कानपुर की बेटियों ने जापान में जीता फाइटिंग स्पिरिट अवार्ड:ड्रैगन कप में जापानी खिलाड़ियों को हराया, जुझारूपन के लिए मिला सम्मान

Oct 17, 2026 - 15:19
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कानपुर की बेटियों ने जापान में जीता फाइटिंग स्पिरिट अवार्ड:ड्रैगन कप में जापानी खिलाड़ियों को हराया, जुझारूपन के लिए मिला सम्मान
कानपुर की दो नन्हीं कराटे खिलाड़ियों ने जापान में आयोजित ड्रैगन कप में दमदार प्रदर्शन किया। सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल की छात्राएं हीबा फारूकी (11) और अबीर फारूकी (9) ने प्रतियोगिता के पहले राउंड में जापानी खिलाड़ियों को हराया। दूसरे राउंड में तकनीकी कारणों से प्रतियोगिता से बाहर होने के बावजूद दोनों खिलाड़ियों को उनके जुझारूपन और खेल भावना के लिए फाइटिंग स्पिरिट अवार्ड से सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में 22 देशों के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। बेटियों की इस उपलब्धि से परिवार में खुशी की लहर है, वहीं उनकी सफलता ने कानपुर का नाम भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। शनिवार को घर पहुंचने पर परिजनों में ख़ुशी की लहर है। लेदर कारोबारी अशद राफे की बेटियां हीबा फारूकी कक्षा छह और अबीर फारूकी कक्षा चार की छात्रा हैं। दोनों बहनें कई वर्षों से क्योकोशीन कराटे का अभ्यास कर रही हैं। वर्ष 2025 में देहरादून में आयोजित कराटे प्रतियोगिता में अबीर ने गोल्ड मेडल, जबकि हीबा ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इसी प्रतियोगिता में उनके प्रदर्शन के आधार पर दोनों का चयन जापान के काकोसीमा में आयोजित ड्रैगन कप के लिए हुआ था। 4 अक्टूबर को हुई इस प्रतियोगिता में दोनों ने पहले राउंड में जापानी खिलाड़ियों को हराकर अपनी क्षमता दिखाई। हालांकि, दूसरे राउंड में तकनीकी कारणों से उनका सफर थम गया। इसके बावजूद आयोजकों ने दोनों को फाइटिंग स्पिरिट अवार्ड देकर सम्मानित किया। हीबा फारूकी ने बताया कि वह छह साल की उम्र से क्योकोशीन कराटे की ट्रेनिंग ले रही हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय मां, अभिभावकों और स्कूल की टीम को दिया। हीबा का सपना बड़ा होकर आईपीएस अधिकारी बनने का है। वह देश की सुरक्षा में योगदान देना और अपराधों को रोकना चाहती हैं। वहीं, अबीर फारूकी पिछले चार वर्षों से कराटे का अभ्यास कर रही हैं। उनका सपना बड़ा होकर एक अच्छा स्कूल खोलने का है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर और शिक्षा से वंचित बच्चों को पढ़ने का अवसर मिल सके। दोनों बहनों का कहना है कि वे आगे भी मेहनत जारी रखकर देश के लिए बेहतर प्रदर्शन करना चाहती हैं। मां सादिया फारूकी ने बताया- बेटियों का मनोबल बढ़ाने और शारीरिक दक्षता बेहतर करने के लिए उन्होंने करीब तीन महीने पहले अतिरिक्त कोचिंग में ट्रेनिंग शुरू कराई थी। जापान में बेटियों के प्रदर्शन और सम्मान से पूरा परिवार गौरवान्वित है। उन्होंने सफलता का श्रेय स्कूल के स्पोर्ट्स टीचर बसंत कुमार, प्रिंसिपल गणेश तिवारी, डायरेक्टर हरीश संदुजा, वाइस प्रिंसिपल मधुश्री भौमिक और स्कूल स्टाफ को दिया। उन्होंने बताया कि इसी स्कूल के छात्र अयान डलमिया को भी प्रतियोगिता में फाइटिंग स्पिरिट अवार्ड मिला है।

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