प्रयागराज के 72 प्रधानाचार्यों को मिला 'दक्ष' प्रशिक्षण:स्कूल संचालन और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर दी गई जानकारी
माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को विद्यालय संचालन, प्रशासनिक दायित्व और विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं की जानकारी देने के लिए डायट प्रयागराज में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण के द्वितीय चरण का बुधवार को समापन हुआ। प्रशिक्षण में जिले के 72 प्रधानाचार्यों ने प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण के दौरान प्रधानाचार्यों को विद्यालय के प्रभावी संचालन के लिए तैयार की गई हस्तपुस्तिका ‘दक्ष’ के विभिन्न आयामों की जानकारी दी गई। साथ ही मनोविज्ञान शाला के ‘मनप्रभा’ मॉड्यूल के माध्यम से विद्यार्थियों और विद्यालय के वातावरण में मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उपाय बताए गए। प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रधानाचार्यों को उनके कार्यों एवं दायित्वों के प्रति अधिक सक्षम बनाना रहा, ताकि विद्यालय संचालन के दौरान आने वाली प्रशासनिक एवं शैक्षिक समस्याओं का प्रभावी ढंग से समाधान किया जा सके। प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी को प्रधानाचार्य अपने-अपने विद्यालयों में लागू करेंगे। इससे विद्यालयों में बेहतर प्रबंधन, शैक्षिक वातावरण और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। मानसिक स्वास्थ्य पर ‘मनप्रभा’ मॉड्यूल की जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान मनोविज्ञान शाला द्वारा तैयार ‘मनप्रभा’ मॉड्यूल पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसमें विद्यालयों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों और विद्यार्थियों की मनोवैज्ञानिक जरूरतों को समझने पर विस्तृत चर्चा हुई। मनोविज्ञान शाला के प्रवक्ता डॉ. असित कुमार मौर्या और डॉ. जोया परवीन ने प्रधानाचार्यों को मॉड्यूल की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने और विद्यालयी वातावरण को सहयोगात्मक बनाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। ‘दक्ष’ के विभिन्न आयामों पर चर्चा
प्रशिक्षण के मास्टर ट्रेनर मोहम्मद रफीक, वीरभद्र प्रताप और डॉ. धनन्जय यादव ने प्रधानाचार्यों को ‘दक्ष’ हस्तपुस्तिका के विभिन्न आयामों की जानकारी दी। सत्रों में प्रधानाचार्य की भूमिका, विद्यालय संचालन से जुड़े दायित्वों और प्रभावी प्रबंधन से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। प्रशिक्षण में इस बात पर जोर दिया गया कि प्रधानाचार्य प्रशिक्षण में सीखी गई व्यवस्थाओं और प्रक्रियाओं को विद्यालय स्तर पर लागू करें, ताकि स्कूलों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
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