कुशीनगर में नारायणी नदी का कहर, 700 मीटर कटान:एपी तटबंध पर फिर बढ़ा खतरा, सड़कें टूटने और फसलें बर्बाद होने से बढ़ीं मुश्किलें
कुशीनगर के तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में नारायणी नदी का दबाव एपी तटबंध पर लगातार बना हुआ है। नोनियापट्टी गांव के पास नदी ने 24 घंटे के भीतर करीब 700 मीटर हिस्से में कटान किया है। वहीं, अहिरौलिदान गांव के सामने भी मुख्य बंधे पर नदी का दबाव बना हुआ है। बीती रात तक नदी बंधे का करीब 700 मीटर हिस्सा काट चुकी थी। मौके पर बचाव सामग्री की कमी के बीच सिंचाई विभाग के अभियंता तटबंध को बचाने में जुटे हैं। कटान की रफ्तार से आसपास के ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। जलस्तर घटने के बाद भी कटान जारी ग्रामीणों के अनुसार, नारायणी नदी का जलस्तर घटने के बावजूद नोनियापट्टी के पास कटान नहीं रुक रहा है। नदी 13.200 किलोमीटर पर बनी ठोकर के आसपास लगातार जमीन काट रही है। पिछले कई दिनों से जारी कटान के कारण नदी किनारे का हिस्सा कमजोर हो गया है। ग्रामीणों को आशंका है कि नदी का दबाव बढ़ने पर कटान और तेज हो सकता है। सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता विकास सिंह, अधिशासी अभियंता महेंद्र कुमार सिंह और सहायक अभियंताओं की टीम गांव में कैंप कर स्थिति पर नजर रख रही है। प्रशासन और सिंचाई विभाग की टीमें संवेदनशील स्थानों पर निगरानी कर रही हैं और बचाव के इंतजाम में जुटी हैं। 28 सितंबर की रात पहली बार टूटा था तटबंध कुशीनगर में अहिरौलिदान-पिपरासी एपी तटबंध पर 28 सितंबर की देर रात चैनपट्टी-गौरहा गांव के पास तटबंध टूट गया था। रात करीब 10:30 बजे इसकी सूचना फैलते ही आसपास के ग्रामीण इलाकों में अफरा-तफरी मच गई थी। सैकड़ों लोग घरों का सामान लेकर पास के तटबंध पर शरण लेने पहुंचे थे। सुबह तक कटान से तटबंध का करीब 100 मीटर हिस्सा बह गया था। इससे 25 से अधिक गांवों की एक लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित हुई थी। अगले दिन बाढ़ क्षेत्र पहुंचे थे सीएम योगी तटबंध टूटने के अगले दिन, 29 सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया था। सुबह करीब 10 बजे उनके दौरे की सूचना मिलने के बाद प्रशासन ने राहत इंतजाम तेज कर दिए थे। शाम करीब 4 बजे मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर बेदूपार इंटर कॉलेज परिसर में उतरा था। मुख्यमंत्री पहले बाढ़ क्षेत्र में बने शेल्टर होम पहुंचे। इसके बाद इंटर कॉलेज परिसर में आयोजित कार्यक्रम में बाढ़ प्रभावित महिलाओं को राहत सामग्री के पैकेट वितरित किए। उन्होंने लोगों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा था कि सरकार उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री के दौरे के बाद प्रशासन ने राहत सामग्री के वितरण और प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने का काम तेज किया था। टूटे हिस्से की मरम्मत में जुटी टीमें एपी तटबंध के टूटे हिस्से की मरम्मत का काम भी जारी है। मुख्यमंत्री कार्यालय की निगरानी के बीच हरिद्वार और बिजनौर से आई टीमें बचाव और मरम्मत कार्य में जुटी थीं। टूटे हिस्से को मजबूत करने के साथ आसपास दोबारा कटान रोकने के उपाय भी किए जा रहे हैं। कटान प्रभावित जगह पर लकड़ी के खंभे नदी के भीतर करीब 20 फीट तक जमीन में लगाए जा रहे हैं। इसके बाद खंभों के सहारे बोरियां लगाकर दो कतारों के बीच बोरियां भरी जा रही हैं, ताकि पानी के बहाव को कुछ समय तक रोका जा सके। पानी घटा, लेकिन गांवों में मुश्किलें बरकरार खड्डा क्षेत्र के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी कई गांवों से उतरने लगा है, लेकिन इससे ग्रामीणों की परेशानियां खत्म नहीं हुई हैं। मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर और नारायनपुर समेत प्रभावित गांवों में खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान पहुंचा है। कई जगह सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। कुछ स्थानों पर घरों में पानी भरने से सोलर पैनल खराब हो गए हैं। बिजली न होने के कारण ग्रामीणों को अंधेरे में रहना पड़ रहा है। सड़कें टूटने से आवागमन प्रभावित खड्डा क्षेत्र में मरचहवा, दक्षिण टोला, उत्तर टोला और आसपास के अन्य इलाकों में संपर्क मार्ग टूटने से आवागमन प्रभावित हुआ है। बसंतपुर के पास सड़क क्षतिग्रस्त होने के कारण लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। शिवपुर, नारायनपुर और हरिहरपुर में भी संपर्क मार्गों की स्थिति खराब है। बाढ़ के दौरान राहत पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किए गए कुछ रास्ते पानी उतरने के बाद और क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से कटान प्रभावित हिस्सों की स्थायी सुरक्षा, क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत, बिजली आपूर्ति बहाल करने और फसल नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने की मांग की है। अधिकारियों के अनुसार, संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई है और स्थिति के अनुसार बचाव कार्य कराए जा रहे हैं।
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