपुर मेट्रो का कॉरिडोर-2 करीब 8.60 किलोमीटर लंबा है। यह चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSA) से बर्रा-8 तक बनाया जा रहा है। मूल परियोजना के अनुसार इसमें 8 स्टेशन प्रस्तावित हैं। इसमें पार्ट-1 में सीएसए से विजय नगर स्टेशन तक का काम पूरा हो गया है। इस वजह से मंगलवार को इस रूट पर मेट्रो ट्रेन का टेस्ट रन कराया गया और यह पूरी तरह से सफल भी रहा। मेट्रो के ट्रायल की शुरुआत कॉरिडोर-2 डिपो से हुई और ट्रेन 'डाउनलाइन' पर रावतपुर, काकादेव और डबल पुलिया स्टेशन होते हुए विजय नगर स्टेशन के निकट स्थित रैंप तक पहुंची, जहां से उसे वापस कॉरिडोर-2 डिपो लाया गया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। 5 से 25 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ी मेट्रो ट्रायल के दौरान मेट्रो को 5 से 10 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ाया गया। इसके बाद अब इसके अलग-अलग फेज में ट्रायल होंगे और इसे 25 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ाकर परीक्षण किया जाएगा। इस दौरान ट्रेन को कम गति पर चलाकर उसके मोटर, ब्रेक, पहियों, दरवाजों और अन्य प्रणालियों की जांच की जाती है। शुरुआती जांच संतोषजनक होने पर गति बढ़ाकर ट्रेन की स्थिरता, कंपन, त्वरण और ब्रेक लगाने की क्षमता की जांच की जाएगी। पटरी और ट्रैक की जांच रेल की सीध, लेवल, गेज, जोड़, फास्टनिंग, घुमाव और क्रॉसओवर की जांच की जाती है। पुल या एलिवेटेड वायाडक्ट पर ट्रेन के चलने के दौरान होने वाले कंपन पर भी ध्यान दिया जाता है। ब्रेक और इमरजेंसी ब्रेकिंग टेस्ट ट्रेन को अलग-अलग गति पर रोककर ब्रेकिंग दूरी, ब्रेक की प्रतिक्रिया और आवश्यकता पड़ने पर इमरजेंसी ब्रेक के प्रदर्शन की जांच की जाती है। ढलान वाले हिस्सों पर ब्रेक का परीक्षण भी महत्वपूर्ण होता है। सिग्नलिंग और ट्रेन सुरक्षा प्रणाली भी जांची ट्रायल के दौरान सिग्नल, ट्रेन की गति नियंत्रित करने वाली प्रणाली, संचार और निर्धारित गति से अधिक चलने पर सुरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया की जांच की जाती है। स्वचालित संचालन वाली मेट्रो में ट्रेन के अपने आप गति बढ़ाने, धीमी होने और सही जगह रुकने की भी जांच होती है। बिजली और मोटर की जांच बिजली की आपूर्ति, ट्रैक्शन मोटर, विद्युत उपकरणों, त्वरण और गति कम करने की प्रक्रिया की निगरानी की जाती है। जरूरत के अनुसार अलग-अलग परिचालन स्थितियों में परीक्षण होते हैं। कंपन और ट्रेन की स्थिरता विशेष उपकरणों से ट्रेन के डिब्बों के ऊर्ध्वाधर और पार्श्व कंपन तथा सस्पेंशन के व्यवहार को मापा जाता है। इससे पता चलता है कि ट्रेन अलग-अलग गति पर पटरी पर कितनी स्थिर रहती है। स्टेशन पर रुकने और दरवाजों की जांच ट्रेन निर्धारित स्थान पर सही ढंग से रुकती है या नहीं, दरवाजे सही तरफ खुलते हैं या नहीं और जहां प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर लगे हैं, वहां ट्रेन और दरवाजों का तालमेल ठीक है या नहीं, यह भी जांचा जाता है। ट्रायल के समय सुरक्षा के होते हैं इंतजाम मेट्रो के ट्रायल के दौरान ट्रैक पर अनधिकृत प्रवेश रोकने के लिए परीक्षण वाले हिस्से को अधिकृत कर्मचारियों तक सीमित रखा जाता है और ट्रैक पर किसी व्यक्ति या अवरोध की मौजूदगी की जांच की जाती है। ट्रेन संचालन, सिग्नलिंग, बिजली, ट्रैक और ब्रेकिंग सिस्टम से जुड़े विशेषज्ञ परीक्षण के अनुसार तैनात रहते हैं। ट्रेन ऑपरेटर और कंट्रोल सेंटर के बीच संपर्क बनाए रखा जाता है, ताकि किसी असामान्य स्थिति में निर्देश दिए जा सकें। स्पीड की होती है निगरानी निर्धारित ट्रायल योजना के अनुसार गति बढ़ाई जाती है। असामान्य कंपन, शोर, ब्रेकिंग या सिग्नलिंग में समस्या मिलने पर परीक्षण रोका या संशोधित किया जा सकता है। परीक्षण के आंकड़ों का रिकॉर्ड रखा जाता है। इसमें गति, ब्रेकिंग दूरी, कंपन, ट्रेन के व्यवहार और अन्य जरूरी तकनीकी मानकों का डेटा दर्ज किया जाता है। सीएमआरएस की रिपोर्ट के बाद दौड़ाई जाएगी ट्रेन ट्रायल रन सफल होने का अर्थ यह नहीं है कि अगले ही दिन यात्रियों के लिए मेट्रो शुरू हो जाएगी। आम तौर पर आगे की प्रक्रिया में ट्रायल के आंकड़ों और तकनीकी रिपोर्ट की समीक्षा करना, ट्रैक, ट्रेन, सिग्नलिंग, बिजली और अन्य प्रणालियों की कमियों को दूर करना तथा आवश्यक तकनीकी और सुरक्षा परीक्षण पूरे करना शामिल है। लागू नियमों के अनुसार संबंधित सक्षम सुरक्षा प्राधिकरण, जैसे मेट्रो रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CMRS), से जरूरी मंजूरी प्राप्त करना होता है। इसके बाद मेट्रो को पब्लिक के लिए चलाया जाता है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User