कुशीनगर के अहिरौलीदान-बाघाचौर में नारायणी नदी तटबंध के करीब पहुंची:बचाव में JCB-पोकलेन से डाले जा रहे बोल्डर; तेज कटान से बांध पर बढ़ा खतरा
कुशीनगर के तमकुहीराज क्षेत्र के अहिरौलीदान-बाघाचौर में नारायणी नदी का कटान ग्रामीणों के लिए खतरा बन गया है। रविवार को भी नदी में तेज कटान होता देखा गया। नदी तटबंध के काफी करीब पहुंच गई है। ग्रामीणों के मुताबिक, नदी हर दिन करीब 2 से 4 फीट जमीन काट रही है। इससे तटबंध के किनारे बसे लोगों की घर और जमीन बचाने की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले नदी तटबंध से करीब पांच किलोमीटर दूर बहती थी, लेकिन नदी में लगातार सिल्ट जमा होने से इसकी धारा का रुख बदल गया है। पिछले कुछ वर्षों में नदी तटबंध की ओर खिसकती गई और अब कई जगह सीधे बांध के किनारे कटान कर रही है। तेज बहाव के कारण मिट्टी लगातार नदी में समा रही है। कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड की ओर से बचाव कार्य किया जा रहा है। JCB और पोकलेन मशीनों की मदद से बड़े-बड़े बोल्डर डालकर तटबंध को सुरक्षित रखने का प्रयास किया जा रहा है। मौके पर इंजीनियरों की टीम तैनात है, जो 24 घंटे स्थिति पर नजर रख रही है। हालांकि, नदी का दबाव अधिक होने के कारण जमीन कटने का सिलसिला जारी है। अधिशासी अभियंता महेश कुमार सिंह ने बताया कि कटान रोकने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। मौके पर 24 घंटे निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि बचाव कार्य के लिए पर्याप्त बोल्डर और अन्य सामग्री उपलब्ध है। सिल्ट जमा होने से बढ़ रहा कटान का दबाव बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि नदी की तलहटी में लगातार सिल्ट जमा होने से उसका तल उथला हो गया है। पानी कम होने के बाद नदी में बैकरोलिंग होने से कटान का दबाव तटबंध की ओर बढ़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, यदि नदी की धारा को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो जलस्तर बढ़ने पर तटबंध टूटने का खतरा फिर पैदा हो सकता है। इससे आसपास के कई गांव प्रभावित हो सकते हैं। ग्रामीणों ने ड्रेजिंग और स्थायी बोल्डर पिचिंग की मांग की बाढ़ प्रभावित ग्रामीण अरविंद सिंह, ओमप्रकाश सिंह, रामपुजन प्रसाद, ललन यादव, जितेंद्र गुप्ता, राकेश सिंह, इंदल सिंह, अमन कुमार, सकई प्रसाद, आशीषर, नंदलाल और शिवपूजन साह समेत अन्य लोगों ने सिंचाई विभाग और प्रशासन से नारायणी नदी की तलहटी में जमा सिल्ट हटाने की मांग की है। ग्रामीणों ने नदी की ड्रेजिंग कर सिल्ट निकालने और तटबंध पर ठोस व स्थायी बोल्डर पिचिंग कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि कटान रोकने के लिए स्थायी उपाय किए जाने जरूरी हैं, ताकि तटबंध के किनारे बसे लोगों के घरों और जमीन को सुरक्षित रखा जा सके।
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