लखनऊ की आसफ़ी मस्जिद में नमाज़-ए-जुमा:अमन और सादगी का पैगाम दिया गया
लखनऊ की शाही आसफ़ी मस्जिद में शुक्रवार को मौलाना सैयद रज़ा हैदर ज़ैदी की इमामत में नमाज़-ए-जुमा अक़ीदत के साथ अदा की गई। ख़ुतबा-ए-जुमा में उन्होंने तौहीद, पारिवारिक व्यवस्था, बढ़ती तलाक़ की घटनाओं और शादी-ब्याह की फ़िज़ूल रस्मों पर विस्तार से चर्चा की। पहले ख़ुतबे में मौलाना ने "तौहीद-ए-मुफ़ज़्ज़ल" विषय पर इमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) और मुफ़ज़्ज़ल बिन उमर के वाक़ए का ज़िक्र करते हुए कहा कि इंसान को व्यर्थ की बहस में उलझने के बजाय अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर करना चाहिए। दूसरे ख़ुतबे में बढ़ती तलाक़ की घटनाओं पर गहरी चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि शादी के लिए दीन, ईमान और अच्छे अख़लाक़ को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मौलाना ने शादी-ब्याह की फ़िज़ूल रस्मों पर टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि इस्लाम ने निकाह को बेहद आसान रखा है। इसके अलावा, गांधी जयंती के अवसर पर उन्होंने समाज में अमन, अहिंसा और भाईचारे पर विशेष ज़ोर दिया। अंत में मौलाना ने सभी नमाज़ियों को अहल-ए-बैत (अ.स.) की शिक्षाओं को अपने व्यावहारिक जीवन में उतारने की नसीहत दी।
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