कांजीवरम की विशेष साड़ी से सजीं मां कात्यायनी:भव्य फूल बंगले में दिए दर्शन, नवरात्र के छठे दिन दर्शन को उमड़े श्रद्धालु
वृंदावन के राधा बाग स्थित 51 शक्तिपीठों में शामिल मां कात्यायनी मंदिर में शारदीय नवरात्रि के छठे दिन विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मां कात्यायनी का विशेष पूजन-अर्चन कर भव्य श्रृंगार किया गया। मंदिर परिसर में आकर्षक फूल बंगला सजाया गया, वहीं दक्षिण भारत से मंगाई गई विशेष कांजीवरम साड़ी धारण कराकर मां का मनोहारी श्रृंगार किया गया। मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। नवरात्र का छठा दिन मां कात्यायनी की आराधना का मंदिर के मुख्य पुजारी कमल तिवारी ने बताया कि नवरात्रि का छठा दिन मां कात्यायनी को समर्पित माना जाता है। इस दिन मां की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। इसी परंपरा के अंतर्गत मंदिर में विधि-विधान से पूजन किया गया और मां के समक्ष विभिन्न पकवानों का भोग अर्पित किया गया। उन्होंने बताया कि नवरात्रि के छठे दिन के लिए मंदिर परिसर में विशेष तैयारियां की गई थीं। मां के श्रृंगार को आकर्षक बनाने के लिए भव्य फूल बंगला सजाया गया। एक महीने में तैयार हुई मां की साड़ी मुख्य पुजारी ने बताया कि मां कात्यायनी के लिए दक्षिण भारत से विशेष कांजीवरम साड़ी मंगाई गई थी। इस साड़ी को तैयार करने में कारीगरों को करीब एक महीने का समय लगा। विशेष रूप से तैयार की गई इस साड़ी से मां का दिव्य श्रृंगार किया गया, जो धार्मिक आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा। मंदिर में मां के दर्शन और पूजन के लिए श्रद्धालुओं ने पहुंचकर अपनी आस्था व्यक्त की। मंदिर के संस्थापक का मनाया तिरोधान महोत्सव मंदिर ट्रस्ट के सचिव रवि दयाल ने बताया कि शारदीय नवरात्रि के छठे दिन मंदिर के संस्थापक बड़े गुरु महाराज स्वामी श्री केशवानंद महाराज का तिरोधान महोत्सव भी श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि स्वामी केशवानन्द महाराज ने इस मंदिर की स्थापना कर भक्तों को मां कात्यायनी के दर्शन और आराधना का पावन अवसर प्रदान किया। साधु संत सेवा का हुआ आयोजन रवि दयाल ने बताया कि तिरोधान महोत्सव के उपलक्ष्य में साधु-संतों के लिए प्रसाद की व्यवस्था की गई। नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी के विशेष पूजन-अर्चन के साथ मंदिर संस्थापक स्वामी केशवानंद महाराज का स्मरण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस प्रकार मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों और संत सेवा के माध्यम से नवरात्रि महोत्सव की आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ाया गया।
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