महंगाई ने घटाई रावण के पुतलों की ऊंचाई:रामपुर में 50 फीट से सिमटकर 35 फीट रह गए
रामपुर में हिंदुस्तान की राजधानी दिल्ली से करीब 200 किलोमीटर दूर रामपुर में तीन पीढ़ियों से रावण के पुतले बनाने वाला अब्दुल रहमान का परिवार महंगाई की मार झेल रहा है। बांस, कागज और मजदूरी के दाम लगातार बढ़ने से पुतले बनाने की लागत बढ़ गई है, लेकिन तैयार पुतलों की कीमतों में उस हिसाब से बढ़ोतरी नहीं हुई। पहले रावण का भारी भरकम पुतला 50 फीट लंबा होता था अब मंहगाई की वजह से 35 फीट में सिमट गया है। अब्दुल रहमान ने सोमवार की दोपहर 12 बजे बताया पहले दादा गुफरान रावण के पुतले बनाते थे। करीब 20 साल पहले उनका निधन हो गया। इसके बाद उनके पिता मंजूर ने इस काम को आगे बढ़ाया। आठ महीने पहले पिता की भी मौत हो गई। अब वह खुद इस पारंपरिक काम को संभाल रहे हैं। उनका कहना है कि तीन पीढ़ियों से परिवार इसी काम में लगा है, लेकिन अब मेहनत के मुताबिक कमाई नहीं, रहमान के मुताबिक, पहले रामलीलाओं में रावण के पुतलों के अच्छे दाम मिल जाते थे और मजदूरी भी कम थी। खरीदार पुतलों की कीमत बढ़ाने को तैयार अब बांस और कागज महंगे हो गए हैं। पुतले तैयार करने के लिए मजदूरों को भी पहले से अधिक भुगतान करना पड़ता है। इसके बावजूद खरीदार पुतलों की कीमत बढ़ाने को तैयार नहीं हैं। इससे लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने बताया कि रामपुर में कोतवाली सिविल लाइंस के नजदीक ताशका माजरा के जंगल में किराए की जगह लेकर पुतले तैयार करते हैं। पहले शाहबाद गए नोवा अस्पताल के पास रावण बनाते थे, अब यहां बना रहे हैं। अब्दुल रहमान के अनुसार, विजयदशमी से पहले उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई जिलों में उनके बनाए रावण के पुतले भेजे जाते हैं। मेहनत और लागत बढ़ने के बावजूद उचित कीमत नहीं इस बार भी पुतलों की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन अपेक्षित कीमत नहीं मिल रही। उन्होंने कहा कि मजबूरी में खानदानी काम कर रहे हैं, क्योंकि दूसरा रोजगार नहीं है। अगर अगले साल तक पुतलों के दाम नहीं बढ़े तो वह रावण के पुतले बनाना बंद कर देंगे। मेहनत और लागत बढ़ने के बावजूद उचित कीमत नहीं मिलना उनके परिवार की सबसे बड़ी चिंता है।
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