खुद खेलीं, अब बेटियों को सिखा रहीं हुनर:शामली में रितिका सिखा रहीं आत्मरक्षा और आत्मविश्वास
शामली। खेल मैदान में उतरने की कोई उम्र नहीं होती, जरूरत होती है जुनून और लगातार मेहनत की। शामली की रितिका सांगल ने बचपन से ही खेलों को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाया और आज स्कूल में PTI (Physical Training Instructor) के रूप में बच्चों को खेलों के साथ आत्मरक्षा के गुर भी सिखा रही हैं। स्किपिंग, खो-खो और सेल्फ डिफेंस में रुचि रखने वाली रितिका का उद्देश्य सिर्फ खुद आगे बढ़ना नहीं, बल्कि दूसरी बेटियों को भी आत्मनिर्भर और मजबूत बनाना है। रितिका बताती हैं कि बचपन से ही उन्हें खेलों में खास दिलचस्पी थी। उन्होंने खो-खो, स्किपिंग और सेल्फ डिफेंस में अपनी रुचि को लगातार आगे बढ़ाया। स्किपिंग में उन्होंने स्टेट लेवल पर भी प्रतिभाग किया। खेल के दौरान सीखे अनुभवों को अब वह बच्चों तक पहुंचा रही हैं। स्किपिंग में सिखाती हैं अलग-अलग वैरिएशन रितिका की खास रुचि स्किपिंग में है। वह बच्चों को सामान्य स्किपिंग के साथ-साथ इसके अलग-अलग वैरिएशन और तकनीक सिखाती हैं। उनका मानना है कि स्किपिंग सिर्फ खेल नहीं, बल्कि फिटनेस, अनुशासन और शरीर पर नियंत्रण विकसित करने का प्रभावी माध्यम भी है। वहीं सेल्फ डिफेंस को लेकर उनका फोकस खासतौर पर बेटियों को आत्मविश्वास देने पर है। उनका मानना है कि हर लड़की को कम से कम इतनी आत्मरक्षा जरूर आनी चाहिए कि वह मुश्किल परिस्थिति में खुद को सुरक्षित रख सके। ‘नारी शक्ति को सिर्फ कहना नहीं, मजबूत बनाना है’ रितिका का सबसे बड़ा संदेश ‘नारी शक्ति’ है। वह कहती हैं कि महिलाओं को अपनी क्षमता पहचानकर आगे बढ़ना चाहिए। उनके अनुसार किसी भी लड़की को यह नहीं सोचना चाहिए कि वह कमजोर है। सही प्रशिक्षण, आत्मविश्वास और लगातार मेहनत से वह अपनी अलग पहचान बना सकती है।
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