बंगाल एसआईआर की 37 लाख अपीलें लंबित, 12 साल लगेंगे

पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद मतदाता सूची से जुड़े 37 लाख से अधिक मामले लंबित हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार मौजूदा गति से इन अपीलों के निपटारे में 12 साल से अधिक समय लग सकता है। मामलों को तेजी से निपटाने के लिए आयोग ने पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों के आधार पर 42 अधिकरण बनाने का प्रस्ताव रखा है।

Sep 21, 2026 - 14:56
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बंगाल एसआईआर की 37 लाख अपीलें लंबित, 12 साल लगेंगे

दि राइजिंग न्यूज़ | कोलकाता | 21 सितंबर 2026 

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद नाम जोड़ने और हटाने से जुड़ी 37 लाख से अधिक अपीलें अभी लंबित हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार मौजूदा निपटारे की रफ्तार जारी रही तो सभी मामलों को निपटाने में 12 साल से अधिक समय लग सकता है। मामलों के तेजी से निपटारे के लिए आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय से पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों के अनुरूप 42 अपीलीय अधिकरण बनाने का प्रस्ताव रखा है।

पश्चिम बंगाल में 37 लाख से ज्यादा अपीलें लंबित

निर्वाचन आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे में बताया कि 16 सितंबर 2026 तक एसआईआर से जुड़ी 37,05,235 अपीलें लंबित थीं। अप्रैल के मध्य से काम कर रहे अधिकरण अब तक 1,26,194 मामलों का निपटारा कर चुके हैं। आयोग के आंकड़ों के अनुसार मौजूदा गति करीब 25,238 मामलों के निपटारे की है।

सभी मामलों के निपटारे में लग सकते हैं 12 साल

निर्वाचन आयोग के मुताबिक यदि अधिकरण इसी रफ्तार से सप्ताह के सातों दिन काम करते रहे, तो लंबित मामलों को पूरा करने में करीब 146 महीने लग सकते हैं। यह अवधि 12 साल से अधिक बैठती है। इसी वजह से आयोग ने मामलों की संख्या के मुकाबले मौजूदा व्यवस्था को बढ़ाने की जरूरत बताई है। आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय से अतिरिक्त अधिकरणों की अनुमति मांगी है।

42 लोकसभा सीटों के आधार पर अधिकरण बनाने का प्रस्ताव

निर्वाचन आयोग ने अपीलों के तेजी से निपटारे के लिए पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों के अनुरूप 42 अपीलीय अधिकरण बनाने का प्रस्ताव दिया है। फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद गठित 19 अधिकरण इन मामलों की सुनवाई कर रहे हैं। आयोग का कहना है कि अधिकरणों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों के निपटारे की गति बढ़ाई जा सकेगी।

कुल 38.31 लाख अपीलें दाखिल

निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक एसआईआर से जुड़े आदेशों के खिलाफ कुल 38.31 लाख अपीलें दाखिल की गई हैं। इनमें 22.21 लाख अपीलें उन लोगों की हैं, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए और वे दोबारा नाम शामिल कराने की मांग कर रहे हैं। वहीं 16.10 लाख अपीलें मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने के खिलाफ दाखिल की गई हैं।

एक लाख से ज्यादा मामलों में नाम दोबारा जुड़े

अब तक निपटाई गई 1,26,194 अपीलों में से 1,13,943 मामलों में आवेदकों के नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल किए गए। यानी निपटाए गए मामलों में 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में नाम बहाल किए गए हैं। निर्वाचन आयोग ने यह आंकड़ा सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष दाखिल हलफनामे में रखा है।

एसआईआर से चुनाव परिणाम प्रभावित होने के दावे पर आयोग की आपत्ति

निर्वाचन आयोग ने उन दावों को भी खारिज किया है जिनमें कहा गया था कि एसआईआर के दौरान हटाए गए मतदाताओं की संख्या कुछ विधानसभा क्षेत्रों में जीत के अंतर से अधिक थी। आयोग ने कहा कि केवल हटाए गए नामों और जीत के अंतर की तुलना करना सही तरीका नहीं है। उसके अनुसार इस गणना में अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरे नाम जैसी श्रेणियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

आयोग ने जीत के अंतर वाली तुलना को बताया गलत तरीका

निर्वाचन आयोग ने अपने हलफनामे में कहा कि केवल मतदाता सूची से हटाए गए नामों की संख्या को चुनावी जीत के अंतर से जोड़कर परिणाम प्रभावित होने का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। आयोग ने ऐसी तुलना को त्रुटिपूर्ण और अनुमान पर आधारित बताया। आयोग ने यह भी कहा कि कुछ ऐसे विधानसभा क्षेत्रों में भी तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जीते, जहां हटाए गए नामों की संख्या जीत के अंतर से अधिक थी।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद शुरू हुई सुनवाई

एसआईआर से जुड़ी अपीलों के निपटारे को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने निर्वाचन आयोग से लंबित मामलों और उनके निपटारे का विवरण मांगा था। न्यायालय ने मामलों के समयबद्ध निपटारे और अतिरिक्त अधिकरणों की आवश्यकता पर भी जानकारी मांगी थी। इसके बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर 19 अधिकरण गठित किए गए, जिनमें पूर्व उच्च न्यायालय मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों को जिम्मेदारी दी गई।

करीब 700 न्यायिक अधिकारियों की भी लगाई गई ड्यूटी

एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े दावों और आपत्तियों की जांच के लिए पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के करीब 700 न्यायिक अधिकारियों को भी लगाया गया था। इसके बावजूद अपीलों का बड़ा हिस्सा अभी लंबित है। अब निर्वाचन आयोग अधिक अधिकरणों के गठन के जरिए मामलों के निपटारे में तेजी लाने की मांग कर रहा है।

अब आगे क्या होगा

निर्वाचन आयोग की मांग पर सर्वोच्च न्यायालय के स्तर पर आगे विचार किया जाना है। आयोग ने 42 लोकसभा क्षेत्रों के अनुरूप 42 अधिकरण बनाने का प्रस्ताव दिया है, ताकि बड़ी संख्या में लंबित अपीलों को अलग-अलग स्तर पर निपटाया जा सके। फिलहाल 37 लाख से अधिक लंबित मामलों के कारण एसआईआर से जुड़ी अपीलों का निपटारा एक बड़ी प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया बना हुआ है।

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