मेरठ कोर्ट ने सांपकांड को माना रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस:एडीजीसी बोले- रिश्तों के कत्ल पर कोर्ट सख्त ,समाज में जाएगा सकारात्मक संदेश
मेरठ में पति की हत्या कर उसे सांप के काटने से हुई मौत दिखाने की साजिश रचने वाली पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को अदालत ने मृत्युदंड सुनाया है। रविता ने प्रेमी अमरदीप के साथ मिलकर पहले पति का गला दबाकर हत्या की, फिर वारदात को छिपाने के लिए बिस्तर पर सांप छोड़ दिया। अदालत ने मामले की गंभीरता, रिश्तों में विश्वासघात और अपराध के तरीके को देखते हुए इसे विरलतम से विरलतम यानी ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी का अपराध माना। फैसले के बाद सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (एडीजीसी) शिवम गुप्ता ने कहा कि अभियोजन की प्रभावी पैरवी के चलते अदालत के सामने पूरे मामले की सच्चाई सामने आई। न्यायालय ने केस के तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद मृत्युदंड का फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि समाज में उसका प्रभाव भी दिखाई देना चाहिए। इस फैसले से ऐसे अपराध करने वालों को कड़ा संदेश जाएगा। एडीजीसी शिवम गुप्ता ने इस मामले की तुलना मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड से भी की। दोनों मामलों में पति की हत्या में पत्नी और उसके प्रेमी की भूमिका सामने आई। हालांकि, नीला ड्रम हत्याकांड में शव को काटकर ड्रम में छिपाने जैसी क्रूरता सामने आई थी, जबकि रविता-अमरदीप के मामले में हत्या को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने की कोशिश की गई। अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोनों ही मामलों में रिश्तों के विश्वास को तोड़कर हत्या की गई, इसलिए अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए कठोरतम सजा सुनाई। एडीजीसी क्राइम नीरज सोम के मुताबिक, यह मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था। अभियोजन की ओर से अदालत में 12 गवाह पेश किए गए। साक्ष्यों के आधार पर साबित हुआ कि पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या की और वारदात को दूसरा रूप देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में प्रत्येक परिस्थिति और साक्ष्य की कड़ी को जोड़ना महत्वपूर्ण होता है। नीरज सोम ने बताया कि फैसले के दौरान न्यायाधीश ने महाभारत, रामायण और सत्यवान-सावित्री के प्रसंगों का उल्लेख किया। सावित्री ने अपने पति के प्राण बचाने के लिए संघर्ष किया था, जबकि इस मामले में पत्नी पर ही पति की हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप साबित हुआ। अदालत ने इसे वैवाहिक रिश्ते में विश्वासघात और रिश्तों को कलंकित करने वाला जघन्य अपराध माना। नीरज सोम के अनुसार, सजा सुनाए जाने से पहले अदालत ने आरोपियों से पूछा था कि वे मृत्युदंड चाहते हैं या आजीवन कारावास। इस पर दोनों ने कहा कि न्यायालय जो भी निर्णय देगा, वे उसे स्वीकार करेंगे।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)