लखनऊ में एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई:प्रतिबंधित कफ सिरप के अवैध कारोबार का मास्टरमाइंड भूपिंदर सिंह चौहान गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने फेन्सेडिल कफ सिरप और कोडीन युक्त अन्य प्रतिबंधित दवाओं का नशे के रूप में अवैध भंडारण व व्यापार करने वाले एक और शातिर अभियुक्त को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। एसटीएफ ने मंगलवार (14 अक्टूबर 2026) को कमिश्नरेट लखनऊ क्षेत्र से वांछित अभियुक्त भूपिंदर सिंह चौहान को धर दबोचा। गिरफ्तारी का विवरण एसटीएफ टीम को अभिसूचना संकलन के दौरान पुख्ता जानकारी मिली थी कि इस मामले में वांछित अभियुक्त भूपिंदर सिंह चौहान अपने अन्य साथियों (विभोर, विशाल, सचिन, बिट्टू आदि) से मिलने जिला कारागार, लखनऊ आया हुआ है। इस सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए निरीक्षक अंजनी कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में एसटीएफ टीम ने मुखबिर की निशानदेही पर 14 अक्टूबर 2026 की शाम लगभग 18:25 बजे शहीद पथ तिराहे के पास से अभियुक्त को दबोच लिया। उसके पास से दो मोबाइल फोन, एक एटीएम कार्ड और 2300 रुपये नकद बरामद किए गए। फार्मा सेक्टर से जुड़े होने का उठाया फायदा पूछताछ में अभियुक्त भूपिंदर सिंह चौहान ने खुलासा किया कि उसने जनवरी 2006 से जून 2013 तक निकोलस पिरामल (बाद में एबॉट हेल्थकेयर) कंपनी में पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के एरिया मैनेजर के रूप में काम किया था। वर्ष 2014 में उसने अपने भांजे विशाल सिंह के नाम से 'VET AGENCIES' का ड्रग लाइसेंस बनवाकर एबॉट कंपनी का स्टॉकिस्ट डलवाया। इसके बाद वर्ष 2016-17 में दूसरे भांजे विभोर राणा के नाम से 'GR TRADING' फर्म शुरू की, जिसे दिसंबर 2018 में सुपर डिस्ट्रीब्यूटरशिप मिल गई। फर्जी फर्मों और हवाला के जरिए होता था तस्करी का खेल अभियुक्त ने पूछताछ में बताया कि वर्ष 2019 में कंपनी से इस्तीफा देने के बाद वह 'GR TRADING' में मैनेजर बन गया। कोरोना काल के दौरान कफ सिरप का कारोबार तेजी से बढ़ा। इसके बाद विशाल सिंह के नाम पर संचालित फर्म 'BN Pharmaceuticals' को सीएफए (CFA) बनवा लिया गया, जहां भूपिंदर और संजय शर्मा को कम्पीटेंट पर्सन बनाया गया था। अलीगढ़, सहारनपुर, गाजियाबाद, मेरठ और मुरादाबाद समेत कई जिलों के स्टॉकिस्टों को कफ सिरप की बिक्री की जाती थी। बोगस फर्मों के जरिए त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल तक तस्करी पूछताछ में सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क में कागजों पर माल की खरीद-बिक्री दिखाने के लिए गाजियाबाद में कई फर्जी और डमी फर्में (जैसे- वाशु एंटरप्राइजेज, अमर ट्रेडर्स, अंकित फार्मा और कृष्णा फार्मा) बनाई गई थीं। इन बोगस फर्मों का माल अमित गुप्ता (गोरखपुर) और आसिफ (मेरठ) बिना बिल-कागज के खरीदते थे। इसके बाद इस अवैध सिरप को नशे के रूप में इस्तेमाल के लिए त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल की सीमा पर सक्रिय तस्करों तक पहुंचाया जाता था, जिसका भुगतान हवाला के जरिए होता था। कार्रवाई और अगला कदम एसटीएफ और एफएसडीए (FSDA) की लगातार कार्रवाई के बाद दिसंबर 2024 से कंपनी ने फेन्सेडिल कफ सिरप का निर्माण बंद कर दिया था। इसके बाद एसटीएफ ने विभोर, विशाल, सचिन और बिट्टू जैसे मुख्य आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। अब एसटीएफ ने इस कड़ी में भूपिंदर सिंह चौहान को भी गिरफ्तार कर थाना सुशांत गोल्फ सिटी में दर्ज अभियोग के तहत अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
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