दूध हुआ महंगा, फिर भी ग्राहकों की जेब रहेगी सुरक्षित!

महाराष्ट्र में गणेशोत्सव से पहले पुणे जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ ने किसानों से खरीदे जाने वाले गाय और भैंस के दूध की कीमत में एक रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। हालांकि ग्राहकों के लिए दूध की खुदरा कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

Sep 10, 2026 - 13:05
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दूध हुआ महंगा, फिर भी ग्राहकों की जेब रहेगी सुरक्षित!

दि राइजिंग न्यूज | महाराष्ट्र | 10 सितंबर 2026

महाराष्ट्र में गणेशोत्सव से पहले दूध उत्पादकों के लिए राहत की खबर सामने आई है। पुणे जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ ने गाय और भैंस के दूध की खरीद कीमत में एक रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है। नई दरें अगले दिन से लागू होंगी। इस फैसले से सहकारी केंद्रों पर दूध बेचने वाले किसानों को अब पहले की तुलना में प्रति लीटर एक रुपया अधिक भुगतान मिलेगा।खास बात यह है कि दूध की खरीद कीमत बढ़ने के बावजूद इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर नहीं पड़ेगा। कात्रज डेयरी ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों के लिए दूध के खुदरा बिक्री मूल्य में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। यानी दुकानों पर मिलने वाले दूध के पैकेट पहले की दर पर ही बिकेंगे। इस फैसले से किसानों को अतिरिक्त आय मिलने के साथ-साथ त्योहार के समय आम परिवारों पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ भी नहीं पड़ेगा।

चारा और पशु आहार की बढ़ती लागत बनी वजह

पुणे जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ के अनुसार, पशुपालकों के सामने पिछले कुछ समय से चारे, पशु आहार और दूध ढुलाई से जुड़े खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। बढ़ती लागत का सीधा असर किसानों के मुनाफे पर पड़ रहा था। ऐसे में दूध की खरीद कीमत में एक रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी को किसानों के लिए राहत के कदम के तौर पर देखा जा रहा है।दूध उत्पादन में किसानों को पशुओं के चारे, देखभाल और परिवहन पर नियमित रूप से खर्च करना पड़ता है। जब इन खर्चों में बढ़ोतरी होती है तो दूध बेचने से मिलने वाली आमदनी का बड़ा हिस्सा लागत में चला जाता है। खरीद कीमत बढ़ने से किसानों को अपनी बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा पूरा करने में मदद मिलेगी। इससे दुग्ध उत्पादन से जुड़े किसानों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

ग्राहकों के लिए दूध की कीमत में नहीं हुआ बदलाव

दूध की खरीद कीमत बढ़ाए जाने के बावजूद आम ग्राहकों के लिए खुदरा कीमत में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। इसका अर्थ यह है कि उपभोक्ताओं को दुकानों से दूध खरीदते समय पहले जितनी ही राशि का भुगतान करना होगा। कात्रज डेयरी ने साफ किया है कि किसानों को दी जाने वाली अतिरिक्त एक रुपये की राशि का भार डेयरी स्वयं वहन करेगी।खरीद कीमत और खुदरा कीमत के बीच अंतर को समझना इस पूरे फैसले को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। खरीद कीमत वह राशि है जो डेयरी या सहकारी संस्था किसानों से दूध खरीदते समय देती है, जबकि खुदरा कीमत वह राशि है जो उपभोक्ता बाजार में दूध खरीदते समय चुकाता है। इस मामले में खरीद कीमत बढ़ी है, लेकिन खुदरा कीमत को फिलहाल पहले जैसा ही रखा गया है।

गाय के दूध की नई खरीद कीमत कितनी हुई

नई व्यवस्था के बाद 3.5 प्रतिशत वसा और 8.5 प्रतिशत ठोस-निर्वसा पदार्थ वाले गाय के दूध की खरीद कीमत 39.80 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 40.80 रुपये प्रति लीटर हो गई है। यानी किसानों को प्रत्येक लीटर दूध पर पहले की तुलना में एक रुपया अधिक मिलेगा। दूध की गुणवत्ता के आधार पर खरीद कीमत तय करने की व्यवस्था के तहत यह बदलाव किया गया है।इस बढ़ोतरी का सीधा लाभ उन किसानों को मिलेगा जो अपना दूध जिला सहकारी केंद्रों के माध्यम से बेचते हैं। लगातार बढ़ रहे उत्पादन खर्च के बीच प्रति लीटर एक रुपये की अतिरिक्त आमदनी भले ही छोटी दिखाई दे, लेकिन बड़ी मात्रा में दूध बेचने वाले पशुपालकों के लिए इससे दैनिक और मासिक आमदनी में अंतर पड़ सकता है। त्योहारों के दौरान दूध की मांग बढ़ने से किसानों को इसका अतिरिक्त लाभ भी मिल सकता है।

गणेशोत्सव में दूध और दुग्ध उत्पादों की मांग बढ़ने की उम्मीद

गणेशोत्सव महाराष्ट्र के सबसे बड़े त्योहारों में शामिल है। इस दौरान घरों, दुकानों और मिठाई बनाने वाले प्रतिष्ठानों में दूध से तैयार होने वाले विभिन्न पकवानों की मांग बढ़ जाती है। पेड़ा, मोदक, बर्फी और अन्य मिठाइयों को तैयार करने में बड़ी मात्रा में दूध और उससे बनने वाले उत्पादों का इस्तेमाल किया जाता है।त्योहार के दौरान दूध और मावे की मांग में लगभग 35 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होने की संभावना बताई गई है। ऐसे समय में दूध की उपलब्धता बनाए रखना डेयरी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। किसानों को बेहतर खरीद मूल्य मिलने से उन्हें अधिक उत्पादन के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है और त्योहार के दौरान बढ़ी हुई मांग को पूरा करने में मदद मिल सकती है।

भैंस के दूध की कीमत में पहले हो चुकी है बड़ी बढ़ोतरी

महाराष्ट्र में दूध की कीमतों को लेकर हाल के दिनों में कई बदलाव देखने को मिले हैं। मुंबई में मुंबई मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन की ओर से भैंस के दूध की खरीद कीमत में नौ रुपये प्रति लीटर तक की बड़ी बढ़ोतरी की गई थी। इसके मुकाबले पुणे में किसानों के लिए की गई एक रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी अपेक्षाकृत सीमित है।हालांकि दोनों मामलों में खरीद कीमत और उपभोक्ता कीमत के बीच अंतर महत्वपूर्ण है। पुणे के कात्रज डेयरी ने किसानों को बढ़ी हुई कीमत देने के बावजूद ग्राहकों के लिए खुदरा बिक्री दर में बदलाव नहीं किया है। इससे त्योहार से पहले दूध खरीदने वाले परिवारों को तत्काल अतिरिक्त खर्च का सामना नहीं करना पड़ेगा।

किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए राहत

दूध की खरीद कीमत में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा लाभ पशुपालक किसानों को मिलेगा। बढ़ती लागत के दौर में उन्हें दूध का बेहतर मूल्य मिलने से उनकी आय में सुधार हो सकता है। दूसरी ओर खुदरा कीमत स्थिर रखने से आम उपभोक्ताओं पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।गणेशोत्सव जैसे बड़े त्योहार से ठीक पहले लिया गया यह फैसला दुग्ध क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ किसानों को बढ़ी हुई लागत के बीच राहत मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ ग्राहकों को पहले की दर पर दूध मिलता रहेगा। ऐसे में फिलहाल महाराष्ट्र के उपभोक्ताओं के लिए यह खबर राहत देने वाली है।

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