खाली कुर्सियों के बीच सिमटा भाजपा का पिछड़ा वर्ग महासम्मेलन:बरेली के जीआईसी ऑडिटोरियम में नहीं पहुंची भीड़, खाली कुर्सियों के सामने सांसद ने दिए तर्क
उत्तर प्रदेश के बरेली में मिशन 2027 को साधने निकला भाजपा का पिछड़ा वर्ग महासम्मेलन खाली कुर्सियों की भेंट चढ़ गया। जीआईसी ऑडिटोरियम में खचाखच भीड़ की उम्मीद में सभागार के बाहर तक कुर्सियां सजाई गई थीं, लेकिन पूरे हॉल में सन्नाटा पसरा रहा और मुश्किल से 40-50 लोग ही नजर आए। खाली पड़ी कुर्सियां मुंह चिढ़ाती रहीं और बड़े नेता सवा घंटे तक इस उम्मीद में बैठे रहे कि शायद लोग आ जाएं, लेकिन अंततः खाली कुर्सियों के सामने ही सम्मेलन शुरू करना पड़ा। डेढ़ घंटे तक भीड़ का इंतजार, खाली सभागार में शुरू हुआ कार्यक्रम
शहर कोतवाली क्षेत्र स्थित पंडित राधेश्याम कथावाचक जीआईसी ऑडिटोरियम में शाम 5:00 बजे पिछड़ा वर्ग समाज कल्याण समिति के बैनर तले यह महासम्मेलन आयोजित किया गया था। बड़े नेता तय समय पर पहुंचे, मगर ऑडिटोरियम में कुर्सियां खाली थीं। नेताओं को लगा कि देर-सवेर लोग पहुंचेंगे, इसलिए करीब डेढ़ घंटे तक इंतजार किया गया। जब शाम 6:30 बजे तक भी सन्नाटा नहीं टूटा और गिनती के लोग ही पहुंचे, तब जाकर मुख्य मंच पर औपचारिक कार्यक्रम शुरू कराया गया। भीड़ गायब देख दिग्गज नेताओं ने बनाई दूरी, मंच पर गिने-चुने चेहरे
आयोजकों ने प्रचार-प्रसार में भाजपा के तमाम कद्दावर नेताओं के नाम शामिल किए थे। आमंत्रण पत्र के अनुसार भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष पूरन लाल लोधी, एमएलसी बहोरन लाल मौर्य, जिला पंचायत अध्यक्ष रश्मि पटेल और अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक की चेयरमैन डॉ. श्रुति गंगवार को महासम्मेलन में शामिल होना था। हालांकि, खाली कुर्सियों और भीड़ नदारद होने की सूचना मिलते ही अधिकांश वरिष्ठ नेताओं ने कार्यक्रम से किनारा कर लिया। मंच पर सिर्फ सांसद छत्रपाल गंगवार, सहकारी ग्राम विकास बैंक के उपसभापति रविंद्र सिंह राठौर और संयोजक वीरेंद्र अटल ही मौजूद रहे। सांसद छत्रपाल गंगवार का तर्क: 'सवर्ण भी पिछड़े हैं, बर्तन मांजने वाले ब्राह्मण को क्या कहेंगे'
सभागार में जुटी नगण्य भीड़ और खाली कुर्सियों के बीच पहुंचे बरेली सांसद छत्रपाल गंगवार ने मीडिया से बात करते हुए पिछड़ा वर्ग को लेकर अजीबोगरीब दलील दी। उन्होंने कहा: "बरेली और यूपी में 60 से 70 फीसदी आबादी पिछड़े वर्ग की है। पिछड़ा वर्ग को और मजबूत करना ही हमारा मकसद है। लेकिन मैं तो सवर्णों को भी पिछड़ा ही मानता हूं। अगर कोई ब्राह्मण किसी के घर में बर्तन मांजने का काम कर रहा है और उसकी मां-बहन मेहनत कर जीविका चला रही है, तो आर्थिक रूप से उसे क्या कहेंगे? पिछड़ापन जाति से नहीं, आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था से जुड़ा है। पिछड़ा समाज चाहे कितने भी ऊंचे पायदान पर पहुंच जाए, लेकिन व्यवस्था में सोच पूरी तरह नहीं बदली है।" भीड़ न आने पर बोले सांसद— व्यवस्था आयोजकों की थी, हमें बुलाया तो आ गए
