लखीमपुर-खीरी में नम आंखों से 3 घरों से उठीं अर्थियां:कल भीषण हादसे में गई थी जान, फरार ट्रक चालक की तलाश

Oct 18, 2026 - 16:46
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लखीमपुर-खीरी में नम आंखों से 3 घरों से उठीं अर्थियां:कल भीषण हादसे में गई थी जान, फरार ट्रक चालक की तलाश
लखीमपुर-खीरी में दो दिन पहले बेटी की नर्सिंग की पढ़ाई के लिए 30 हजार रुपये फीस जमा की थी। पिता को उम्मीद थी कि बेटी पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़ी होगी और परिवार का सहारा बनेगी। लेकिन किसे पता था कि फीस जमा करने के दो दिन बाद ही घर में मातम छा जाएगा। शनिवार को पलिया-भीरा मार्ग पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे में जान गंवाने वाली प्रियंका, क्रांति और रामजीवन का रविवार को अंतिम संस्कार किया गया। तीनों के परिजनों की आंखें नम थीं। जिन घरों में बच्चों के भविष्य को लेकर सपने देखे जा रहे थे, वहां अब अपनों को खोने का गम है। भीरा-पलिया मार्ग पर साई मंदिर के पास तेज रफ्तार ट्रक की टक्कर से दो नर्सिंग छात्राओं समेत तीन युवाओं की मौत हो गई थी। मृतकों में बोटनपुरवा-दौलतापुर निवासी प्रियंका, निघासन के चंद्रगुप्त नगर निवासी क्रांति और रामजीवन शामिल थे। दोनों छात्राएं कॉलेज से छुट्टी होने के बाद घर लौटने के लिए बस का इंतजार कर रही थीं। इसी दौरान रामजीवन ने उन्हें अपनी बाइक पर बैठा लिया। रास्ते में ट्रक की टक्कर से तीनों की जान चली गई। रविवार को अंतिम संस्कार के दौरान परिवारों का दुख देख हर किसी की आंखें नम हो गईं। दो दिन पहले जमा की थी फीस, अब दी अंतिम विदाई प्रियंका अपने परिवार में सबसे छोटी थी। वह बोटनपुरवा, दौलतापुर निवासी पृथ्वीपाल की बेटी थी और नर्सिंग की पढ़ाई कर रही थी। परिवार ने उसकी शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए कई सपने संजोए थे। परिजनों के मुताबिक, हादसे से महज 2 दिन पहले ही उसके पिता ने पढ़ाई के लिए 30 हजार रुपये फीस जमा की थी। पिता को उम्मीद थी कि बेटी अपनी पढ़ाई पूरी कर आत्मनिर्भर बनेगी और परिवार की खुशियों का सहारा बनेगी। लेकिन सड़क हादसे ने परिवार की उम्मीदों को हमेशा के लिए तोड़ दिया। जिस बेटी को बेहतर भविष्य देने के लिए पिता ने मेहनत की, रविवार को उसी को नम आंखों से अंतिम विदाई देनी पड़ी। परिवार के लिए इस दुख को सह पाना बेहद कठिन है। सभासद की बेटी क्रांति के सपने भी अधूरे रह गए हादसे में जान गंवाने वाली करीब 21 वर्षीय क्रांति निघासन नगर पंचायत के चंद्रगुप्त नगर वार्ड निवासी सभासद रामखेलावन की बेटी थी। वह पिछले 2 साल से बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई कर रही थी। परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं। क्रांति अपनी सहेली प्रियंका के साथ कॉलेज से घर लौट रही थी, लेकिन रास्ते में हुए हादसे ने उसकी जिंदगी छीन ली। क्रांति की मौत से मां शकुंतला और भाई-बहनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। रविवार को अंतिम संस्कार के दौरान परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल रहा। जिस बेटी को परिवार पढ़ा-लिखाकर आगे बढ़ते देखना चाहता था, वह अब कभी घर लौटकर नहीं आएगी। रामजीवन के घर में भी पसरा मातम हादसे में जान गंवाने वाला रामजीवन चंद्रगुप्त नगर निवासी सोनेलाल का बेटा था। बताया गया कि वह वन बीट में दवा लेने आया था। इसी दौरान सड़क किनारे बस का इंतजार कर रही दोनों छात्राओं से उसकी मुलाकात हुई। रामजीवन ने दोनों को बाइक से घर छोड़ने की बात कही और उन्हें साथ बैठा लिया। लेकिन साई मंदिर के पास ट्रक की टक्कर ने तीनों की जिंदगी छीन ली। रामजीवन भी अपने घर नहीं पहुंच सका। उसकी मौत से परिवार ने अपना बेटा खो दिया। रविवार को अंतिम संस्कार के साथ परिवार के सामने अपनों के बिना जीवन बिताने की कठिन चुनौती खड़ी हो गई। तीन परिवारों की खुशियां मातम में बदलीं इस हादसे ने तीन परिवारों को ऐसा जख्म दिया है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। प्रियंका के पिता ने बेटी की पढ़ाई के लिए फीस जमा की थी, क्रांति का परिवार उसकी कामयाबी की उम्मीद लगाए बैठा था और रामजीवन के घरवालों को भी उसके लौटने का इंतजार रहा होगा। लेकिन एक सड़क हादसे ने तीनों परिवारों की जिंदगी बदल दी। रविवार को अंतिम संस्कार के साथ तीनों को अंतिम विदाई दी गई। पीछे रह गए परिवारों के सामने अब अपनों की यादें और उनके अधूरे सपने हैं। हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहनों से होने वाले खतरों की गंभीरता को सामने ला दिया है।

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