लखनऊ में लेटे हुए हनुमान जी का गर्भ ग्रह जलमग्न:15 वें दिन भी दर्शन बंद , 1 फीट घटा पानी , पुजारी बोले - मां गोमती का दिख रहा है रौद्र रूप
लखनऊ मंगलवार को 15 वें दिन भी गोमती उफान पर है। करीब 5 लाख लोग प्रभावित हैं। बढ़ते जलस्तर का असर गोमती तट के मंदिरों पर भी दिख रहा है। पातालपुरी लेटे हनुमान मंदिर का गर्भगृह पूरी तरह पानी में डूबा है। मंदिर प्रशासन के मुताबिक, हनुमान जी की प्रतिमा के ऊपर अभी तक लगभग 13 फीट पानी बह रहा था मगर अब घट के 12 फीट हो गया है। सुरक्षा को देखते हुए मंदिर का मुख्य हिस्सा यानी गर्भगृह बंद कर दिया गया है। मंदिर के पुजारी अमन मिश्रा ने बताया कि भक्तों के दर्शन के लिए हनुमान जी की चरण पादुका बाहर रखी हुई है। हनुमान जी को स्नान कराने के बाद अब उन्हें विश्राम अवस्था में रखा गया है। पिछले 15 दिनों में मात्र 1 फीट ही पानी कम हुआ है। बताया कि 2006 के बाद पहली बार ऐसी स्थिति बनी है। जलस्तर कम होने की के लिए लगातार विशेष पूजा की जा रही है। जल भराव से 30% आबादी प्रभावित' मंदिर के पुजारी विनोद तांगड़ी ने बताया कि मानवीय दृष्टिकोण से यह बेहद दुखद स्थिति है। लखनऊ की करीब 30% आबादी प्रभावित हुई है, खासकर डाउनस्ट्रीम इलाकों में रहने वाले लोग। फैजुल्लागंज और घैला समेत कई इलाके पूरी तरह डूब रहे हैं। यह स्थिति कहीं न कहीं हमारी अपनी गलतियों का भी नतीजा है। हमने नदियों का सम्मान नहीं किया और प्रकृति व प्राकृतिक संसाधनों का लगातार दोहन किया। पेड़ काटते गए और प्रकृति के साथ संतुलन बिगड़ता गया। आज इसका असर हमारे सामने है। ‘गोमती में गिरने वाले नाले के रहे हैं दूषित’ सरकारी स्तर पर इस पर ध्यान देना चाहिए। लगभग 32 नाले हैं जो मां गोमती में सीधे गिर रहे हैं। तो माता भी अपने आप को स्वच्छ करने के लिए आज विशाल जल प्रवाह लेके आई हैं कि जिससे जितनी भी गंदगी है सब भाग जाए। दुनिया कि गंदगी, प्लास्टिक, गंदगी सब नदी में मिलेगा। जो गोमती का अपमान किया है उसका दंश तो हम ही को झेलना पड़ेगा।
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