एसआईआर विवाद पर ममता का बड़ा हमला, ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग

एसआईआर विवाद के बीच ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग की है। उन्होंने एसआईआर के बाद चुनाव वाले राज्यों में दोबारा चुनाव कराने और मतदाता सूची की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। वहीं, भाजपा ने विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए चुनाव आयोग के फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बताया है।

Sep 23, 2026 - 17:51
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एसआईआर विवाद पर ममता का बड़ा हमला, ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 23 सितंबर 2026


एसआईआर को लेकर जारी विवाद के बीच पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग की है। उन्होंने एसआईआर के बाद चुनाव वाले राज्यों में दोबारा चुनाव कराने की मांग भी उठाई। दूसरी ओर, भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए चुनाव आयोग के फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बताया है।

ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की ममता ने की मांग

ममता बनर्जी ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए और उनकी गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर के माध्यम से मतदाता सूची में गड़बड़ी की गई है, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। ये आरोप ममता बनर्जी की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। ममता बनर्जी ने कहा कि एसआईआर के बाद जिन राज्यों में चुनाव कराए गए, वहां चुनावी प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में पुराने मतदाता आधार पर फिर से चुनाव कराने की मांग रखी। उनकी मांग ऐसे समय आई है जब निर्वाचन आयोग के भीतर कथित आपत्तियों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।

एसआईआर को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग आमने-सामने

एसआईआर विवाद उस रिपोर्ट के बाद और तेज हुआ, जिसमें दावा किया गया कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर कई बार आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसी आपत्तियों की संख्या कम से कम 14 बताई गई है। इसके बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए और जांच तथा कार्रवाई की मांग की। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कहा है कि सदस्यों के बीच अलग-अलग राय, सुझाव और टिप्पणियां किसी बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था की सामान्य विचार-विमर्श प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

चुनाव आयोग ने कहा- सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए

निर्वाचन आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि एसआईआर समेत उसके प्रमुख फैसले पूर्ण आयोग की मंजूरी से लिए गए हैं। आयोग के अनुसार, आंतरिक स्तर पर सवाल उठना या किसी विषय पर सुझाव देना अंतिम निर्णय से अलग प्रक्रिया है। आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली को संविधान के अनुच्छेद 324 और संबंधित कानूनों के तहत संचालित बताया है। आयोग का कहना है कि अलग-अलग टिप्पणियों को संस्था के भीतर टकराव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उसके अनुसार, अंतिम आदेश और फैसले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए जारी किए जाते हैं। इस मुद्दे पर आयोग और विपक्षी दलों के दावों में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है।

ममता ने चुनावी प्रक्रिया की समीक्षा की मांग उठाई

ममता बनर्जी ने एसआईआर के बाद हुए चुनावों की समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि जिन राज्यों में इस प्रक्रिया के बाद चुनाव हुए हैं, वहां दोबारा मतदान कराया जाना चाहिए। उन्होंने निर्वाचन व्यवस्था और मतदाता सूची से जुड़े पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई है। उनकी मांग का आधार एसआईआर और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों से जुड़े आरोप हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और कहा है कि उसके फैसले कानून तथा निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार लिए गए हैं।

भाजपा ने कहा- अलग राय लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी एसआईआर विवाद पर विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के सदस्यों के बीच विचार-विमर्श और अलग-अलग राय सामने आना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने आयोग की ओर से जारी स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए कहा कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।संबित पात्रा ने यह भी कहा कि वह चुनाव आयोग की ओर से बयान देने नहीं आए हैं, बल्कि आयोग की ओर से जारी स्पष्टीकरण को सामने रख रहे हैं। इससे पहले भाजपा ने विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को लेकर सवाल उठाने का आरोप लगाया था।

एसआईआर विवाद पर बढ़ा राजनीतिक टकराव

एसआईआर को लेकर अब भाजपा, विपक्षी दलों और निर्वाचन आयोग के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विपक्षी नेता आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि आयोग अपने फैसलों को कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया गया बता रहा है। ममता बनर्जी की ताजा मांग ने इस विवाद को और राजनीतिक रूप दे दिया है। फिलहाल मुख्य मुद्दे एसआईआर की प्रक्रिया, मतदाता सूची में बदलाव और निर्वाचन आयोग के भीतर कथित आपत्तियों से जुड़े हैं। इन मुद्दों पर अलग-अलग राजनीतिक पक्षों के दावे सामने आ रहे हैं।

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