लखनऊ में श्रीराम कथा आयोजित:शबरी की नवधा भक्ति, हनुमान मिलन और सीता खोज के प्रसंगों का वर्णन
लखनऊ के प्राचीन श्री लेटे हुए हनुमान जी मंदिर, पंचवटी घाट, चौक में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीराम कथा के षष्ठम दिवस कथा व्यास परम पूज्य स्वामी विष्णु दास जी महाराज ने शबरी की नवधा भक्ति, प्रभु श्रीराम एवं हनुमान जी के मिलन, सुग्रीव से मित्रता, बालि वध तथा माता सीता की खोज के अत्यंत भावपूर्ण एवं प्रेरणादायी प्रसंगों का वर्णन किया। कथा के दौरान स्वामी विष्णु दास जी महाराज ने शबरी की नवधा भक्ति की भावपूर्ण व्याख्या करते हुए कहा कि भगवान को प्राप्त करने के लिए भक्ति के सभी नौ स्वरूपों का पूर्ण रूप से पालन करना ही आवश्यक नहीं है, बल्कि सच्ची श्रद्धा और निष्कपट भाव से की गई एक प्रकार की भक्ति भी मनुष्य के जीवन को भगवान की ओर ले जाने का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। हनुमान जी कर्म, भक्ति और विनम्रता के आदर्श हनुमान जी के चरित्र का वर्णन करते हुए स्वामी विष्णु दास जी महाराज ने कहा कि “बिना कर्म के सिद्धि नहीं प्राप्त होती, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण श्री हनुमान जी हैं।” उन्होंने कहा कि श्री हनुमान जी जैसा भक्त संसार में अन्यत्र मिलना कठिन है। उनकी स्वामी भक्ति, कर्मप्रधानता, अद्भुत सामर्थ्य, निरभिमानता और पूर्ण समर्पण प्रत्येक मनुष्य के लिए आदर्श हैं। हनुमान जी ने अपनी शक्ति का उपयोग कभी अहंकार के लिए नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम की सेवा और लोककल्याण के लिए किया। उन्होंने कहा कि हनुमान जी का चरित्र हमें सिखाता है कि केवल ज्ञान या भक्ति पर्याप्त नहीं है, बल्कि भक्ति को कर्म में परिवर्तित करना ही वास्तविक साधना है। जब कर्म में भगवान के प्रति समर्पण जुड़ जाता है, तब वही कर्म साधना बन जाता है। हनुमान मिलन से सीता खोज तक भावपूर्ण कथा कथा के दौरान प्रभु श्रीराम और हनुमान जी के प्रथम मिलन का प्रसंग अत्यंत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात सुग्रीव से श्रीराम की मित्रता, बालि वध तथा माता सीता की खोज के प्रसंगों का विस्तृत वर्णन किया गया। हनुमान जी द्वारा माता सीता की खोज के लिए समुद्र लांघने और प्रभु श्रीराम के कार्य को पूर्ण करने के संकल्प का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा व्यास ने कहा कि श्री हनुमान जी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि जिस व्यक्ति के जीवन का उद्देश्य सेवा और प्रभु कार्य हो, उसके लिए कोई भी कार्य असंभव नहीं रहता। इन प्रसंगों के दौरान पूरे कथा पंडाल में भक्तिमय एवं भावुक वातावरण बना रहा। श्रद्धालु श्रीराम नाम और भक्ति रस में डूबे नजर आए तथा समय-समय पर “जय श्रीराम” और “जय बजरंगबली” के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा। कथा संयोजक डॉ. पंकज सिंह भदौरिया ने बताया कि माता गोमती का जलस्तर लगातार बढ़ने के बावजूद श्रीराम कथा में श्रद्धालुओं की संख्या निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद भक्तों की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं आई है। इस अवसर पर प्रमुख रूप से श्री तुलसी पीठाधीश्वर नीमसार हनुमानगढ़ के महंत बजरंग दास जी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे कथा व्यवस्थापक प्रहलाद अग्रवाल रिद्धि किशोर गौड़ आशीष अग्रवाल अभिषेक गुप्ता अजय मेहरोत्रा अतुल गुप्ता उषा अग्रवाल अखिलेश कुमार अमित शर्मा के साथ मंदिर प्रबंधन, आयोजन समिति के सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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