कानपुर चिड़ियाघर में जेब्रा के बच्चे की मौत:जन्म के समय रेड बैग में सफोकेशन की वजह से दम घुटा, 12 साल बाद उम्मीद टूटी
कानपुर चिड़ियाघर में मादा जेब्रा ने एक बच्चे को जन्म दिया, लेकिन कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। जन्म के बाद मादा जेब्रा बच्चे के शरीर पर मौजूद रेड बैग (जन्म के समय बच्चे को ढकने वाली झिल्ली) को नहीं फाड़ सकी। इसके चलते बच्चे को सांस लेने में परेशानी हुई और दम घुटने से उसकी मौत हो गई। चिड़ियाघर प्रशासन के मुताबिक, मादा जेब्रा ने रेड बैग फाड़ने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। 12 साल बाद जगी थी उम्मीद, लेकिन टूट गई
कानपुर चिड़ियाघर में फिलहाल दो जेब्रा हैं। इनमें एक नर और एक मादा है। करीब 12 साल से चिड़ियाघर में जेब्रा का कुनबा बढ़ने का इंतजार था। मादा जेब्रा के गर्भवती होने और बच्चे के जन्म से उम्मीद जगी थी कि अब यहां जेब्रा की संख्या बढ़ेगी, लेकिन नवजात की मौत से यह उम्मीद टूट गई। 2023 में बनतारा से लाई गई थी मादा जेब्रा
जू के डॉक्टर नासिर ने बताया कि मादा जेब्रा जेसमिन को साल 2023 में बनतारा से कानपुर चिड़ियाघर लाया गया था। उसकी उम्र करीब 7 साल है। रविवार तड़के उसने बच्चे को जन्म दिया, लेकिन जन्म के बाद रेड बैग नहीं फटने के कारण नवजात की सांस रुक गई। क्या होता है रेड बैग?
डॉ. नासिर के मुताबिक, घोड़े की प्रजाति के जानवरों में बच्चे के जन्म के दौरान ऐसी स्थिति हो सकती है। सामान्य तौर पर बच्चे के जन्म के बाद उसके शरीर को ढकने वाली झिल्ली फट जाती है, जिससे वह आसानी से सांस ले पाता है। हालांकि, पहली बार बच्चे को जन्म देने वाली अनुभवहीन मादा कभी-कभी इस झिल्ली को नहीं फाड़ पाती। ऐसी स्थिति में समय पर झिल्ली नहीं हटने से नवजात को सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
कानपुर चिड़ियाघर में भी इसी तरह की स्थिति बनी। मादा जेब्रा ने रेड बैग फाड़ने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। इसके चलते नवजात की दम घुटने से मौत हो गई।
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