लखनऊ में बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी, छात्रों ने दिखाए 146 मॉडल:कचरे से बिजली-हाइड्रोपोनिक खेती के मॉडल बनाए, नवाचार क्षमता का प्रदर्शन
लखनऊ के बख्शी का तालाब स्थित कुम्हरावां इंटर कॉलेज में शनिवार को बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी-2026 का आयोजन किया गया। इसमें विद्यार्थियों ने 146 मॉडल प्रस्तुत किए। इनमें 111 कार्यकारी और 35 स्थिर मॉडल शामिल रहे। ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और नवाचार क्षमता का प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी का मुख्य विषय ‘सतत एवं विकसित भारत के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार’ रहा। कचरे से बिजली उत्पादन, प्लास्टिक और अपशिष्ट पदार्थों के पुन: उपयोग, स्वदेशी कृषि पद्धति और हाइड्रोपोनिक खेती से जुड़े मॉडल आकर्षण का केंद्र रहे। गणितीय मॉडल के जरिए विद्यार्थियों ने ऊंचाई-दूरी और ज्यामितीय अवधारणाओं को भी समझाया। अतिथियों ने विद्यार्थियों से पूछे सवाल जिला विद्यालय निरीक्षक देवेंद्र कुमार पांडेय ने फीता काटकर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। मंडलीय विज्ञान प्रगति अधिकारी एवं विद्यालय के प्राधिकृत नियंत्रक डॉ. दिनेश कुमार विशिष्ट अतिथि रहे। अतिथियों ने मॉडलों का निरीक्षण कर विद्यार्थियों से उनकी कार्यप्रणाली, वैज्ञानिक सिद्धांत और उपयोगिता के बारे में जानकारी ली। बच्चों ने आत्मविश्वास के साथ अपने मॉडल की विशेषताएं बताईं। सीमित संसाधनों में तैयार किए मॉडल शिक्षकों के मार्गदर्शन और विद्यालय परिवार के सहयोग से बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा उत्पादन और कृषि से जुड़ी समस्याओं के समाधान प्रस्तुत किए। डॉ. दिनेश कुमार ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, समस्या समाधान की क्षमता और नवाचार की प्रवृत्ति विकसित करते हैं। उन्होंने बच्चों को अपने विचारों और मॉडलों को आगे विकसित करने के लिए प्रेरित किया। देवेंद्र कुमार पांडेय ने भी विद्यार्थियों की रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच की सराहना की। निर्णायक मंडल ने किया मूल्यांकन मॉडलों का मूल्यांकन सेवानिवृत्त शिक्षाविद सीताकांत बाजपेई, शिवेंद्र कुमार और राजन कुमार ने किया। निर्णायकों ने वैज्ञानिक अवधारणा, मौलिकता, कार्यप्रणाली, प्रस्तुतीकरण और उपयोगिता के आधार पर मॉडलों को परखा। विज्ञान एवं गणित शिक्षक पवन कुमार तिवारी, राजन कुमार श्रीवास्तव और रोहित कुमार के निर्देशन में विद्यार्थियों ने मॉडल तैयार किए। प्रधानाचार्य शिवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य बच्चों को किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उन्हें प्रयोग करने, सवाल पूछने और अपने विचारों को साकार करने के अवसर देना है।
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