महराजगंज में रात को मरीज बनकर जिला अस्पताल पहुंचे DM:इमरजेंसी से लेकर लेबर रूम तक जांच की, मरीजों से पूछा- किसी ने पैसे तो नहीं मांगे

Oct 06, 2026 - 08:23
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महराजगंज में रात को मरीज बनकर जिला अस्पताल पहुंचे DM:इमरजेंसी से लेकर लेबर रूम तक जांच की, मरीजों से पूछा- किसी ने पैसे तो नहीं मांगे
महाराजगंज जिला अस्पताल में रात के समय मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत जानने के लिए डीएम गौरव सिंह सोगरवाल सोमवार देर रात बिना प्रोटोकॉल और पूर्व सूचना के सामान्य व्यक्ति बनकर जिला संयुक्त चिकित्सालय पहुंच गए। अचानक डीएम के अस्पताल पहुंचने से कर्मचारियों में खलबली मच गई। उन्होंने सीधे मरीजों और तीमारदारों से बातचीत कर अस्पताल की व्यवस्थाओं का फीडबैक लिया। डीएम ने मरीजों से पूछा कि डॉक्टर समय पर मिल रहे हैं या नहीं, दवाएं उपलब्ध हैं या नहीं और इलाज अथवा किसी अन्य सुविधा के लिए किसी कर्मचारी ने अतिरिक्त पैसे तो नहीं मांगे। मरीजों और तीमारदारों ने ऐसी किसी मांग से इनकार किया। निरीक्षण के दौरान इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉ. श्वेतांशु शाही और डॉ. शालिनी वर्मा अनुपस्थित मिलीं। इस पर डीएम ने नाराजगी जताई और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ए.के. द्विवेदी को दोनों चिकित्सकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए। महिला अस्पताल के मुख्य द्वार पर तैनात गार्ड भी अनुपस्थित मिला। डीएम ने उसके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए। डीएम ने इमरजेंसी, प्रसव कक्ष, प्रसव पश्चात कक्ष, फार्मेसी और विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रसव पंजिका, पोषण पंजिका और रेफरल पंजिका समेत अन्य रिकॉर्ड भी देखे। कुछ पंजिकाएं निर्धारित प्रारूप में सही तरीके से भरी नहीं मिलीं। इस पर उन्होंने संबंधित स्टाफ नर्सों को चेतावनी देते हुए सभी अभिलेखों को नियमित रूप से अपडेट रखने के निर्देश दिए। डीएम ने प्रोजेक्ट पहचान के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि विकासात्मक बाधा और अस्थायी दिव्यांगता वाले बच्चों की समय से पहचान कर उनकी जांच और उपचार कराना जरूरी है। बच्चों से संबंधित सभी रजिस्टर व्यवस्थित और अद्यतन रखे जाएं, ताकि जरूरतमंद बच्चों को समय से उपचार और अन्य सुविधाएं मिल सकें। डीएम ने अस्पताल में साफ-सफाई, दवाओं की उपलब्धता, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की उपस्थिति तथा रात्रिकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को कमियां तत्काल दूर कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल में आने वाला प्रत्येक मरीज सम्मान और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का अधिकारी है। मरीजों को समय से इलाज और जरूरी दवाएं उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही, उदासीनता या मरीजों के साथ असंवेदनशील व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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