लखीमपुर में बेटी दिवस पर 13 बेटियों का सम्मान:शहीद नसीरुद्दीन मेमोरियल मैदान में सजी साहित्यिक महफिल
लखीमपुर खीरी में मंगलवार रात बेटी दिवस के अवसर पर शहीद नसीरुद्दीन मेमोरियल मैदान में सम्मान समारोह और कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। शिक्षा, चिकित्सा, समाजसेवा, पर्यावरण और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम करने वाली जिले की 13 बेटियों को सम्मानित किया गया। इसके बाद कवियों और शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। देर रात तक मैदान में तालियों की गूंज सुनाई देती रही। पहचान बनाने वाली बेटियां सम्मानित सम्मान समारोह में डॉ. राधा टंडन, डॉ. रूबी मेहता, शिक्षिका डॉ. जोनहरा मिनहाज, डॉ. मीनाक्षी तिवारी, गुरजीत कौर अजमानी, छात्रा अपूर्वा विश्वकर्मा, डॉ. सुप्रिया मिश्रा, स्नेक गर्ल नाजरुन निशा, समाजसेवी आरती श्रीवास्तव, मेधावी छात्रा ममता भारती, किडनी डोनर सनिला वर्मा, प्रधान अमरून निशा और शिक्षिका हरविंदर कौर अजमानी को सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि बेटियां आज शिक्षा, चिकित्सा, समाजसेवा, खेल, प्रशासन समेत विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा साबित कर रही हैं। उन्हें अवसर और प्रोत्साहन मिलने पर वे परिवार के साथ समाज और देश का नाम भी रोशन कर रही हैं। कई राजनीतिक और सामाजिक हस्तियां रहीं मौजूद कार्यक्रम में विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष जासमीर अंसारी, पूर्व सांसद कैसर जहां, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सुनील सिंह, सपा जिलाध्यक्ष रामपाल सिंह और आयोजक मोहन बाजपेई समेत कई सामाजिक और गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में शहरवासियों और साहित्य प्रेमियों की भी बड़ी संख्या रही। शेरो-शायरी ने बांधा समां बेटियों के सम्मान के बाद कवि सम्मेलन शुरू हुआ। योगेंद्र योगी, कविता तिवारी, डॉ. सर्वेश अस्थाना, मोहित शौर्य, कल्पना शुक्ला, शबीना अदीब, स्वयं श्रीवास्तव, जानी बैरागी, शशि श्रेया, आशीष अनल, मुमताज नसीम, शबा बलरामपुरी और हेमंत पांडे ने रचनाएं प्रस्तुत कीं। कवियों ने हास्य-व्यंग्य, ओज और शायरी के जरिए श्रोताओं का मनोरंजन किया। डॉ. सर्वेश अस्थाना के हास्य-व्यंग्य और शबीना अदीब के शेरों पर खूब तालियां बजीं। जानी बैरागी की ओजपूर्ण प्रस्तुति, शबा बलरामपुरी और मुमताज नसीम की गजलों के साथ कविता तिवारी की प्रस्तुति को भी श्रोताओं ने सराहा। देर रात तक चली इस साहित्यिक महफिल में कभी ठहाके गूंजे तो कभी गंभीर और भावपूर्ण रचनाओं पर श्रोता भावुक नजर आए। बेटियों के सम्मान और साहित्य-संस्कृति के इस संगम ने आयोजन को खास बना दिया।
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