मेरठ कपसाड़ केस की ट्रॉयल प्रक्रिया 17 अक्टूबर से शुरु:पीड़िता के भाई नरसी समेत अन्य गवाहों की होगी गवाही, SC/ST कोर्ट करेगी सुनवाई
मेरठ के चर्चित कपसाड़ कांड केस में 17 अक्टूबर से ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होने जा रहा है। यह वही केस है, जिसमें खेत पर काम करने जा रही महिला की हत्या कर आरोपी युवक उसकी बेटी को अगवा कर ले गया था। अभी तक यह मामला प्री ट्रायल स्टेज पर था। पुलिस द्वारा पेश की गई चार्ज शीट का कोर्ट ने संज्ञान लेकर आरोपी पारस सोम के खिलाफ पर्याप्त सबूत मानते हुए केस चलाने की अनुमति दे दी। इससे पूर्व नियमानुसार कोर्ट ने आरोपी पारस सोम से भी उसका पक्ष जाना। कोर्ट में ट्रायल के दौरान वादी पक्ष के अधिवक्ता समस्त साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए इस केस से जुडे़ गवाहों के बयान दर्ज कराएंगे। 8 जनवरी, 2026 की सुबह सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव की रहने वाली 50 वर्षीय सुनीता जाटव अपनी 20 वर्षीय बेटी रूबी के साथ गन्ने के खेत में काम करने जा रही थी। रास्ते में गांव के ही एक युवक पारस सोम ने रूबी को जबरन अगवा करने की कोशिश की। जब सुनीता ने बेटी रूबी को बचाने के लिए पारस का कड़ा विरोध किया तो आरोप है कि पारस ने दरांती से सुनीता के सिर और गर्दन पर हमला कर दिया। गंभीर चोटों के कारण सुनीता को उपचार के लिए भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान सुनीता की मौत हो गई और आरोपी रूबी को अगवा कर फरार हो गया। अब सिलसिलेवार समझिए पूरी घटना
- यह मामला दो अलग-अलग समुदायों ठाकुर और दलित से जुड़ा था। जिस कारण पूरे गांव में भारी तनाव फैल गया। गुस्साए ग्रामीणों ने एम्बुलेंस में तोड़फोड़ की और सुनीता का शव रखकर धरना दिया। स्थिति को संभालने के लिए गांव में 10 से ज्यादा थानों की पुलिस, RAF और PAC बल तैनात करना पड़ा। - तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मेरठ विपिन ताडा ने मामले की गंभीरता को समझते हुए पुलिस की 10 टीमों का गठन किया। पुलिस टीमों ने तुरंत एक्शन लेते हुए इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से 10 जनवरी, 2026 को आरोपी पारस सोम को हरिद्वार रुड़की के पास से गिरफ्तार कर लिया और रूबी को सुरक्षित बरामद कर लिया। - कड़ी सुरक्षा में पुलिस ने आरोपी पारस को कोर्ट के समक्ष पेश किया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। जबकि रूबी काउंसलिंग के बाद परिजनों के साथ घर भेजी गई। - पारस के जेल जाने के बाद उसके वकील संजीव राणा, बलराम सोम और विजय शर्मा ने स्कूल के प्रमाण पत्रों और आधार कार्ड के हवाले से दावा किया था कि पारस नाबालिग (करीब 17 वर्ष 7 महीने) है। इसके बाद फरवरी 2026 में मामले को किशोर न्याय बोर्ड (जेजे बोर्ड) में स्थानांतरित कर दिया गया था। - वादी पक्ष के विरोध और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद बोर्ड ने 12 मई, 2026 को आरोपी का मेडिकल परीक्षण यानि ओसिफिकेशन टेस्ट कराया जिसमें उसकी आयु 19 वर्ष पाई गई। - क्यूंकि यह परीक्षण वारदात के लगभग 4 महीने बाद हुआ था, इसलिए मेडिकल बोर्ड ने गणना करके स्पष्ट किया कि घटना के दिन यानि 8 जनवरी, 2026 को आरोपी पारस सोम की वास्तविक उम्र 18 वर्ष, 7 महीने और 26 दिन थी। आइए जानते हैं ट्रायल की प्रक्रिया को
- एडवोकेट राजेंद्र कुमार बताते हैं कि आरोपी पारस सोम को बालिग घोषित किए जाने के बाद अब विशेष SC-ST कोर्ट में 17 अक्टूबर से नियमित ट्रायल यानी मुकदमे की सुनवाई शुरू हो रही है। - भारतीय आपराधिक कानून यानी CRPC/BNSS के तहत सबसे पहले वादी पीड़िता रूबी के भाई नरसी के बयान दर्ज होंगे। - नरसी के बाद मामले की सबसे महत्वपूर्ण गवाह यानी खुद रूबी के बयान अदालत में दर्ज कराए जाएंगे। क्योंकि वह घटना की मुख्य चश्मदीद है, इसलिए उसका बयान सबसे मायने रखेगा। - रूबी के अलावा घटना के समय मौजूद उसकी सहेलियां, गांव के अन्य स्वतंत्र गवाह और सुनीता को अस्पताल ले जाने वाले लोगों के बयान दर्ज होंगे। - इसके बाद पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर, ओसिफिकेशन टेस्ट (उम्र जांच) करने वाले मेडिकल बोर्ड के सदस्य, फोरेंसिक टीम (FSL) के एक्सपर्ट और मामले के विवेचक जिन्होंने चार्जशीट दाखिल की है, अपनी गवाही देंगे। अब शुरु होगी न्याय की लड़ाई रूबी के भाई व केस के वादी नरसी का कहना है कि असली लड़ाई अब शुरु होगी। उनका उद्देश्य केवल आरोपी पारस सोम को फांसी की सजा दिलाना है। उसको सजा दिलाने के बाद ही हमारी मां की आत्मा को शांति होगी और बहन को न्याय मिलेगा। अधिवक्ता बोले- केस की नींव मजबूत इस केस में रूबी पक्ष की शुरुआतीपैरवी करने वाले एडवोकेट राजेंद्र कुमार बताते हैं कि उन्होंने बेहद गंभीरता से केस पर काम किया है। अब केवल कोर्ट में मजबूती से खड़ा होना है। आरोपी पक्ष को सजा दिलाने से कोई नहीं रोक सकता। हालांकि उन्होंने बताया कि वह अब इस केस को छोड़ चुके हैं।
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