जब सांसद से ऑडिटोरियम के खाली रहने और लोगों के न पहुंचने पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने सारा ठीकरा आयोजकों पर फोड़ दिया। सांसद ने कहा, "भीड़ जुटाने और व्यवस्था करने का जिम्मा आयोजकों का था। हमें तो सिर्फ कार्यक्रम में शामिल होने का बुलावा मिला था, इसलिए हम आ गए। बाकी व्यवस्था क्यों गड़बड़ाई, यह वही बता सकते हैं। रही बात 2027 चुनाव की, तो जनता योगी सरकार के कामकाज के दम पर 2017 से भी बड़ा जनादेश भाजपा को देगी।" बरेली में भाजपा का पिछड़ा वर्ग महासम्मेलन: खाली कुर्सियां, नदारद नेता और सांसद का तर्क मिशन 2027 की तैयारी में झटका: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की रणनीति के तहत बरेली में आयोजित पिछड़ा वर्ग महासम्मेलन में भाजपा को भारी फजीहत का सामना करना पड़ा। खाली कुर्सियों के बीच सन्नाटा: आयोजकों ने पूरे सभागार के भरने का दावा कर बाहर भी कुर्सियां लगवाई थीं, लेकिन पूरा ऑडिटोरियम खाली रहा और महज 40-50 लोग ही नजर आए। डेढ़ घंटे तक भीड़ का इंतजार: शाम 5:00 बजे का समय निर्धारित था, लेकिन जनता के न पहुंचने पर नेता साढ़े छह बजे तक इंतजार में बैठे रहे और फिर मजबूरी में कार्यक्रम शुरू करना पड़ा। बड़े नेताओं ने बनाई दूरी: क्षेत्रीय अध्यक्ष पूरन लाल लोधी, एमएलसी बहोरन लाल मौर्य और अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की चेयरमैन श्रुति गंगवार समेत कई प्रमुख नेता खाली हॉल देखकर पहुंचे ही नहीं। मंच पर गिने-चुने चेहरे: कार्यक्रम में केवल बरेली सांसद छत्रपाल गंगवार, यूपी सहकारी ग्राम विकास बैंक के उपसभापति रविंद्र सिंह राठौर और आयोजक वीरेंद्र कुमार अटल ही मौजूद रहे। सांसद का सवर्णों पर अजीब तर्क: सांसद छत्रपाल गंगवार ने कहा कि सवर्ण भी पिछड़े हैं; अगर कोई ब्राह्मण घरों में बर्तन मांजकर जीविका चला रहा है, तो उसे क्या कहेंगे। आबादी का गणित गिनाया: सांसद ने कहा कि बरेली और पूरे उत्तर प्रदेश में पिछड़ा वर्ग की आबादी 60 से 70 फीसदी है और उन्हें एकजुट व सशक्त करना जरूरी है। सामाजिक सोच पर उठाया सवाल: सांसद ने दर्द बयां करते हुए कहा कि पिछड़ा वर्ग समाज में चाहे कितने भी ऊंचे पायदान पर पहुंच जाए, लेकिन लोगों के मन से पुरानी सामाजिक सोच नहीं निकलती।
आयोजकों पर फोड़ा ठीकरा: हॉल में भीड़ न जुटने और कुर्सियां खाली रहने के सवाल पर सांसद ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि व्यवस्था आयोजकों की थी, हमें निमंत्रण मिला था तो हम आ गए। 2027 चुनाव में जीत का दावा: तमाम अव्यवस्थाओं के बीच सांसद ने दावा किया कि मुख्यमंत्री के कामकाज की बदौलत 2027 में भाजपा 2017 से भी बड़ा रिकॉर्ड तोड़कर सरकार बनाएगी।
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