मेरठ में मयूर विहार की वैधता पर हाईकोर्ट सख्त:MDA सचिव से मांगा जवाब,रिकॉर्ड के साथ हलफनामा दाखिल करने के निर्देश
मेरठ के शास्त्री नगर स्थित ई-ब्लॉक आवासीय योजना के पीछे विकसित की गई निजी आवासीय कॉलोनी मयूर विहार की वैधता को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। मंगलवार को मामले की सुनवाई हुई जिसके आदेश शुक्रवार को अपलोड किए गए। कोर्ट ने विकास प्राधिकरण को 48 घंटे के भीतर आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मयूर विहार कॉलोनी के मानचित्र से संबंधित सभी रिकॉर्ड तलब किए हैं। याचिकाकर्ता लोकेश कुमार खुराना की ओर से अधिवक्ता अजय कुमार कश्यप और विशाखा दुबे ने हाईकोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि मयूर विहार कॉलोनी स्वीकृत मानचित्र के अनुसार विकसित नहीं की गई है। याचिकाकर्ता के अनुसार कॉलोनी विकसित करते समय उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की शास्त्री नगर ई-ब्लॉक आवासीय योजना के रास्ते का इस्तेमाल किया गया लेकिन इसके लिए परिषद के संबंधित खंड कार्यालय से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं लिया गया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि एनओसी के बिना ई-ब्लॉक आवासीय योजना के रास्ते का इस्तेमाल करने का कॉलोनाइजर को अधिकार नहीं था। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की पीठ ने की। कोर्ट ने मयूर विहार कॉलोनी के मानचित्र से संबंधित समस्त रिकॉर्ड तलब करते हुए मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) के सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। आदेश के अनुसार विकास प्राधिकरण को 48 घंटे के भीतर आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा। यदि अगली सुनवाई तक सचिव संबंधित रिकॉर्ड के साथ हलफनामा दाखिल नहीं कर पाते हैं तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर पूरे मामले का रिकॉर्ड प्रस्तु करना होगा। मेरठ विकास प्राधिकरण को अपना पक्ष रखने के लिए 29 अक्तूब 2026 की तारीख निर्धारित की गई है।
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