लखनऊ पुस्तक मेले के आठवे दिन सामाजिक स्थिति पर चर्चा:महिलाओं की सामाजिक स्थिति पर विमर्श, 11 अक्टूबर तक चलेगा मेला

Oct 08, 2026 - 22:45
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लखनऊ पुस्तक मेले के आठवे दिन सामाजिक स्थिति पर चर्चा:महिलाओं की सामाजिक स्थिति पर विमर्श, 11 अक्टूबर तक चलेगा मेला
लखनऊ में 23वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले के आठवें दिन नारी विमर्श से जुड़ी पुस्तकों ने पाठकों का ध्यान खींचा। मेले में महिलाओं की सामाजिक स्थिति, पितृसत्ता, लैंगिक भेदभाव और डिजिटल दौर में महिलाओं के सामने आ रही नई चुनौतियों पर आधारित कई किताबें उपलब्ध हैं। मेला 11 अक्टूबर तक चलेगा। नारी विमर्श की एक पुस्तक में कहा गया है कि समाज ने नारी को कभी त्याग की प्रतिमा बनाया तो कभी प्रलोभन का प्रतीक। दोनों ही स्थितियां उसकी स्वतंत्रता को सीमित करती हैं। इसी सवाल को मेले में मौजूद कई किताबों में अलग-अलग नजरिए से उठाया गया है। ‘मोर्चे पर स्त्री’ भी पाठकों के बीच चर्चा लौरा बेट्स की ‘द न्यू एज ऑफ सेक्सिज्म’ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल माध्यमों के जरिए महिलाओं के खिलाफ पैदा हो रही नई चुनौतियों पर चर्चा है। नीलिमा पाण्डेय की ‘स्त्री : मिथक और यथार्थ’ में पुरुष प्रधान व्यवस्था और महिलाओं की सामाजिक स्थिति को सामने रखा गया है। वहीं ‘साइलेंस्ड वायसेज और इतिहास में स्त्री अस्मिता की तलाश’, डॉ. सुनीता की ‘राजनीति में फँसी स्त्री’, सुजाता की ‘पितृसत्ता, यौनिकता और समलैंगिकता’ और अंजू दुआ जैमिनी की ‘मोर्चे पर स्त्री’ भी पाठकों के बीच चर्चा में हैं। 18 साल बाद फिर प्रकाशित हुई किताबें सामयिक प्रकाशन के स्टॉल पर सीमा दीक्षित की ‘नई स्वाधीनता के नए आयाम’ और शशि कला राय की ‘इस्पात में ढलती स्त्री’ 18 साल बाद दोबारा प्रकाशित हुई हैं। बोधरस प्रकाशन की ‘सीतायणम्’ में सीता हरण के बाद के प्रसंगों को स्त्री पक्ष से देखने का प्रयास किया गया है। स्टार्टअप आइडिया को मिला मंच मुख्य मंच पर ‘लान्चअप पिच फेस्ट 2.0’ में 28 संस्थापकों ने हिस्सा लिया। आठ ने अपने बिजनेस आइडिया प्रस्तुत किए। तरुण कुमार विजेता रहे, जबकि अंकित शंकर और इम्तियाज हुसैन उपविजेता रहे। प्रतिभागियों को पांच लाख रुपए तक की फंडिंग के लिए शॉर्टलिस्ट होने का मौका मिला। इसके अलावा पुस्तकों के विमोचन, काव्य गोष्ठी, कवि सम्मेलन और लोकगीतों की महफिल भी सजी। ‘बन्ना-बन्नी’ और ‘सइयां मिले लरकइयां’ जैसे लोकगीत प्रस्तुत किए गए। शाम की परिचर्चा में पुरुषों से जुड़े सामाजिक अनुभवों और चुनौतियों पर भी चर्चा हुई।

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