लखनऊ की रामलीला में शबरी मिलन, लंका दहन का मंचन:भक्ति, भाव और रोमांच का संगम, दर्शक देर रात तक डूबे रहे
लखनऊ के महानगर में चल रही श्रीरामलीला में रविवार को भक्ति, भाव और रोमांच का संगम देखने को मिला। सजीव अभिनय के जरिए रामचरितमानस के प्रमुख प्रसंग मंच पर उतरे तो पंडाल में बैठे दर्शक देर रात तक लीला में डूबे रहे।लीला की शुरुआत मां काली की आरती से हुई। रविवार की लीला का सबसे भावुक प्रसंग शबरी मिलन रहा। वर्षों से प्रभु श्रीराम की प्रतीक्षा कर रही शबरी की निश्छल भक्ति और भगवान राम की कृपा का मंचन देखकर दर्शक भावुक हो गए। मंच पर मानस की चौपाइयों के सस्वर पाठ ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। कह कथा भगति कै गाई। निज पद राजत सबहि जनाई॥शबरी का मार्मिक किरदार वयोवृद्ध कलाकार हेमा जोशी ने निभाया। हनुमान की भूमिका रामलीला के निदेशक महेंद्र पन्त ने निभाई। राम-विलाप से बालि उद्धार तक मंचन इसके बाद राम-विलाप के मर्मस्पर्शी प्रसंग ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं। हनुमान जी का भगवान राम से मिलन, राम-सुग्रीव मैत्री और बालि-सुग्रीव युद्ध का मंचन किया। भगवान श्रीराम द्वारा बालि के उद्धार का प्रसंग भी प्रभावशाली रहा। मैं रामदूत कपि हनुमाना से लंका दहन लीला आगे बढ़ी तो सीता की खोज का प्रसंग आया। हनुमान जी अशोक वाटिका पहुंचे और माता सीता को भगवान राम का संदेश दिया। अपना परिचय देते हुए कहा- मैं रामदूत कपि हनुमाना।इसके बाद उन्होंने सीता जी को भगवान राम की अंगूठी सौंपी। हनुमान-रावण संवाद के बाद हनुमान जी ने लंका में अपना पराक्रम दिखाया। पूंछ में आग लगाए जाने के बाद उन्होंने लंका में चारों ओर हाहाकार मचा दिया। लंका दहन का भव्य मंचन होते ही पूरा पंडाल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इस मौके पर समिति के संरक्षक संजय श्रीवास्तव, महासचिव हेम पन्त, मृत्युंजय पांडे, आनंद सिंह और नीरद लोहानी शामिल हुए।
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