मेरठ में पांच वर्ष में मौत के ब्लैक स्पॉट दोगुने:2815 हादसों में 1355 ने गंवाई जान, 23 से बढ़कर 47 हो गए ब्लैक स्पॉट

Oct 12, 2026 - 23:18
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मेरठ में पांच वर्ष में मौत के ब्लैक स्पॉट दोगुने:2815 हादसों में 1355 ने गंवाई जान, 23 से बढ़कर 47 हो गए ब्लैक स्पॉट
शहर से लेकर हाईवे तक सड़क हादसों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए जिम्मेदार विभागों की कवायद के बीच जिले में ब्लैक स्पॉट की संख्या एक साल में दोगुने से ज्यादा हो गई है। वर्ष 2025 तक जिले में 23 ब्लैक स्पॉट चिह्नित थे, लेकिन हालिया सर्वे में इनकी संख्या बढ़कर 47 पहुंच गई। विभागीय सूत्रों की मानें तो यही हालात रहे तो साल के अंत तक जिले में ब्लैक स्पॉट की संख्या 50 के पार जा सकती है। हादसों के आंकड़े सड़क सुरक्षा के इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। वर्ष 2021 में जिले में 820 सड़क हादसों में 390 लोगों की मौत हुई थी। 2025 में हादसों की संख्या बढ़कर 1090 और मृतकों का आंकड़ा 520 तक पहुंच गया। इस वर्ष अब तक 700 से ज्यादा हादसों में 340 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। चिंताजनक पहलू यह भी है कि उपलब्ध विभागीय आकलन के मुताबिक, करीब 65 प्रतिशत हादसे नेशनल हाईवे पर हो रहे हैं। तेज रफ्तार को दुर्घटनाओं की प्रमुख वजह बताया जा रहा है। कागजों पर कार्रवाई, सड़कों पर बढ़ता रहा खतरा ब्लैक स्पॉट की संख्या में अचानक हुई बढ़ोतरी ने सड़क सुरक्षा से जुड़े विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दुर्घटना संभावित स्थलों पर सुधार के लिए कई बार कागजी कार्रवाई तक ही प्रयास सीमित रहे। हादसों की आशंका वाले स्थानों पर स्थायी सुधार, सुरक्षित यातायात व्यवस्था और प्रभावी निगरानी की कमी भी समस्या को बढ़ा सकती है। विभागों के बीच समन्वय बड़ी समस्या सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल यातायात पुलिस तक सीमित नहीं है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई), लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और नगर निगम की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। सड़क की बनावट, संकेतक, रोड मार्किंग, कट, अंधे मोड़ और प्रकाश व्यवस्था जैसे पहलुओं में कमियां दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा सकती हैं। ऐसे में ब्लैक स्पॉट की संख्या बढ़ना संबंधित विभागों के बीच समन्वय की दिक्कत को दर्शाता है। पांच साल में कैसे बदले हादसों के आंकड़े वर्ष 2021 से 2025 के बीच सड़क हादसों और मृतकों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पांच वर्षों में कुल 4820 सड़क हादसे हुए और 2315 लोगों की मौत हुई। हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या वर्ष 2021 के 390 से बढ़कर 2025 में 520 हो गई। ब्लैक स्पॉट में तेजी से आया उछाल ब्लैक स्पॉट के आंकड़ों में भी उतार-चढ़ाव के बाद तेज उछाल सामने आया। वर्ष 2021 में इनकी संख्या 17 से 21 के बीच बताई गई। वर्ष 2022 में 17 ब्लैक स्पॉट दर्ज किए गए। इसके बाद वर्ष 2023, 2024 और 2025 में संख्या 23 रही। अब हालिया सर्वे में यह आंकड़ा 47 पहुंच गया है। हाईवे पर रफ्तार बन रही जानलेवा जिले में सड़क हादसों का बड़ा हिस्सा नेशनल हाईवे पर है। हाईवे पर वाहनों की गति, सड़क की स्थिति, कट, मोड़, संकेतकों की उपलब्धता और दुर्घटना के बाद समय पर मदद पहुंचना जैसे कारक हादसों की गंभीरता को प्रभावित करते हैं। ऐसे में दुर्घटना संभावित स्थलों की पहचान के साथ गति नियंत्रण, स्पष्ट संकेतक, रिफ्लेक्टर, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और खतरनाक कटों को बंद करने जैसे उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करना जरूरी है। एसपी बोले- ब्लैक स्पॉट खत्म करने के लिए काम जारी एसपी ट्रैफिक राजेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि ब्लैक स्पॉट खत्म करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। दुर्घटना संभावित स्थानों पर रोड मार्किंग कराई गई है। रिफ्लेक्टर और दुर्घटना संभावित क्षेत्र के बोर्ड लगाए गए हैं। इसके अलावा अवैध कट बंद कराए गए हैं और कई स्थानों पर कन्वैक्स मिरर लगाए जा रहे हैं, ताकि मोड़ या कम दृश्यता वाले स्थानों पर वाहन चालकों को सामने से आने वाले वाहनों का अंदाजा मिल सके।

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