मिर्जापुर में पहली बार जलेगा रावण:154 साल से 10 सिर काटे जा रहे हैं, दहन से पहले ट्रैक्टर पर घुमाया जाएगा
मिर्जापुर में 154 सालों से रावण का सिर काटकर दशहरा मनाए जाने की परंपरा है। इस विजयादशमी यहां पहली बार रावण के दो पुतले देखने को मिलेंगे। 20 फीट ऊंचे लोहे के रावण का भगवान राम सिर काटेंगे, जबकि 35 फीट ऊंचे बांस के पुतले का दहन किया जाएगा। इससे पहले उसे पूरे बाजार में ट्रैक्टर पर घुमाया जाएगा। रामलीला कमेटी ने स्थानीय लोगों की सहमति से यह फैसला लिया है। यह आयोजन जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर ड्रमंडगंज बाजार में होगा। 10 सिरों वाला रावण ट्रैक्टर पर घुमाया जाएगा परंपरा के अनुसार, लोहे के दस सिर वाले रावण के पुतले को वध से पहले ट्रैक्टर-ट्रॉली पर रखकर ड्रमंडगंज बाजार में घुमाया जाएगा। राम और रावण का युद्ध होगा। इसके बाद भगवान राम तीर चलाकर रावण का बीच वाला सिर काटकर धड़ से अलग करेंगे। वहीं, बांस से तैयार किए जा रहे दूसरे रावण के पुतले का दशहरा मैदान में दहन किया जाएगा। पढ़िए कैसे अलग होता है रावण का सिर… ड्रमंडगंज के कलाकार दुल्लीचंद बिंद अपने 4 सहयोगियों के साथ करीब 15 दिन से पुतलों को बनाने में लगे हैं। उन्होंने बाताया- रावण के पुतले में सिर और धड़ को जंजीर से जोड़ा जाता है। तीर लगते ही पीछे से जंजीर को खींच दिया जाता है, जिससे की सिर धड़ से अलग हो जाता है। इसके बाद लोहे को रख लिया जाता है रामलीला कमेटी के अध्यक्ष आशीष गुप्ता उर्फ गूड्डू ने बताया कि कमेटी के पदाधिकारियों और स्थानीय लोगों की सहमति से इस बार दूसरे पुतले के दहन का फैसला लिया गया है। ग्राम प्रधान कौशलेंद्र गुप्ता ने बताया कि लोहे के रावण का सिर धड़ से अलग करने की पूर्वजों की परंपरा कायम रहेगी। दूसरे पुतले का दहन किया जाएगा। प्रयागराज और मध्य प्रदेश से आते हैं हजारों लोग
यहां का विजयदशमी मेला काफी मशहूर है। इसे देखने के लिए प्रयागराज और आसपास के जिलों के साथ मध्य प्रदेश से भी हजारों लोग पहुंचते हैं। इस बार दो पुतलों के आयोजन को लेकर लोगों में उत्सुकता है।
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